14 दिन में 1.4 लाख करोड़ स्वाहा! इस साल अब तक 7 प्रतिशत गिरे रिलायंस के शेयर, आगे क्या होगा?
रिलायंस इंडस्ट्रीज के दिसंबर तिमाही के नतीजों का ऐलान शुक्रवार को किया जाना है, लेकिन उससे पहले ही निवेशक सतर्क नजर आ रहे हैं. हालांकि, ज्यादातर ब्रोकरेज फर्म्स कंपनी को लेकर सकारात्मक रुख बनाए हुए हैं.

RIL Capital Wiped Off: वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच वर्ष 2026 की शुरुआत रिलायंस इंडस्ट्रीज के लिए खास अच्छी नहीं रही है. नए साल की शुरुआत से अब तक कंपनी के शेयरों में करीब सात प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है, जिससे बाजार पूंजीकरण में लगभग 1.4 लाख करोड़ रुपये की कमी आई है. रिलायंस के शेयरों पर दबाव की मुख्य वजह रूसी कच्चे तेल की खरीद को लेकर बढ़ी चिंताएं और कंपनी के रिटेल कारोबार में सुस्ती मानी जा रही है. यह गिरावट ऐसे समय में देखने को मिली है, जब पिछले वर्ष 2025 में मुकेश अंबानी के नेतृत्व वाली इस दिग्गज कंपनी ने शानदार प्रदर्शन किया था और निफ्टी पर इसके शेयरों में करीब 29 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई थी.
रिलायंस के शेयरों में क्यों गिरावट?
रिलायंस इंडस्ट्रीज के दिसंबर तिमाही के नतीजों का ऐलान शुक्रवार को किया जाना है, लेकिन उससे पहले ही निवेशक सतर्क नजर आ रहे हैं. हालांकि, ज्यादातर ब्रोकरेज फर्म्स कंपनी को लेकर सकारात्मक रुख बनाए हुए हैं. उनका मानना है कि वर्ष 2026 में रिलायंस के कारोबार पर अलग-अलग सेक्टरों का मिला-जुला असर देखने को मिलेगा. जहां एक ओर ऊर्जा कारोबार से मजबूत प्रदर्शन की उम्मीद जताई जा रही है, वहीं दूसरी ओर खुदरा कारोबार में दबाव बना रह सकता है.
ब्रोकरेज फर्म मॉर्गन स्टेनली के अनुसार, दिसंबर तिमाही में रिलायंस का EBITDA सालाना आधार पर करीब 10 प्रतिशत तक बढ़ सकता है, जिसकी बड़ी वजह ऑयल-टू-केमिकल (O2C) कारोबार में संभावित 16 प्रतिशत की वृद्धि है. हालांकि, ऊंचे डिप्रिसिएशन और ब्याज लागत के चलते कंपनी के शुद्ध मुनाफे में बढ़ोतरी केवल एक प्रतिशत तक सीमित रहने का अनुमान है.
मुनाफे में कमी
वहीं रिटेल कारोबार को लेकर तस्वीर थोड़ी कमजोर नजर आ रही है. ब्रोकरेज फर्म गोल्डमैन सैक्स ने दिसंबर तिमाही में रिलायंस रिटेल की बिक्री में सालाना आधार पर करीब 10 प्रतिशत की गिरावट का अनुमान जताया है, जबकि सितंबर तिमाही में यह वृद्धि 21.3 प्रतिशत रही थी. मॉर्गन स्टेनली का मानना है कि रिटेल सेगमेंट में ग्रोथ घटकर 9 से 10 प्रतिशत तक रह सकती है. इसके अलावा, कंज्यूमर प्रोडक्ट बिजनेस के डिमर्जर का असर भी रिटेल कारोबार की रफ्तार पर देखने को मिल सकता है.
डिस्क्लेमर: (यहां मुहैया जानकारी सिर्फ़ सूचना हेतु दी जा रही है. यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है. निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें. ABPLive.com की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है.)
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