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Karnataka Elections: कर्नाटक की राजनीति का जातीय समीकरण क्या है? किन समुदायों की है महत्वपूर्ण भूमिका? जानें यहां

Karnataka: कर्नाटक की राजनीति में जातीय समीकरण का महत्व है, जिसको साधे बिना किसी भी दल का सत्ता तक पहुंचना आसान नहीं है. कर्नाटक में लिंगायत और वोक्कालिगा समुदायों का बहुत प्रभाव है.

Karnataka Election 2023: कर्नाटक के आगामी विधानसभा चुनाव में एक माह का समय बचा है. कुल 225 विधानसभा सीटों में से 224 सीटों पर 10 मई को वोटिंग होगी और एक सीट मनोनीत सदस्य के लिए आरक्षित है. दूसरे राज्यों की तरह कर्नाटक की राजनीति में भी जातीय समीकरण काफी महत्व रखता है, जिसको साधे बिना किसी भी दल का सत्ता तक पहुंचना आसान नहीं है. कर्नाटक में लिंगायत और वोक्कालिगा समुदायों का प्रभाव काफी ज्यादा है. ऐसे में जानते हैं कि कर्नाटक की राजनीति का जातीय समीकरण क्या है. इसके तहत आने वाले बड़े नेता कौन-कौन हैं?

कर्नाटक का जातीय समीकरण

कर्नाटक में सबसे बड़ा समुदाय लिंगायत है, जिसकी जनसंख्या करीब 17% है. फिलहाल, लिंगायत के सबसे बड़े नेता बीएस येदियुरप्पा हैं, जो बीजेपी से हैं. लिंगायत समुदाय का कर्नाटक का 75-80 विधानसभा सीटों पर प्रभाव है. इन सीटों पर 58 विधायक हैं. लिंगायत समुदाय का मुख्य मठ सिद्धगंगा है, जो तुमकुर में स्थित है.

लिंगायत समुदाय के कुल 400 से ज्यादा मठ हैं. लिंगायत, 12वीं सदी के समाज सुधारक-दार्शनिक कवि बसवेश्वर के अनुयायी हैं. बसवेश्वर जाति व्यवस्था और वैदिक कर्मकांडों के खिलाफ थे. लिंगायत कट्टर एकेश्वरवादी हैं और वे केवल एक भगवान यानि लिंग (शिव) की पूजा करने का आदेश देते हैं.

इसके बाद वोक्कालिगा समुदाय आता है, जिसकी आबादी 12% है. फिलहाल, वोक्कालिगा के सबसे बड़े नेता एचडी देवगौड़ा हैं, जो जेडीएस से हैं. वोक्कालिगा समुदाय का कर्नाटक की 50-55 विधानसभा सीटों पर प्रभाव है. इन सीटों पर 42 विधायक हैं. वोक्कालिगा समुदाय का मुख्य मठ आदिचुनचनगिरी है, जो मांड्या में स्थित है.

वोक्कालिगा समुदाय के कुल 150 से ज्यादा मठ हैं. वोक्कालिगा व्यवसाय के संदर्भ में परिभाषित एक श्रेणी है या एक जातीय श्रेणी हो सकती है. लेकिन, मूल रूप से ये किसान हैं. वोक्कालिगा जाति का प्रारंभ भारतीय राज्य कर्नाटक में हुआ है. मैसूर की पूर्व रियासत में वोक्कालिगा सबसे बड़ा समुदाय था. उन्होंने प्राचीन मैसूर में योद्धाओं और कृषकों के एक समुदाय के रूप में जनसांख्यिकीय, राजनीतिक और आर्थिक प्रभुत्त्व कायम रखा है.


Karnataka Elections: कर्नाटक की राजनीति का जातीय समीकरण क्या है? किन समुदायों की है महत्वपूर्ण भूमिका? जानें यहां

- फिर कुरुबा समुदाय आता है, जिसकी आबादी 8% है. फिलहाल, कुरुबा के सबसे बड़े नेता सिद्धारमैया हैं, जो कांग्रेस पार्टी से हैं. कुरुबा समुदाय का कर्नाटक की 25-30 विधानसभा सीटों पर प्रभाव है. इन सीटों पर 12 विधायक हैं. कुरुबा समुदाय का मुख्य मठ श्रीगैरे है, जो दावणगेरे में स्थित है. कुरुबा समुदाय के कुल 80 से ज्यादा मठ हैं. वर्तमान में कुरुबा समुदाय की जनसंख्या राज्य की कुल आबादी का 9.3% है और ये पिछड़े वर्ग की श्रेणी में आते हैं.

कुरुबा कर्नाटक में लिंगायत, वोक्कालिगा और मुसलमानों के बाद चौथी सबसे बड़ी जाति है. अन्य राज्यों में कुरुबा को अलग-अलग नामों से जाना जाता है. जैसे महाराष्ट्र में धनगर, गुजरात में रबारी या राईका, राजस्थान में देवासी और हरियाणा में गडरिया. इसके अलावा, कर्नाटक में मुस्लिम आबादी 13% है. वहीं, एससी 17 %, एसटी 7%, ईसाई 2% और जैन 1% हैं.

ये भी पढ़ें- Karnataka Elections 2023: क्‍या है पीएम मोदी के चर्च जाने के पीछे का मास्टर प्लान? जानें कर्नाटक चुनाव पर कितना असर पड़ेगा

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