युद्ध की मार, प्लास्टिक कारोबारी लाचार, दाम दोगुने होने से उत्पादन ठप, बोले- कोरोना से भी बुरे हालात
Impact on Plastics Industry Due to War: ईरान युद्ध के कारण कच्चे माल के दाम दोगुने होने से प्लास्टिक उद्योग बुरी तरह प्रभावित हुआ है और उत्पादन घटकर कारोबार ठप होने की कगार पर पहुंच गया है.

Iran war Impact on Plastics Industry: युद्ध के चलते प्लास्टिक उद्योग पर बड़ा असर पड़ा है. प्लास्टिक उत्पाद बनाने वाले व्यापारियों का कहना है कि अचानक कच्चे माल के दाम दोगुने होने से उनका कारोबार लगभग ठप हो गया है. तिरपाल बनाने वाले एक व्यापारी ने बताया कि पहले वर्जिन प्लास्टिक दाना ₹100 प्रति किलो मिलता था, जो अब ₹180 प्रति किलो हो गया है. स्क्रैप जो पहले ₹70-80 किलो था, वह अब ₹115-120 तक पहुंच गया है.
उनका आरोप है कि विदेश से क्रूड की सप्लाई बाधित होने का हवाला देकर भारतीय कंपनियों ने स्टॉक होते हुए भी दाम बढ़ा दिए. 28 तारीख को युद्ध शुरू हुआ और 1 तारीख से लगातार रेट बढ़ने लगे. अब हालत यह है कि पहले जहां ₹100 का काम होता था, वहां आज केवल ₹30 का ही काम हो पा रहा है.व्यापारियों का कहना है कि अगर कल युद्ध समाप्त हो जाए और रेट घट जाएं तो ऊंचे दाम पर खरीदा गया स्टॉक उन्हें भारी नुकसान देगा.
पैकिंग लागत 30 प्रतिशत तक बढ़ी, गैस संकट से उत्पादन ठप
एमएनसी कंपनियों को पैकिंग सामग्री सप्लाई करने वाले अरुण जैन का कहना है कि पैकिंग के दाम 25 से 30 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं. गैस की किल्लत के कारण उत्पादन क्षमता केवल 25-30 प्रतिशत पर चल रही है. गैस की कमी से लेबर को भी काम नहीं मिल पा रहा और कई मजदूर गांव लौट गए हैं. उनका कहना है कि बड़ी कंपनियों के पास स्टॉक होने के बावजूद उन्होंने दाम बढ़ा दिए हैं.
बाल्टी और टब बनाने वाले शरद शर्मा ने बताया कि उनका काम केवल 10 प्रतिशत रह गया है और उन्होंने उत्पादन आधा कर दिया है. उन्होंने कहा कि कोरोना काल में फैक्ट्रियां बंद थीं तो मजदूर अपने घर चले गए थे, लेकिन अब फैक्ट्री खुली है और काम नहीं है. मजदूरों का खर्च कैसे चलेगा? गैस न मिलने से उत्पादन रुक-रुक कर हो रहा है.
डिमांड घटी, फ्री स्कीम बंद होने से सप्लाई रुकी
इंजेक्शन मोल्डिंग का काम करने वाले अशोक जुनेजा ने बताया कि उनकी डिमांड लगभग खत्म हो चुकी है. उनकी इंडस्ट्री वॉशिंग पाउडर कंपनियों से जुड़ी है, जो स्कीम के तहत बाल्टी-टब जैसे उत्पाद फ्री देती थीं. अब वॉशिंग पाउडर की बिक्री कम हो गई है और उनके रेट भी बढ़ गए हैं, जिससे फ्री स्कीम बंद हो गई है. परिणामस्वरूप उनकी सप्लाई भी रुक गई है. उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ बड़ी कंपनियां अचानक रेट बढ़ाकर ब्लैकमेलिंग कर रही हैं.
सभी व्यापारियों ने सरकार से अपील की है कि एमएसएमई सेक्टर को कम से कम 6 महीने की ईएमआई में राहत और ब्याज में छूट दी जाए और साथ ही चल रहे सीसी लोन पर अस्थायी रोक या राहत दी जाए. लॉन्ग टर्म फेयर ट्रेड पॉलिसी बनाई जाए ताकि बड़ी कंपनियां संकट का फायदा न उठा सकें. व्यापारियों का कहना है कि मौजूदा हालात कोरोना काल से भी ज्यादा गंभीर हैं. अगर जल्द राहत नहीं मिली तो छोटे प्लास्टिक उद्योग बंद होने की कगार पर पहुंच जाएंगे.
Source: IOCL


























