क्या राजपाल यादव को हाइट को लेकर हुआ था इनफीरियॉरिटी कॉम्प्लेक्स? एक्टर ने खुद किया खुलासा
राजपाल यादव ने एक बातचीत के दौरान ‘इनफीरियॉरिटी कॉम्प्लेक्स’ पर अपने विचार रखे. बातों-बातों में उन्होंने यह भी बताया कि जिंदगी के एक दौर में उन्हें अपनी हाइट को लेकर इनफीरियॉरिटी कॉम्प्लेक्स हुआ.

कई लोग जिंदगी के किसी न किसी मोड़ पर ‘इनफीरियॉरिटी कॉम्प्लेक्स’ यानी हीन भावना का शिकार हो जाते हैं. यह ऐसी भावना है जो इंसान को भीतर से कमजोर कर देती है और उसे खुद की काबिलियत पर शक होने लगता है. बाहर से सब कुछ नॉर्मल दिखता है, लेकिन अंदर ही अंदर आत्मविश्वास डगमगाने लगता है. एक्टर राजपाल यादव ने इसी विषय पर खुलकर बात की. आइए जानते हैं उन्होंने क्या कहा.
‘इनफीरियॉरिटी कॉम्प्लेक्स’ पर क्या बोले राजपाल यादव?
कुछ समय पहले राजपाल यादव ने राज शमानी के साथ बातचीत में इस विषय पर खुलकर बात की. जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्हें कभी जिंदगी में ‘इनफीरियॉरिटी कॉम्प्लेक्स’ हुआ है, तो उन्होंने बेहद दिलचस्प जवाब दिया. राजपाल यादव ने कहा कि कॉम्प्लेक्स दुनिया के हर इंसान को कभी न कभी होता है, लेकिन उसे कैसे लेना है, यही असली बात है. उनके मुताबिक, अगर आप कॉम्प्लेक्स की गिरफ्त में फंस जाएं तो वह आपको कमजोर बना सकता है, लेकिन अगर आप ठान लें कि इसे बदलना है, तो वही सोच आपकी ताकत बन सकती है.
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हाइट को लेकर महसूस हुआ इनफीरियॉरिटी कॉम्प्लेक्स?
उन्होंने बताया कि अगर उन्हें अपनी हाइट को लेकर कॉम्प्लेक्स महसूस नहीं हुआ होता, तो शायद वह यहां तक पहुंचने के लिए इतनी मेहनत और संघर्ष नहीं कर पाते. राजपाल यादव का मानना है कि जब इंसान अपने अंदर की इस कमी को चुनौती मानकर उससे लड़ता है, तो वही ‘इनफीरियॉरिटी कॉम्प्लेक्स’ आगे बढ़ने की इंस्पिरेशन बन जाता है. उनके अनुसार, जरूरी है कि इंसान अपने अंदर चल रही उस ‘इंटरनल फाइट’ पर भरोसा करे और नेगेटिव सोच को पॉजिटिव में बदल दे.
‘कॉम्प्लेक्स’ होना भी जरूरी है- राजपाल यादव
राजपाल यादव ने आगे कहा कि इंसान के अंदर करियर को लेकर एक तरह का ‘कॉम्प्लेक्स’ होना भी जरूरी है. उनके मुताबिक, ये नेगेटिव नहीं, बल्कि एक तरह की अवेयरनेस है, जो आपको आगे बढ़ने के लिए गाइड करती रहती है. उन्होंने समझाया कि अगर यह भावना सकारात्मक हो, तो वही आपको बेहतर बनने, मेहनत करने और खुद को साबित करने के लिए प्रेरित करती है. इसलिए उनके अनुसार, एक ‘पॉजिटिव कॉम्प्लेक्स’ होना जरूरी है, जो इंसान को रुकने नहीं देता, बल्कि लगातार आगे बढ़ने की राह दिखाता है.
Source: IOCL


























