5 साल तक अनएक्सप्लेण्ड इनफर्टिलिटी का सामना करने के बाद महिला को हुआ गर्भधारण, इन्दिरा आईवीएफ प्रयागराज से लिया सफल इलाज
इन्दिरा आईवीएफ प्रयागराज की चीफ गायनेकोलॉजिस्ट एंड आईवीएफ स्पेशलिस्ट डॉ. अंजलि गहलान ने बताया कि अनएक्सप्लेण्ड इनफर्टिलिटी की स्थिति में जब कोई स्पष्ट कारण नहीं मिलता है तब स्थिति कठिन हो जाती है.

प्रयागराज 5 मई: प्रयागराज के एक कपल को शादी के पाँच साल बाद आईवीएफ के ज़रिए गर्भधारण हुआ है जबकि सारी मेडिकल रिपोर्ट सामान्य होने के बावजूद दम्पती कंसीव नहीं कर पा रहे थे. दम्पती का सफल इलाज Indira IVF center in Prayagraj में हुआ है. यह मामला "अनएक्सप्लेंड इनफर्टिलिटी" यानी बिना स्पष्ट कारण वाली निःसंतानता का उदाहरण है, जिसमें पारंपरिक जांचों से भी समस्या का पता नहीं चलता. दम्पती ने अनएक्सप्लेंड इनफर्टिलिटी में एक ऐसी स्थिति का सामना किया जिसमें गर्भधारण में समस्या होती है. कपल का यह केस एडवांस फर्टिलिटी उपचार की बढ़ती आवश्यकता और जटिल रिप्रोडक्टिव समस्याओं के समाधान में इसकी भूमिका का महत्व समझाती है.
32 वर्षीय कविता (बदला हुआ नाम) और उनके 34 वर्षीय पति ने कई क्लीनिकों में अपनी फर्टिलिटी से संबंधी जांचे करवाई थी. सभी जांचों में दोनों की रिप्रोडक्टिव हेल्थ रिपोर्ट नोर्मल आयी. महिला की ओवरीज़, यूट्रस और फैलोपियन ट्यूब्स सामान्य थीं, और पुरुष के वीर्य की रिपोर्ट (सीमेन पेरामीटर्स) भी सामान्य थी. इसके बावजूद गर्भधारण न होने से वे मानसिक रूप से बेहद परेशान और भविष्य को लेकर असमंजस की स्थिति में थे. यह केस बताता है कि निःसंतानता की स्थिति में केवल सामान्य जांचों पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है, बल्कि गहराई में जाकर कारणों की पहचान करना अधिक जरूरी है.
दम्पती जब इन्दिरा आईवीएफ आए तो क्लीनिकल टीम ने उनकी मेडिकल हिस्ट्री को डिटेल में रिव्यू किया, जिसमें उन पहलुओं पर ध्यान केंद्रित किया गया जो आमतौर पर ट्रेडिशनल जांचों में छूट जाते हैं. स्टेण्डर्ड जांचो में कोई पहचान योग्य असामान्यता न होने के कारण इसे अनएक्सप्लेण्ड इनफर्टिलिटी के रूप में डायग्नोज किया गया.
इन्दिरा आईवीएफ प्रयागराज (इलाहाबाद) की चीफ गायनेकोलॉजिस्ट एंड आईवीएफ स्पेशलिस्ट डॉ. अंजलि गहलान ने बताया, कि अनएक्सप्लेण्ड इनफर्टिलिटी की स्थिति में जब कोई स्पष्ट कारण नहीं मिलता है तब स्थिति और भी कठिन हो जाती है क्योंकि मरीज किसी तरह की उपचार योजना नहीं बना पाता है. ऐसे में आईवीएफ एक कारगर उपाय बनता है, जिससे हम हर बायोलॉजिकल स्टेप को बारीकी से देख और निरीक्षण कर सकते हैं. स्टीमुलेशन से लेकर एम्ब्रियो डवलपमेंट को ध्यान से देखा जा सकता है और जहां जरूरत हो वहां सटीकता से हस्तक्षेप कर सकते हैं. इससे सफलता की संभावना बढ़ती है और उन मरीजों में आत्म विश्वास तथा माता-पिता बनने की आशा जगती है जो इसे खो चुके हैं.
उपचार योजना तय होने के बाद, दम्पती ने इन्दिरा आईवीएफ में अपनी IVF treatment यात्रा शुरू की, तथा प्रक्रिया के प्रत्येक चरण में सफलता की संभावनाओं को अधिकतम करने के लिए बनाए गए प्रोटोकॉल का पालन कियाः
इलाज की प्रक्रिया इस प्रकार रहीः
-मोनिटर्ड हार्मोनल थैरेपी के जरिए अंडाशय को स्टीमुलेट करके सामान्य से अधिक अंडे विकसित किए गए.
-फॉलिकल्स मैच्योर (अण्डे परिपक्व) होने के बाद एक छोटी इनवेसिव प्रक्रिया करके अंडे निकाले गए.
-इन्दिरा आईवीएफ की लैब में संतुलित वातावरण में फर्टिलाइजेशन करवाया गया, (महिला के अण्डाशय से निकाले गये अण्डों का पति के शुक्राणु से मिलन करवाया गया.)
-फिर कुछ दिनों तक एम्ब्रियों के विकास पर बारिकी से नजर रखी गयी.
-डवलपमेंटल मार्कर्स और इम्पलांटेशन क्षमता के आधार पर बेस्ट क्वालिटी एम्ब्रियों का चयन करने पर ध्यान केंद्रित किया गया.
यूटेराइन साइकिल के सबसे उचित समय पर महिला के गर्भाशय में एम्ब्रियो ट्रांसफर किया गया, ताकि गर्भधारण की संभावना को बढ़ाया जा सके.
भ्रूण ट्रांसफर के बाद कविता ने आईवीएफ की पहली साइकिल में ही गर्भधारण कर लिया, जिससे उनकी लंबी और भावनात्मक रूप से मुश्किल यात्रा का सुखद समापन हुआ.
यह केस इस बात को रेखांकित करता है कि किस तरह तकनीकी विशेषज्ञता, फर्टिलिटी केयर और वैज्ञानिक दृष्टिकोण की मदद से बिना स्पष्ट कारण वाले निःसंतानता के मामलों में भी सफलता संभव है. इन्दिरा आईवीएफ में हर केस को व्यक्तिगत रूप से समझकर, एडवांस टेक्नालॉजी और क्लिनिकल एक्सपर्टीज़ के साथ इलाज किया जाता है.
(Disclaimer: एबीपी नेटवर्क प्राइवेट लिमिटेड और/या एबीपी लाइव किसी भी तरह से इस लेख की सामग्री और/या इसमें व्यक्त विचारों का समर्थन नहीं करता है. पाठक को विवेक की सलाह दी जाती है.)

















