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West Bengal Elections 2026: 15 साल राज, अब अग्नि परीक्षा… क्या ‘ब्रांड ममता’ बंगाल में फिर से दिखा पाएगा करिश्मा?

West Bengal Elections 2026: 2011 के विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी ने 34 वर्षों से सत्ता में रही वाम सरकार को हटाकर 294 में से 184 सीटें जीतकर ऐतिहासिक जीत दर्ज की. इसके साथ ही वे राज्य की पहली महिला मुख्यमंत्री बनीं.

West Bengal Assembly Elections 2026: ममता बनर्जी पश्चिम बंगाल की सत्ता में लगातार 15 वर्षों तक बने रहने के बाद एक बार फिर इतिहास रचने की दहलीज पर खड़ी हैं. तृणमूल कांग्रेस की सुप्रीमो के तौर पर उन्होंने लंबे समय तक राज्य की राजनीति पर अपना प्रभाव बनाए रखा है.

ऐसे समय में जब भारतीय जनता पार्टी केंद्रीय नेतृत्व के दम पर पूरे जोर-शोर से चुनाव लड़ रही है, ममता बनर्जी एक मजबूत क्षेत्रीय नेता के रूप में अब भी डटी हुई नजर आती हैं. उनके शासनकाल में जहां वामपंथी दलों का प्रभाव लगभग खत्म हो गया, वहीं भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस भी काफी कमजोर हो गई. हालांकि, बीजेपी ने हाल के वर्षों में राज्य में अपनी पकड़ मजबूत करते हुए खुद को मुख्य चुनौती के रूप में स्थापित किया है.

ब्रांड ‘दीदी’ की अग्नि परीक्षा

इस चुनाव में ममता बनर्जी के सामने सबसे बड़ी चुनौती बीजेपी है. भ्रष्टाचार के आरोपों और सत्ता-विरोधी माहौल की चर्चाओं के बीच यह सवाल अहम है कि क्या टीएमसी अपने मुख्य प्रतिद्वंद्वी को फिर से मात दे पाएगी. ममता की लोकप्रियता सिर्फ उनके शासन तक सीमित नहीं रही, बल्कि उनकी सादगी और “मां, माटी, मानुष” की राजनीति ने उन्हें जनता से गहराई से जोड़े रखा है.

राजनीतिक सफर और उभार

1970-80 के दशक में छात्र राजनीति से शुरुआत करने वाली ममता बनर्जी ने कांग्रेस (आई) से अपने करियर की शुरुआत की. वे 1984 में पहली बार सांसद बनीं और धीरे-धीरे पश्चिम बंगाल में वामपंथ के खिलाफ सबसे मुखर चेहरा बन गईं.

1997 में उन्होंने तृणमूल कांग्रेस की स्थापना की और सीपीएम के खिलाफ मजबूत विकल्प के रूप में उभरीं. 2006 का सिंगूर आंदोलन उनकी राजनीति का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ, जहां उन्होंने टाटा के नैनो प्रोजेक्ट के खिलाफ किसानों के पक्ष में लंबा आंदोलन किया.

2011: सत्ता परिवर्तन का साल

2011 के विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी ने 34 वर्षों से सत्ता में रही वाम सरकार को हटाकर 294 में से 184 सीटें जीतकर ऐतिहासिक जीत दर्ज की. इसके साथ ही वे राज्य की पहली महिला मुख्यमंत्री बनीं. इसके बाद 2016 और 2021 में भी उन्होंने जीत दोहराई. 2021 में नंदीग्राम से हार के बावजूद उन्होंने भवानीपुर उपचुनाव जीतकर मुख्यमंत्री पद बरकरार रखा.

कुल मिलाकर, पश्चिम बंगाल की राजनीति इस वक्त एक अहम मोड़ पर है, जहां एक तरफ बीजेपी सत्ता में आने की कोशिश कर रही है, तो दूसरी ओर ममता बनर्जी अपनी पकड़ और “ब्रांड दीदी” की छवि के सहारे फिर से जीत का दावा कर रही हैं.

ये भी पढ़ें: 'जनता पर महंगाई की मार', आखिरी चरण की वोटिंग से पहले राहुल गांधी का पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर बड़ा बयान

राजेश कुमार पत्रकारिता जगत में पिछले करीब 14 सालों से ज्यादा वक्त से अपना योगदान दे रहे हैं. राष्ट्रीय और सामाजिक मुद्दों से लेकर अपराध जगत तक, हर मुद्दे पर वह स्टोरी लिखते आए हैं. इसके साथ ही, किसी खबरों पर किस तरह अलग-अलग आइडियाज के साथ स्टोरी की जाए, इसके लिए वह अपने सहयोगियों का लगातार मार्गदर्शन करते रहे हैं. इनकी अंतर्राष्ट्रीय जगत की खबरों पर खास नज़र रहती है, जबकि भारत की राजनीति में ये गहरी रुचि रखते हैं. इन्हें क्रिकेट खेलना काफी पसंद और खाली वक्त में पसंद की फिल्में भी खूब देखते हैं. पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखने से पहले उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में मास्टर ऑफ ब्रॉडकास्ट जर्नलिज्म किया है. राजनीति, चुनाव, अंतरराष्ट्रीय संबंधों और अर्थव्यवस्था जैसे मुद्दों पर राजेश कुमार लगातार लिखते आ रहे हैं.
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