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दिल्ली का दंगल: क्या सातों सीट बचा पाएगी बीजेपी? आप और कांग्रेस दे रही है कड़ी चुनौती

आम आदमी पार्टी, कांग्रेस और बीजेपी के कुल 21 उम्मीदवारों के बीच मुख्यतौर पर मुकाबला है. पिछले करीब छह सालों के चुनावों पर नजर डालें तो किसी में बीजेपी का तो किसी में आप का पलड़ा भारी रहा है.

नई दिल्ली: पांच चरणों के चुनाव के बाद अब सबकी नजर दिल्ली के दंगल पर टिकी है. वैसे तो यहां लोकसभा की मात्र सात सीटें हैं लेकिन यहां की जीत या हार मायने रखती है. राष्ट्रीय राजधानी में एक करोड़ 43 लाख मतदाताओं की बड़ी संख्या तो है ही, दिल्ली नेताओं से लेकर मीडिया घरानों का केंद्र है. इस ख्याल से भी कि अगले साल की शुरुआत में विधानसभा चुनाव होंगे.

लोकसभा चुनाव में सभी सीटों पर आम आदमी पार्टी, कांग्रेस और बीजेपी के बीच मुकाबला है. मतदाताओं को लुभाने के लिए दिल्ली में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी डोर टू डोर कैंपेन के फॉर्मूले पर काम कर रही है और बीजेपी-कांग्रेस छोटी-छोटी सभाएं कर रही है. बड़े नेताओं की बात करें तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी रैलियां कर चुके हैं. दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल आज प्रचार के आखिरी दिन भी जोर-शोर से जुटे हैं.

दिल्ली के सियासी हालात को देखें तो पिछले करीब छह सालों में पूरी तरह बदल चुकी है. इससे पहले विधानसा का चुनाव हो या लोकसभा का कांग्रेस और बीजेपी के बीच ही टक्कर रहती थी. लेकिन 2013 में दिल्ली की सियासत में आम आदमी पार्टी (आप) की एंट्री हुई. आप ने यहां के सियासी समीकरण पूरी तरह बदल दिए. राजनीति में आने के साथ ही पहले चुनाव में आप ने 2013 में दिल्ली की सत्ता पर कब्जा जमाया.

दिल्ली का दंगल: क्या सातों सीट बचा पाएगी बीजेपी? आप और कांग्रेस दे रही है कड़ी चुनौती

उसके अगले साल हुए लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने कांग्रेस और आप का सूपड़ा साफ कर दिया. मोदी लहर में बीजेपी ने दिल्ली की सभी सात सीटों पर जीत दर्ज की. लेकिन अगले साल ही हुए विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी (आप) ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की. दिल्ली की 70 विधानसभा सीटों में से 67 पर आप ने बाजी मारी.

कांग्रेस खाता खोलने में भी नाकामयाब रही. वहीं बीजेपी मात्र दो सीटों पर सिमट गई. पीएम मोदी के नेतृत्व में बीजेपी की केंद्र में सरकार बनने के बाद बीजेपी की यह पहली बड़ी हार थी. आप ने ही पीएम मोदी के नेतृत्व में बीजेपी के विजय रथ को पहली बार रोका. इसके बाद एमसीडी के चुनाव में बीजेपी ने भले ही कब्जा जमाया लेकिन आप और कांग्रेस दोनों दलों ने अपने प्रदर्शन में सुधार किया.

2013 और 2015 के विधानसभा चुनाव, 2009 और 2014 के लोकसभा चुनाव में राजनीतिक दलों को पड़े वोट प्रतिशत को देखें-

2009 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को 57.1 प्रतिशत और बीजेपी को 35.2 प्रतिशत वोट मिले. इस चुनाव में सभी सात सीटों पर कांग्रेस ने कब्जा जमाया था. 2014 के लोकसभा चुनाव पर नजर डालें तो बीजेपी ने इस चुनाव में बीजेपी को सबसे अधिक वोट मिले. बीजेपी ने 46.40 प्रतिशत, आप ने 32.90 प्रतिशत और कांग्रेस ने 15.10 प्रतिशत वोट हासिल किए.

2013 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने 31 सीटों, आप ने 28 सीटों और कांग्रेस ने आठ सीटों पर जीत दर्ज की. वहीं जेडीयू, अकाली दल और निर्दलीय ने एक-एक सीटें जीती. वोट प्रतिशत की बात करें तो इस चुनाव में बीजेपी ने 33.07 प्रतिशत, आप ने 29.49 प्रतिशत और कांग्रेस ने 24.55 प्रतिशत वोट हासिल किए थे.

2015 में हुए विधानसभा चुनाव को देखें तो कांग्रेस एक भी सीट जीतने में नाकामयाब रही. बीजेपी ने तीन और आप ने 67 सीटें जीती. वोट प्रतिशत देखें तो आप को 54.5 प्रतिशत और बीजेपी को 32.3 प्रतिशत और कांग्रेस को 9.7 प्रतिशत वोट मिले.

दिल्ली का दंगल: क्या सातों सीट बचा पाएगी बीजेपी? आप और कांग्रेस दे रही है कड़ी चुनौती

अब इन चुनावों में कांग्रेस, बीजेपी और आप के वोट प्रतिशत पर नजर डालें तो दिल्ली में आप की एंट्री से कांग्रेस को भारी नुकसान हुआ. लेकिन बीजेपी के वोट प्रतिशत में कोई खास अंतर नजर नहीं आता है.

इस बार के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस, आप और बीजेपी आक्रामक ढ़ंग से चुनाव लड़ रही है. इतिहास और वर्तमान खंगाले जा रहे हैं. बीजेपी को जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चेहरे पर भरोसा है तो वहीं आप को करीब चार साल में किये गए काम से उम्मीद. कांग्रेस शिला दीक्षित के समय में किये गए काम को गिना रही है और साथ ही साथ बीजेपी और कांग्रेस पर वादाखिलाफी का आरोप लगा रही है.

सात सीटों पर नजर डालें तो चांदनी चौक सीट पर बीजेपी नेता और केंद्रीय मंत्री हर्षवर्धन का मुकाबला कांग्रेस नेता जेपी अग्रवाल और आप नेता पंकज गुप्ता से है. 2014 के चुनाव में भी हर्षवर्धन ने चांदनी चौक सीट से जीत दर्ज की थी. वहीं उत्तर पूर्वी दिल्ली सीट से बीजेपी नेता मनोज तिवारी का मुकाबला दिल्ली कांग्रेस की अध्यक्ष शीला दीक्षित और आप नेता दिलीप पांडे से है. दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित को इस चुनाव से काफी उम्मीद दिख रही है.

पूर्वी दिल्ली सीट पर नजर डालें तो बीजेपी ने क्रिकेटर गौतम गंभीर को टिकट दिया है. वहीं कांग्रेस ने पार्टी के पूर्व अध्यक्ष अमरिंदर सिंह लवली को और आप ने आतिशी मार्लेना को उम्मीदवार बनाया है. दिल्ली की शिक्षा व्यवस्था में सुधार और विकास के नाम पर आतिशी चुनाव लड़ रही हैं. गौतम गंभीर पहली बार चुनावी पारी खेल रहे हैं. इस सीट से 2014 में बीजेपी नेता महेश गिरी ने जीत दर्ज की थी.

नई दिल्ली सीट से बीजेपी ने मीनाक्षी लेखी को टिकट दिया है. कांग्रेस की तरफ से पार्टी के पूर्व अध्यक्ष अजय माकन उम्मीदवार हैं. आप ने ब्रजेश गोयल को उतारा है. उत्तर पश्चिम दिल्ली (आरक्षित सीट) सीट से बीजेपी ने उदित राज का टिकट काटकर हंसराज हंस को टिकट दिया है. कांग्रेस ने राजेश लिलोथिया को और आप ने गुग्गन सिंह को उम्मीदवार बनाया है.

पश्चिमी दिल्ली सीट की बात करें तो बीजेपी ने प्रवेश वर्मा को, कांग्रेस ने महाबल मिश्रा को और आप ने बलवीर सिंह जाखड़ को मैदान में उतारा है. दक्षिण दिल्ली सीट से बीजेपी ने रमेश बिधूड़ी को, कांग्रेस ने विजेंदर सिंह और आप ने राघव चड्ढा को टिकट दिया है.

तीनों दलों के सभी 21 उम्मीदवार जीत के लिए हर कोशिश कर रहे हैं. राष्ट्रीय राजधानी में 12 मई को वोट डाले जाएंगे और 23 को नतीजे आएंगे. इन नतीजों से आगामी विधानसभा चुनाव का भी रुपरेखा तैयार होगा.

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