एबीपी न्यूज सर्वे: मोदी सरकार को किसानों की तरफ से खतरे की घंटी
कैसा रहा मोदी सरकार का काम? क्या सोचते हैं देश के लोग? क्या मोदी राज में अच्छे दिन आए ? एबीपी न्यूज ने CSDS-लोकनीति के साथ देश का मूड समझने की कोशिश की है.

नई दिल्ली: एक फरवरी को मोदी सरकार अपना बजट पेश करने जा रही है. बजट से पहले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संकेत दिया कि यह आम लोगों की उम्मीदों पर खरा उतरने वाला होगा. अब इसी बयान से सियासी संकेत भी मिलने शुरू हो गये कि यह बजट 2019 लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखकर बनाया गया होगा. अब मोदी सरकार का पहला कार्यकाल अपने आखिरी चरण में है और 2019 के लिए विपक्ष ने भी अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं. बीजेपी की चुनौती सत्ता बरकरार रखने की है तो कांग्रेस वापसी के लिए बेताब है. जनता के मूड को भांपने के लिए एबीपी न्यूज-लोकनीति-सीएसडीएस ने सर्वे किया है.
नरेंद्र मोदी सरकार को तीन साल 9 महीने पूरे हो चुके हैं. इस दौरान कैसा रहा मोदी सरकार का काम? क्या सोचते हैं देश के लोग? क्या मोदी राज में अच्छे दिन आए ? एबीपी न्यूज ने CSDS-लोकनीति के साथ देश का मूड समझने की कोशिश की है.
देश में सबसे बड़ी समस्या क्या है ?
बेरोजगारी मई 2017- 25 % 2018- 28%
गरीबी मई 2017- 16 % 2018- 14 %
भ्रष्टाचार मई 2017- 13 % 2018- 9 %
महंगाई मई 2017- 8 % 2018- 10 %
मई 2017 के दौरान सर्वे में लोगों ने 25 % लोगों ने बेरोजगारी को सबसे बड़ी समस्या बताया था. अब इस नये साल में बेरोजगारी को बड़ी समस्या बताने वालों की संख्या 3% बढ़ गई है. हालांकि मई 2017 में गरीबी को बड़ी समस्या बताने वालों की संख्या 2 % कम हो गई है. चौंकाने वाली बात यह है भ्रष्टाचार को भी बड़ी समस्या मानने वालों की संख्या मई 2017 की तुलना में 4% कम हो गई है. लेकिन महंगाई को मई 2017 की तुलना में अभी लोग बड़ी समस्या मानते हैं.
बेरोजगारी किसके लिए बड़ी समस्या ? 18-25 साल- 36 % 26-35 साल- 32 % 36-45 साल- 25 %
देश में बीते 3-4 सालों में नौकरी मिलना मुश्किल हुआ? बहुत मुश्किल- 49 % मुश्किल- 19 % कोई फर्क नहीं- 21 %
सर्वे के मुताबिक 18-25 साल की उम्र के नवयुवक बेरोजगारी को बड़ी समस्या मानते हैं. करीब 68 % लोगों का मानना है कि पिछले 3-4 सालों में नौकरी मिलना मुश्किल हुआ है.
नोटबंदी की वजह से नौकरी गई ? गांव- 51 % छोटे शहर- 56 % बड़े शहर- 50 %
जीएसटी की वजह से नौकरी गई ? गांव- 41 % छोटे शहर- 50 % बड़े शहर- 46 %
सर्वे से स्प्ष्ट है कि जीएसटी और नोटबंदी से छोटे और बड़े शहर ज्यादा प्रभावित हुए हैं. छोटे शहरों के करीब 56% गांव के 51% लोगों का मानना है कि नोटबंदी की वजह से नौकरियां गईं. छोटे शहरों के करीब 50% लोगों का यह भी मानना है कि जीएसटी की वजह से नौकरियों से हाथ धोना पड़ा.
आपकी आर्थिक स्थिति पर कितना असर हुआ?
2014- 45 % बेहतर 2018- 48 % बेहतर
2014- 31 % बदलाव नहीं 2018 - 35 % बदलाव नहीं
2014- 21 % बदतर 2018- 16 % बदतर
सर्वे के मुताबिक, 2014 से 2018 में अपनी आर्थिक स्थिति को बेहतर बताने वालों की संख्या में 3 % इजाफा हुआ है. हालांकि 35 % लोगों का मानना है कि कोई बदलाव नहीं हुआ है.
मोदी सरकार के फैसले को कैसे देखते हैं ?
नोटबंदी जरूरी फैसला -53 % गलत फैसला- 29 % कुछ नहीं कहना- 18 %
जीएसटी जरूरी फैसला - 44 % गलत फैसला- 30% कुछ नहीं कहना- 26 %
सर्वे के मुताबिक नोटबंदी को 53 % लोग जबकि जीएसटी को 44 % लोग जरूरी फैसला मानते हैं.
अर्थव्यवस्था के लिए नोटबंदी कैसी रही ? अच्छा- 48% खराब- 34% पता नहीं- 18%
जीएसटी कैसा फैसला है ? परेशान करने वाला - 24% कम परेशान करने वाला -33% नहीं परेशान करने वाला- 14%
सर्वे के मुताबिक अर्थव्यवस्था के लिए नोटबंदी को 48% लोग अच्छा बता रहे हैं जबकि जीएसटी को 57 % लोग परेशान करने वाला फैसला मानते हैं.
किसानों की राय में कौन सरकार बेहतर ? यूपीए से बेहतर एनडीए- 23 % एनडीए से बेहतर यूपीए- 32 % दोनों में कोई फर्क नहीं- 36 %
किसानों के बारे में कौन सी पार्टी ज्यादा सोचती है ? बीजेपी- 22 % कांग्रेस- 22 % अन्य पार्टियां- 24 % कोई पार्टी नहीं- 22 %
मोदी सरकार में किसानों के अच्छे दिन आए ? हां- 41 % नहीं- 53 % नहीं पता- 6 %
देश में अभी किसानों की हालत कैसी है ? बहुत अच्छा- 19 % अच्छा- 27 % खराब- 50 %
किसानों के मु्द्दे पर मोदी सरकार के लिए खतरे की घंटी है. सर्वे के मुताबिक 32 % किसान एनडीए से बेहतर यूपीए को बता रहे हैं. हालांकि बड़ी संख्या दोनों को समान बताने वालों की है. जब किसानों से पूछा गया कि आपके बारे में कौन सी पार्टी ज्यादा सोचती है तो यहां भी सर्वे के मुताबिक किसान बीजेपी और कांग्रेस को बराबर मानते हैं. मोदी सरकार से किसानों की नाराजगी भी सर्वे में स्पष्ट दिखती है. करीब 53 % किसानों का मानना है कि मोदी सरकार के दौरान उनके अच्छे दिन नहीं आए. करीब 50 % लोग किसानों की हालत खराब मानते हैं.
कैसे हुआ सर्वे? ये सर्वे 7 से 20 जनवरी के बीच किया गया है. 19 राज्यों में 175 लोकसभा सीटों पर 14336 वोटरों से उनकी राय जानी गई है.
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Source: IOCL

















