Roopa Ganguly: महाभारत में द्रौपदी बनीं रूपा गांगुली ने पहनी थी 250 मीटर लंबी साड़ी, तब क्या थी कीमत? इस कंपनी ने बनाई थी
Mahabharat Drapadi Scene Fact: अगर आपने 1988 की महाभारत देखी है तो द्रौपदी चीरहरण का मशहूर दृश्य जरूर याद होगा, लेकिन क्या आपको उसके पीछे छिपे राज के बारे में पता है? अगर नहीं तो जानिए.

- यह 250 मीटर साड़ी उस समय ₹34,000 में तैयार करवाई गई थी।
Mahabharat Drapadi Scene Fact: साल1988 में बीआर चोपड़ा द्वारा बनाई गई महाभारत तो सभी ने देखी है. आज भी इस टीवी सीरियल चर्चा होती है. महाभारत में आपने द्रौपदी चीरहरण का दृश्य भी आपने जरूर देखा होगा. ये दृश्य इतिहास के सबसे यादगार और चर्चित दृश्यों में से एक माना जाता है. बीआर चौपड़ा की इस सीरिज ने अपने समय में इतिहास रच दिया था. द्रौपदी का किरदार मशहूर अभिनेत्री रूपा गांगुली ने निभाया था, जो अब बंगाल में बीजेपी की बड़ी नेता हैं.
कितनी लंबी साड़ी का किया था इस्तेमाल?
द्रौपदी चीरहरण के दृश्य को फिल्माने के लिए मेकर्स ने 250 मीटर लंबी एक ही कपड़े की पीली सिल्क साड़ी तैयार करवाई थी. हालांकि, द्रौपदी का किरदार निभाने वाली रूपा गांगुली ने केवल 6 मीटर की सामान्य साड़ी पहनी थी, लेकिन भगवान कृष्ण के साड़ी बढ़ाए वाले सीन को दिखाने के लिए इस लंबी साड़ी का इस्तेमाल किया गया था.
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खास ऑर्डर देकर बनवाई गई थी द्रौपदी की साड़ी
सीरियल के डायरेक्टर रवि चौपड़ा ने बताया था कि यह साड़ी उस टाइम पर ऑर्डर देकर तैयार करवाई गई थी और इस साड़ी को Binny & Co. ने बनाया था, जो उस दौर की मशहूर टेक्सटाइल कंपनी थी. बताया जाता है कि 1988 में एक अच्छी क्रेप सिल्क साड़ी की कीमत 450 से 750 रुपये के बीच होती थी. ऐसे में 250 मीटर लंबी इस खास साड़ी को तैयार करवाने में लगभग 34 हजार खर्च हुए थे, जो उस टाइम बहुत बड़ी रकम मानी जाती थी.
इस साड़ी तो बनाने वाली कंपनी को जानें
बता दें कि बीन्नी की जड़ें साल 1799 में 'बिन्नी एंड कंपनी' की स्थापना के साथ जुड़ी हैं, जिसे जॉन बिन्नी ने मद्रास (अब चेन्नई) में शुरू किया था. यह भारत के सबसे पुराने कपड़ा मिल समूहों में से एक था. इसकी मुख्य मिलें 'बकिंघम मिल' और 'कर्नाटक मिल' थीं, जिन्हें मिलाकर बाद में बकिंघम एंड कर्नाटक मिल्स के नाम से जाना गया. बीन्नी की 'क्रेप सिल्क' साड़ियां बहुत प्रसिद्ध थीं. साल 1970 और 80 के दशक में बीन्नी सिल्क की साड़ियां शादियों और विशेष अवसरों के लिए पहली पसंद मानी जाती थीं. इनके सूती और सिंथेटिक कपड़े इतने मजबूत होते थे कि लोग मजाक में कहते थे कि बीन्नी का कपड़ा कभी फटता नहीं.
























