पैकेट पर Red Label को लेकर छिड़ा घमासान, कंपनियां बोली- ऐसे तो कोई नहीं खरीदेगा
फूड रेगुलेट ने पैकेट वाले खाने-पीने को सामान पर लाल रंग का निशान लगाने का प्रस्ताव दिया है, इस निशान से ग्राहकों को पता चलेगा कि प्रोडेक्ट में नमक, फैट और चीनी की मात्रा ज्यादा तो नहीं है.

- यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जहां सरकार इसकी समीक्षा करेगी।
अगर आप किसी दुकान पर पैकेट वाले खाने का सामान खरीदने जाते हैं तो आप उसे खरीदने से पहले पैकेट पर लिखी कीमत, मैन्युफैक्चरिंग डेट और एक्सपायरी डेट को जरूर देखते होंगे, लेकिन अब हो सकता है कि आपको पैकेट फूड पर एक लाल रंग का निशान भी देखने को मिले. हालांकि, पैकेट में मिलने वाले खाने-पीने के सामान पर लाल रंग का निशान लगाने के प्रस्ताव को लेकर फूड कंपनियों ने कई सवाल उठाए हैं. सबसे पहले जानते हैं कि आखिर पैकेट वाले सामान पर लाल रंग का निशान लगाने के पीछे का मकसद क्या है?
दरअसल, फूड रेगुलेट ने पैकेज्ड फूड के सामने लाल हेक्सागन वॉर्निंग लेबल लगाने का प्रस्ताव दिया है. अगर इसके पीछे के उद्देश्य की बात करें तो पैकेज्ड फूड पर इसलिए लगाने का प्रस्ताव दिया गया है, ताकि जो भी ग्राहक पैकेट वाले खाने-पीने के सामान को खरीदते हैं, उन्हें यह पता चले कि किस प्रोडक्ट में फैट ,चीनी और नमक की मात्रा ज्यादा है. लेकिन बड़ी बात यह है कि फूड इंडस्ट्री पैकेज्ड फूड पर लेबल लगाने के प्रस्ताव का विरोध कर रही हैं.
फूड कंपनियों ने क्यों उठाए सवाल?
आपने भी देखा होगा कि पैकेज्ड फूड पर लाल और हरा रंग का निशान बना होता है. इसमें लाल रंग का मतलब होता है कि सामान नॉन-वेजिटेरियन है मतलब उस सामान को बनाने में मांस, मछ्ली या अंडे का इस्तेमाल किया गया है और हरे रंग के निशान से ग्राहकों को पता चलता है कि सामान शाकाहारी है. फूड कंपनियों ने भी लेबल के रंग और सिंबल को लेकर कई सवाल उठाए हैं.
उनका भी यही कहना है कि भारत में लाल रंग के निशान को ग्राहक नॉन-वेजिटेरियन खाने से जोड़ते हैं. अब अगर पैकेट पर बड़ा लाल निशान होगा तो ग्राहकों को कन्फ्यूजन हो सकती है और ऐसे वे सामान को खरीदने से भी बच सकते हैं.
मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा
बता दें कि ऑल इंडिया फूड प्रोसेसर्स एसोसिएशन ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल दस्तावेज में अपनी आपत्ति दर्ज कराई. उनका साफ कहना है कि वॉनिंग लेबल का रंग और सिंबल ग्राहकों की समझ और आदतों को देखते हुए रखना चाहिए, ताकि ग्राहकों को सामान खरीदते समय किसी तरह की कोई कन्फ्यूजन न हो.
सुप्रीम कोर्ट ने क्या फैसला किया?
मामले पर सरकार के इस प्रस्ताव को लेकर सुप्रीम कोर्ट सोमवार को समीक्षा करने वाला है. मतलब साफ है कि कोर्ट की सुनवाई के बाद ही यह साफ होगा कि पैकेट वाले लाल वॉनिंग लेबल को लेकर आगे क्या किया जाने वाला है.
कंपनियों का क्या कहना है?
कंपनियों ने मौजूदा प्रस्तावित सीमा को लेकर भी सवाल उठाए हैं. हालांकि, कंपनियों ने ऐसा बिल्कुल नहीं कहा है कि पैकेट के सामने वॉर्निंग लेबल नहीं होना चाहिए. उनका कहना केवल इतना है कि फैट, नमक से लेकर चीनी तक की कितनी मात्रा पर यह लेबल लगेगा, इसकी सीमा वैज्ञानिक आधार पर ही की जाए.
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