एक्सप्लोरर

विधानसभा चुनाव 2026

(Source:  Poll of Polls)

जब रामविलास पासवान की चुनावी जीत सुनने के लिए दलित मजदूरों का हुजूम तीन दिनों तक टेलीविजन से नहीं हटा

बात 90 के दशक की शुरुआत की है. देश की राजनीति मंडल बनाम कमंडल में घिरी थी, तब कई आवाज़ें ऐसी थीं जो गांव देहात के मुस्लिम मुहल्लों में खूब गूंजा करती थीं, उनमें एक आवाज़ रामविलास पासवान की थी. तब ग्रामीण इलाकों में खबरें रेडियो से हासिल की जाती थीं और चहेते और विरोधी राजनेताओं के भाषण टेप रिकॉर्डर से कई-कई बार सुने जाते थे. उस दौर में रामविलास पासवान न सिर्फ दलित बल्कि मुस्लिम समाज में भी एक उम्मीद के तौर पर देखे जाते थे. तब वो दौर था जब रामविलास पासवान कांग्रेस और आरएसएस दोनों से एक साथ लोहा ले रहे थे. उस वक्त वो न सिर्फ दबे कुचले समाज की आवाज़ थे बल्कि सांप्रदायिक राजनीति पर चोट करने वाले योद्धा भी थे.

उस दौर में रामविलास पासवान की शोहरत उनके बेबाक भाषणों की वजह से थी. यही वजह है कि उनके अनेक भाषण आज भी कानों में गूंज रहे हैं. कई पुराने किस्से, कई आंखों देखी हकीकतें अपनी कहानी दोहराने को आतुर नजर आती हैं. उस दौर में हिंदुत्ववादी राजनीति के शिखरपुरुष लालकृष्ण आवाडणी हुआ करते थे, रामविलास पासवान तब हिंदू-मुस्लिम एकता के तराने गुनगुना रहे थे. राष्ट्रवादी राजनीति के हज़ार साल की गुलामी की नैरेटिव का भरपूर विरोध करते थे. वो अपने भाषणों में अपने निराले अंदाज़ में कहते थे, "गुलाम वंश के बाद खिलजी वंश, उसके बाद तुग़लक़ वंश, फिर सैयद वंश और लोधी वंश. और आखिर में मुगलों का शासन... सब यहीं की मिट्टी में दफ्न हुए. ये इतिहास का सच है, इन शासकों की वजह से हम अपने मुस्लिम भाइयों से दुश्मनी कैसे कर सकते हैं?"

गरीबी और धिक्कारे जाने का दर्द उनसे बेहतर कौन समझ सकता है. ये धिक्कारना किसी समाज से हो सकता है. किसी प्राकृतिक ताकत से हो सकता है. तभी तो अपने राजनीतिक भाषणों में वो अक्सर कहा करते थे;

न जाने बादलों के दरम्यान क्या साजिश हुई

 मेरा घर मिट्टी का था मेरे ही घर बारिश हुई

राजनीति का पहिया तेजी से दौड़ रहा था. बिहार की राजनीति में सीएम बनने के बाद लालू प्रसाद यादव का कद बढ़ता ही जा रहा था और रामविलास पासवान को चुनौतियां भी मिल रही थीं. बीजेपी के विरोध की राजनीति का चेहरा अब लालू बन चुके थे. मुसलमानों को अपना नया ‘मसीहा’ मिल चुका था. जग्गन्नाथ मिश्र से रुठने के बाद मुसलमनों के बीच रामविलास पासवान के लिए 90 के शुरुआती दशक में जो प्यार परवान चढ़ने शुरू हुए थे, लालू ने उसे वक्त से पहले ही खत्म कर दिया. अब बिहार की राजनीति में रामविलास पासवान के लिए अपनी बिरादरी से बाहर वो शोरहत और समर्थन नहीं थे, तब वो जिसके हकदार थे. हालांकि, जब 1996 में वो रेलवे मंत्री बने तो बिहार में उनकी शोहरत काफी बढ़ी. वो दूसरे समाज में भी इज्जत की निगाहों से देखे गए.

1977 के लोकसभा चुनाव में रिकॉर्ड वोट से जीत दर्द करने वाले रामविलास पासवान को चुनावों में हार का भी सामना करना पड़ा है. वैसे भी राजनीति में दिग्गज नेताओं की जीत हार जानने की उत्सुकता ज्यादा ही होती है. बात 1999 के लोकसभा चुनाव के दौरान वोटों की गिनती की है. मैं पटना में इंजीनियरिंग कॉलेज वाले इलाके गोलकपुर मुहल्ले में रहा करता था. चुनाव के नतीजे आ रहे थे. सड़क पर एक दूकान में टेलीविजन था, जिसपर दिनभर चुनावी कवरेज चल रहा था. तब तक ईवीएम का दौर नहीं था. तीन-तीन दिनों में नतीजे आते थे.

गोलकपुर मुहल्ला गंगा के किनारे है और उस वक्त उस मुहल्ले के दूसरे हिस्से में दलित देहाड़ी मजूदरों की बड़ी आबादी का बसेरा था. मैंने वोटों की गिनती के दौरान देखा कि सैकड़ों दलित मजदूर दुकान के सामने खाली पड़ी जगह पर डेरा जमा रहे, वो सिर्फ रामविलास पासवान के चुनावी नतीजे जानने के लिए बेचैन थे. जब तक नतीजे नहीं आए, हुजूम जीत की खबर से झूम नहीं गया. दलित मजदूरों ने चैन की सांस नहीं ली. राजनीति में अपने नेता के लिए ऐसा प्यार, तब मैंने अपनी ज़िंदगी में पहली बार देखा था. लेकिन वो प्यार किसी से नफरत में नहीं पैदा हुआ था, बल्कि एक उम्मीद की किरण जैसा था.

वक्त के बीतने के साथ ही रामविलास पासवान राजनीति के ऐसे माहिर खिलाड़ी बने कि उनके विरोधी उन्हें राजनीति के ‘मौसम वैज्ञानिक’ तक खिताब दे बैठे. उनके सियासी फैसलों के बाद राजनीतिक गलियारों में ये चर्चा रहती थी कि उन्होंने हवा का रुख भांपने के बाद ही निर्णय लिया होगा, राजनीतिक पंडित भी उनके फैसलों के आधार पर अपने विश्लेषण की नोक पलक संवारते थे.

इस तरह वो अपने राजनीति के आखिरी दौर में एक ऐसे राजनेता बन गए जिसे सत्ता और गद्दी से सबसे ज्यादा प्यार हो. दलित समाज को छोड़कर अपना परिवार ही सर्वोपरी हो गया. पार्टी परिवार तक सिमट गया. जिनकी आंखें उन्हें उम्मीद की किरण के तौर पर देखता थी, उनके लिए वो एक अजनबी बन गए. 90 के शुरुआती दशक में जिस राजनीति से लोहा लेते थे अंत में उसके साझेदार बन गए. और जब उन्होंने आखिरी सांस ली तो उनके साथियों में वही लोग थे, जिनसे कभी उनका जोरदार राजनीतिक बैर था.

(नोट- उपरोक्त दिए गए विचार व आंकड़े लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं. ये जरूरी नहीं कि एबीपी न्यूज ग्रुप इससे सहमत हो. इस लेख से जुड़े सभी दावे या आपत्ति के लिए सिर्फ लेखक ही जिम्मेदार है)

View More

ओपिनियन

Sponsored Links by Taboola
25°C
New Delhi
Rain: 100mm
Humidity: 97%
Wind: WNW 47km/h

टॉप हेडलाइंस

ईरान के विदेश मंत्री अराघची ने जयशंकर को किया फोन , जानें किन मुद्दों पर हुई बात
ईरान के विदेश मंत्री अराघची ने जयशंकर को किया फोन , जानें किन मुद्दों पर हुई बात
मध्य प्रदेश धार में भीषण सड़क हादसा, 2 बच्चों समेत 12 लोगों की मौत, 13 की हालत नाजुक
मध्य प्रदेश धार में भीषण सड़क हादसा, 2 बच्चों समेत 12 लोगों की मौत, 13 की हालत नाजुक
MI vs SRH Highlights: सनराइजर्स हैदराबाद ने किया IPL का चौथा सबसे बड़ा रन चेज, 243 रन बनाकर भी हारी मुंबई
सनराइजर्स हैदराबाद ने किया IPL का चौथा सबसे बड़ा रन चेज, 243 रन बनाकर भी हारी मुंबई
कंटेंट क्रिएटर संग वायरल वीडियो पर राहुल रॉय ने किया रिएक्ट, बोले- मजबूरी हो गई थी
कंटेंट क्रिएटर संग वायरल वीडियो पर राहुल रॉय ने किया रिएक्ट, बोले- मजबूरी हो गई थी

वीडियोज

Sansani: हिजबुल्लाह के सीक्रेट ठिकानों की अनदेखी पिक्चर ! | Crime News | America
Sandeep Chaudhary On Exit Poll: कहां किसकी जीत..किसका सूपड़ा साफ | BJP | TMC | Poll of Polls on ABP
West Bengal Exit Poll 2026: क्या हार रही हैं दीदी ? | PM Vs Mamata | Chanakya Exit Poll
West Bengal Exit Poll 2026: ममता बनर्जी की सत्ता पर संकट? जानिए पूरा गणित  | BJP Vs TMC | Mamata
West Bengal 2026 Phase 2 Voting: बंगाल में एक्शन मोड पर प्रशासन... | BJP | TMC | ABP News

पर्सनल कार्नर

टॉप आर्टिकल्स
टॉप रील्स
ईरान के विदेश मंत्री अराघची ने जयशंकर को किया फोन , जानें किन मुद्दों पर हुई बात
ईरान के विदेश मंत्री अराघची ने जयशंकर को किया फोन , जानें किन मुद्दों पर हुई बात
मध्य प्रदेश धार में भीषण सड़क हादसा, 2 बच्चों समेत 12 लोगों की मौत, 13 की हालत नाजुक
मध्य प्रदेश धार में भीषण सड़क हादसा, 2 बच्चों समेत 12 लोगों की मौत, 13 की हालत नाजुक
MI vs SRH Highlights: सनराइजर्स हैदराबाद ने किया IPL का चौथा सबसे बड़ा रन चेज, 243 रन बनाकर भी हारी मुंबई
सनराइजर्स हैदराबाद ने किया IPL का चौथा सबसे बड़ा रन चेज, 243 रन बनाकर भी हारी मुंबई
कंटेंट क्रिएटर संग वायरल वीडियो पर राहुल रॉय ने किया रिएक्ट, बोले- मजबूरी हो गई थी
कंटेंट क्रिएटर संग वायरल वीडियो पर राहुल रॉय ने किया रिएक्ट, बोले- मजबूरी हो गई थी
'4 मई के बाद रात को 2 बजे भी महिलाएं...', बंगाल चुनाव पर अनिल विज का बड़ा दावा
'4 मई के बाद रात को 2 बजे भी महिलाएं...', बंगाल चुनाव पर अनिल विज का बड़ा दावा
London News: लंदन के गोल्डर्स ग्रीन इलाके में चाकू बाजी, दो याहूदियों को बनाया  निशाना, हमलावर अरेस्ट
लंदन के गोल्डर्स ग्रीन इलाके में चाकू बाजी, दो याहूदियों को बनाया निशाना, हमलावर अरेस्ट
West Bengal Election 2026: किसके पास होती है स्ट्रॉग रूम की चाबी, बंगाल चुनाव खत्म होने के बाद जहां रखी जाएंगी ईवीएम
किसके पास होती है स्ट्रॉग रूम की चाबी, बंगाल चुनाव खत्म होने के बाद जहां रखी जाएंगी ईवीएम
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने डोनाल्ड ट्रंप को लगाया फोन, जानें किस मुद्दे पर हुई डेढ़ घंटे बातचीत, जेलेंस्की को लेकर क्या कहा?
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने डोनाल्ड ट्रंप को लगाया फोन, जानें किस मुद्दे पर हुई डेढ़ घंटे बातचीत, जेलेंस्की को लेकर क्या कहा?
Embed widget