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India-EU Free Trade Deal: 20 साल में जो नहीं हुआ उस FTA पर लगी मुहर, जानें कार-इलैक्ट्रॉनिक्स की कीमतों से लेकर आपके लिए क्या-क्या बदलेगा

India-EU Free Trade Agreement:आंकड़ों पर नजर डालें तो वित्त वर्ष 2024-25 में भारत और ईयू के बीच कुल व्यापार लगभग 136.53 अरब डॉलर का रहा. इसमें ईयू से भारत में आयात करीब 60.68 अरब डॉलर का था.

India-EU FTA: नई दिल्ली में हुई उच्च स्तरीय बैठक के दौरान भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच बहुप्रतीक्षित फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (एफटीए) पर आखिरकार मुहर लग गई, जिसे पिछले दो दशकों से अंतिम रूप नहीं दिया जा सका था. इस समझौते को उसकी व्यापकता और रणनीतिक महत्व के कारण “मदर ऑफ ऑल डील्स” कहा जा रहा है. दरअसल, यूरोपीय यूनियन भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है और भारत के कुल वैश्विक व्यापार का करीब 17 प्रतिशत हिस्सा अकेले ईयू के साथ होता है, जिससे इस समझौते की अहमियत और बढ़ जाती है.

ईयू के साथ सरप्लस ट्रेड  

आंकड़ों पर नजर डालें तो वित्त वर्ष 2024-25 में भारत और ईयू के बीच कुल व्यापार लगभग 136.53 अरब डॉलर का रहा. इसमें ईयू से भारत में आयात करीब 60.68 अरब डॉलर का था, जबकि भारत ने ईयू को लगभग 75.85 अरब डॉलर का निर्यात किया. इस तरह भारत को ईयू के साथ करीब 15.17 अरब डॉलर का ट्रेड सरप्लस हासिल हुआ, जो भारतीय निर्यातकों के लिए एक मजबूत स्थिति को दर्शाता है.

सिर्फ वस्तुओं तक ही नहीं, बल्कि सेवा क्षेत्र में भी भारत-ईयू संबंध काफी मजबूत रहे हैं. वर्ष 2024 में दोनों के बीच सेवा व्यापार लगभग 83.10 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जिसमें आईटी सेवाएं, बिजनेस सर्विसेज और टेलीकम्युनिकेशंस का बड़ा योगदान रहा. नए एफटीए के लागू होने से उम्मीद की जा रही है कि व्यापारिक बाधाएं कम होंगी, निवेश बढ़ेगा और भारत-ईयू के आर्थिक रिश्ते आने वाले वर्षों में और अधिक गहराई पकड़ेंगे.

आइये जानते हैं कि आखिर ईयू के साथ ऐतिहासिक एफटी समझौते पर मुहर लगने के बाद क्या-क्या बदलने जा रहा है-

इलैक्ट्रोनिक्स-कपड़े और बाजार में सीधी पहुंच

ईयू के साथ ऐतिहासिक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर मुहर लगने के बाद कई अहम बदलाव देखने को मिल सकते हैं। इस समझौते का सबसे सीधा असर इलेक्ट्रॉनिक्स, कपड़ा और अन्य मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में बाजार तक पहुंच पर पड़ेगा. खास तौर पर वस्तुओं पर लगने वाले सीमा शुल्क में कमी से भारतीय उत्पाद यूरोपीय बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी हो जाएंगे, जिससे निर्यात को बड़ा प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है.

वर्तमान में यूरोपीय यूनियन में भारतीय कपड़ों पर करीब 10 प्रतिशत सीमा शुल्क लगाया जाता है, जो भारतीय निर्यातकों के लिए एक बड़ी चुनौती रहा है. एफटीए के तहत यह शुल्क चरणबद्ध तरीके से घटने की संभावना है. इससे न सिर्फ भारतीय परिधान सस्ते होंगे, बल्कि यूरोप में उनकी मांग भी बढ़ेगी. इसका सीधा फायदा यह होगा कि भारतीय निर्यातक बांग्लादेश और वियतनाम जैसे देशों के मुकाबले बेहतर स्थिति में आ जाएंगे और यूरोपीय बाजार में अपनी हिस्सेदारी मजबूत कर सकेंगे.

कारें होंगी सस्ती

इंडिया-ईयू एफटीए में सबसे ज्यादा जिस सेक्टर पर चर्चा हो रही है, वह ऑटोमोबाइल सेक्टर है, क्योंकि अब तक भारतीय कार बाजार दुनिया के सबसे ज्यादा संरक्षित बाजारों में गिना जाता रहा है. फिलहाल यूरोप से आने वाली कारों पर 70 से 100 प्रतिशत तक आयात शुल्क लगता है, जो मॉडल और कीमत के आधार पर तय होता है. इसी वजह से यूरोपीय लग्ज़री और प्रीमियम कारें भारतीय ग्राहकों के लिए बेहद महंगी पड़ती हैं और इनकी पहुंच सीमित रह जाती है.

रिपोर्ट्स के अनुसार, एफटीए लागू होने के बाद इस स्थिति में बड़ा बदलाव आ सकता है. भारत सरकार 16 लाख रुपये से अधिक कीमत वाली महंगी कारों पर आयात शुल्क को शुरुआती चरण में घटाकर लगभग 40 प्रतिशत करने के लिए सहमत हुई है. इससे यूरोपीय कारें पहले के मुकाबले सस्ती हो सकती हैं, जिससे भारतीय उपभोक्ताओं के पास ज्यादा विकल्प होंगे. साथ ही, इससे भारतीय ऑटो सेक्टर में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और घरेलू कंपनियों पर टेक्नोलॉजी, क्वालिटी और इनोवेशन को और बेहतर करने का दबाव भी बनेगा.

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