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कोरोना का कहर : अमेरिका में इतनी लाशें कि दफनाने के लिए कम पड़ गए कब्रिस्तान!

जिस अमेरिका ने दुनिया के लिए नई-नई खोज की है, नए-नए आविष्कार किए हैं, वही अमेरिका अब कोरोना से होने वाली मौतों की वजह से नए-नए कब्रिस्तान बनाने पर मज़बूर हो गया है.

अमेरिका. दुनिया का सबसे ताकतवर देश. कोई भी देश उसकी तरफ आंख तक नहीं उठा सकता. जिसने उठाया है, अमेरिका ने उसे जवाब दिया है. लेकिन अब यही अमेरिका बेबस है. लाचार है. और इसकी वजह है कोरोना का वायरस. जो नंगी आंख से दिखता नहीं है, लेकिन जिसने पूरी दुनिया को तबाही के मुहाने पर खड़ा कर दिया है. और इस तबाही का सबसे ज्यादा शिकार हुआ है अमेरिका.

और इस अमेरिका में भी सबसे ज्यादा तबाही किसी की हुई है तो वो है न्यू यॉर्क. 11 सितंबर, 2001 को जब अलकायदा ने न्यू यॉर्क के ट्वीन टावर पर हमला किया था, तो इस हमले में करीब 3 हजार लोग मारे गए थे. ये अमेरिका पर अब तक का सबसे बड़ा हमला था. लेकिन कोरोना नाम के इस वायरस की वजह से अकेले न्यू यार्क में ही सात हजार से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं और एक लाख 62 हजार लोग इस बीमारी से पीड़ित हैं. पूरे अमेरिका में बीमारी से पीड़ित लोगों का आंकड़ा पांच लाख को पार कर चुका है. मरने वालों की संख्या भी 18,000 से ज्यादा हो चुकी है.

और इस वजह से अब अमेरिका जैसे देश में सामूहिक तौर पर लोगों का अंतिम संस्कार करना पड़ रहा है. 24 घंटे के अंदर अमेरिका में 2000 से भी ज्यादा मौतें हुई हैं. एक साथ इतनी मौतों की वजह से अमेरिका में कब्रिस्तान कम पड़ गए हैं. न्यू यॉर्क से आए फोटो और वीडियो में साफ दिख रहा है कि वहां पर लाशों को एक साथ लकड़ी के ताबूत में रखा गया है और एक बड़े से गढ्ढे में उन्हें दफनाया जा रहा है. ये उस हॉर्ट आइलैंड के कब्रिस्तान की तस्वीर है, जहां पर पिछले करीब 150 सालों से उन लोगों का अंतिम संस्कार किया जाता था, जो लावारिस थे या फिर जिनकी लाश को लेने के लिए कोई नहीं आता था. आंकड़ों के मुताबिक हर हफ्ते करीब 25 ऐसी लाशों को इस कब्रिस्तान में दफन किया जाता था. और इस काम के लिए रिकर आइलैंड की जेल में बंद कैदियों की मदद ली जाती थी. लेकिन अब कोरोना की वजह से इतनी ज्यादा मौतें हो गई हैं कि इस कब्रिस्तान में हर रोज करीब 24 लाशें दफ्न की जा रही हैं और इसके लिए ठेकेदारों को काम पर रखा जा रहा है, क्योंकि जेल में बंद कैदी इस काम के लिए कम पड़ गए हैं.

इसके अलावा न्यू यॉर्क को लोगों के अंतिम संस्कार के कानून में भी बदलाव करना पड़ा है. पहले कानून था कि शवों को 14 दिनों तक अस्पताल के मोर्ग में रखा जा सकता था, लेकिन अब इतनी ज्यादा मौतें हो गईं हैं कि हर रोज लाशों का अंतिम संस्कार करना पड़ रहा है. इन लाशों को दफनाने के लिए हॉर्ट आइलैंड में एक मील के इलाके में नए सिरे से कब्र खोदी जा रही हैं. इन कब्रों में ताबूतों को इस तरह से दफनाया जा रहा है कि बाद में अगर परिवार वाले दावा करें तो लाशों को पहचाना जा सके. इसके अलावा ताबूतों को दफनाने के लिए जिन लोगों को कॉन्ट्रैक्ट दिया गया है, उन्हें सफेद रंग की पीपीई (पर्सनल प्रोटेक्शन इक्विपमेंट) दी गई है, ताकि उन्हें इन्फेक्शन से बचाया जा सके.

अमेरिका में स्थितियां कितनी भयावह हैं इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि पूरी दुनिया में कोरोना से पीड़ित लोगों की संख्या करीब 16 लाख है, जिनमें से अकेले अमेरिका में 4 लाख 67 हजार कोरोना पॉजिटिव हैं. जिस चीन से इस बीमारी की शुरुआत हुई थी, वहां कोरोना पॉजिटिव लोगों की संख्या महज 83,000 है. स्पेन में कोरोना पॉजिटिव की संख्या 1 लाख 57 हजार है, वहीं इटली में ये आंकड़ा 1 लाख 43 हजार का है. और अमेरिका का न्यू यॉर्क इकलौता ऐसा राज्य है, जहां पर किसी भी देश की तुलना में कोरोना पॉजिटिव की संख्या सबसे ज्यादा करीब 1 लाख 62 हजार है.

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