विवेक ऑबेरॉय के डेब्यू के लिए पिता सुरेश ने खटखटाए दरवाजे, बेटे ने भी झेला लंबा स्ट्रगल
विवेक ओबेरॉय के बॉलीवुड डेब्यू के पीछे उनके पिता सुरेश ओबेरॉय की भी बड़ी मेहनत थी. बेटे को मौका दिलाने के लिए सुरेश घर-घर गए, वहीं विवेक ने भी रिजेक्शन के बावजूद हार नहीं मानी.

एक्टर-एंटरप्रेन्योर विवेक ओबेरॉय ने साल 2002 में राम गोपाल वर्मा की फिल्म 'कंपनी' से बॉलीवुड में डेब्यू किया था. हाल ही में उनके पिता और दिग्गज एक्टर सुरेश ओबेरॉय ने बेटे के डेब्यू से पहले किए गए स्ट्रगल को याद किया.
सुरेश ओबेरॉय ने याद किए सट्रगल के दिन
सुरेश ने बताया कि विवेक को फिल्मों में मौका दिलाने के लिए वो उनकी तस्वीरें लेकर घर-घर जाते थे और कई लोगों से मुलाकात करते थे. उनकी मेहनत आखिरकार रंग लाई और विवेक को राम गोपाल वर्मा की फिल्म 'कंपनी' में लीड रोल मिल गया.
निधि वसंदानी के यूट्यूब चैनल से बातचीत में सुरेश ओबेरॉय ने बताया कि विवेक को फिल्मों में लॉन्च कराने के लिए उन्हें दोबारा स्ट्रगल करना पड़ा. उन्होंने कहा, 'मुझे उसके लिए फिर से स्ट्रगल करना पड़ा, घर-घर जाना पड़ा. जैसे मैं पहले अपनी तस्वीरें लेकर जाता था, वैसे ही अब विवेक की तस्वीरें लेकर जाता था.'
सुरेश ने बताया कि उस समय वो राम गोपाल वर्मा के साथ काम कर रहे थे और RGV अपनी फिल्म 'कंपनी' के लिए एक एक्टर की तलाश में थे. उन्होंने विवेक को एक्टिंग करते हुए देखने की इच्छा जताई. विवेक के पास अपने एक्टिंग इंस्टीट्यूट का एक रिकॉर्डेड टेप था, जिसे देखने के लिए राम गोपाल वर्मा उनके घर पहुंचे. सुरेश के मुताबिक, विवेक की परफॉर्मेंस देखकर RGV तुरंत इंप्रेस हो गए.

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विवेक ओबेरॉय ने अपने करियर में कई फिल्मों में काम किया है, लेकिन रानी मुखर्जी के साथ 'साथिया' उनके पिता सुरेश ओबेरॉय की पसंदीदा फिल्मों में से एक है. वहीं, बेटे की कामयाबी पर गर्व जताते हुए सुरेश ने बताया कि 'कंपनी' में विवेक की परफॉर्मेंस देखकर उनकी आंखों में आंसू आ गए थे.
विवेक ओबेरॉय का खुलासा
हालांकि, विवेक ओबेरॉय ने एक पुराने इंटरव्यू में कहा था कि उन्हें 'कंपनी' अपने दम पर मिली थी. उन्होंने बताया था कि उस समय वो खुद को 'विवेक आनंद' के नाम से इंट्रोड्यूस करते थे और अपना सरनेम ओबेरॉय इस्तेमाल नहीं करते थे.
विवेक ने कहा था कि वो प्रोडक्शन ऑफिस के चक्कर लगाते थे और ऑडिशन के लिए 6 से 10 घंटे तक लाइन में इंतजार करते थे. पिता की फिल्म में काम करने से मना करने के बाद करीब दो साल तक उन्होंने लगातार स्ट्रगल और रिजेक्शन्स का सामना किया, तब जाकर उन्हें 'कंपनी' मिली. विवेक के मुताबिक, उन्हें इस बात पर गर्व था कि उन्होंने ये मौका अपनी मेहनत और टैलेंट के दम पर हासिल किया.
'कंपनी' से हो गए थे रिजेक्ट
विवेक ओबेरॉय ने ये भी बताया कि राम गोपाल वर्मा ने शुरुआत में 'कंपनी' के लिए उन्हें ये कहकर रिजेक्ट कर दिया था कि वो फिल्म के किरदार के लिए 'बहुत ज्यादा पॉलिश्ड' लगते हैं. इसके बाद विवेक ने एक कमरा किराए पर लिया और एक स्ट्रगल कर रहे फोटोग्राफर से अपनी तस्वीरें खिंचवाईं.
करीब तीन हफ्ते बाद जब राम गोपाल वर्मा लौटे, तो विवेक सीधे उनके ऑफिस में फिल्म के किरदार वाले लुक में पहुंच गए. उनका ये अंदाज देखकर RGV को यकीन हो गया और आखिरकार विवेक को 'कंपनी' में रोल मिल गया.
विवेक ओबेरॉय की अपकमिंग फिल्म
अब विवेक ओबेरॉय जल्द ही नितेश तिवारी की 'रामायण' में नजर आएंगे. वो फिल्म 'स्पिरिट' का भी हिस्सा हैं.
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