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Karnataka Election: पूर्व पीएम एचडी देवगौड़ा की पार्टी JDS के लिए अस्तित्व की लड़ाई, क्या फिर बनेंगे किंगमेकर?

Karnataka Election 2023: पिछले कुछ चुनावों की तरह ही इस बार भी राजनीतिक दायरों में बात हो रही है. आंतरिक कलह और एक 'पारिवारिक पार्टी' होने की छवि के साथ क्या 'किंगमेकर' बनकर उभरेगी जेडी(एस)?

Karnataka Assembly Elections 2023: कर्नाटक विधानसभा के 10 मई को होने वाले विधानसभा चुनाव में सभी की नजरें इस ओर भी लगी हैं कि पूर्व प्रधानमंत्री एच डी देवेगौड़ा नीत जनता दल (सेक्युलर) के लिए यह राजनीतिक अस्तित्व की लड़ाई होगा या क्षेत्रीय पार्टी एक बार फिर 'किंग' या 'किंगमेकर' बनकर उभरेगी जैसा कि 2018 में त्रिशंकु जनादेश की स्थिति में हुआ था.

पिछले कुछ चुनावों की तरह ही इस बार भी राजनीतिक दायरों में इस बारे में बात हो रही है. दलबदल और आंतरिक कलह से त्रस्त, तथा एक 'पारिवारिक पार्टी' होने की छवि के साथ, देवगौड़ा के बेटे एच डी कुमारस्वामी ने एक तरह से अकेले अपने दम पर राज्य भर में जेडी (एस) के प्रचार का प्रबंधन किया, जिसमें उनके वृद्ध पिता पीछे रहे.

जेडी (एस) 'पंचरत्न' कार्यक्रम पर केंद्रित 

कुमारस्वामी ने अपने अभियान को 'पंचरत्न' नामक कार्यक्रम पर केंद्रित किया जिसमें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, स्वास्थ्य देखभाल, आवास, किसान कल्याण और रोजगार के मुद्दों को शामिल किया गया और कहा कि इन्हें जेडी(एस) के सत्ता में आने पर लागू किया जाएगा.

हालांकि, 89 वर्षीय देवेगौड़ा शुरुआत में उम्र संबंधी बीमारियों के कारण चुनाव प्रचार से दूर रहे, लेकिन उन्होंने पिछले कुछ सप्ताह में जेडी (एस) के उम्मीदवारों के लिए प्रचार किया, विशेष रूप से पार्टी के गढ़ माने जाने वाले पुराने मैसूर क्षेत्र में. उन्होंने अपनी पार्टी के खिलाफ कांग्रेस और बीजेपी के हमलों का मुकाबला किया.

दो बार सत्ता में, अपने दम पर सरकार नहीं

बीजेपी की ओर से दोनों दल कांग्रेस और जेडी (एस) को एक-दूसरे की 'बी टीम' बताया जाता रहा है. वर्ष 1999 में अपने गठन के बाद से, जेडी (एस) ने कभी भी अपने दम पर सरकार नहीं बनाई, लेकिन दोनों राष्ट्रीय दलों के साथ गठबंधन में वह दो बार सत्ता में रहा. फरवरी 2006 से वह बीजेपी के साथ 20 महीने सरकार में रहा और मई 2018 के विधानसभा चुनाव के बाद कांग्रेस के साथ 14 महीने सरकार में रहा जिसके मुख्यमंत्री कुमारस्वामी रहे.

इस बार, पार्टी ने कुल 224 सीट में से कम से कम 123 सीट जीतकर अपने दम पर सरकार बनाने के लिए 'मिशन 123' का एक महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है. हालांकि, कई राजनीतिक पर्यवेक्षकों और पार्टी के भीतर भी एक तबके को यह लक्ष्य प्राप्त होने को लेका संदेह है. जेडी (एस) का सबसे अच्छा प्रदर्शन 2004 के विधानसभा चुनाव में रहा था जब इसने 58 सीट जीती थीं. इसके बाद 2013 में इसने 40 सीट पर जीत दर्ज की थी. 2018 में इसके खाते में 37 सीट आई थीं.

ये भी पढ़ें- Karnataka Election 2023: कर्नाटक चुनाव में बीजेपी और कांग्रेस का क्या कुछ है दांव पर? जानें एक्सपर्ट्स की राय

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