एक्सप्लोरर

जब रामविलास पासवान की चुनावी जीत सुनने के लिए दलित मजदूरों का हुजूम तीन दिनों तक टेलीविजन से नहीं हटा

बात 90 के दशक की शुरुआत की है. देश की राजनीति मंडल बनाम कमंडल में घिरी थी, तब कई आवाज़ें ऐसी थीं जो गांव देहात के मुस्लिम मुहल्लों में खूब गूंजा करती थीं, उनमें एक आवाज़ रामविलास पासवान की थी. तब ग्रामीण इलाकों में खबरें रेडियो से हासिल की जाती थीं और चहेते और विरोधी राजनेताओं के भाषण टेप रिकॉर्डर से कई-कई बार सुने जाते थे. उस दौर में रामविलास पासवान न सिर्फ दलित बल्कि मुस्लिम समाज में भी एक उम्मीद के तौर पर देखे जाते थे. तब वो दौर था जब रामविलास पासवान कांग्रेस और आरएसएस दोनों से एक साथ लोहा ले रहे थे. उस वक्त वो न सिर्फ दबे कुचले समाज की आवाज़ थे बल्कि सांप्रदायिक राजनीति पर चोट करने वाले योद्धा भी थे.

उस दौर में रामविलास पासवान की शोहरत उनके बेबाक भाषणों की वजह से थी. यही वजह है कि उनके अनेक भाषण आज भी कानों में गूंज रहे हैं. कई पुराने किस्से, कई आंखों देखी हकीकतें अपनी कहानी दोहराने को आतुर नजर आती हैं. उस दौर में हिंदुत्ववादी राजनीति के शिखरपुरुष लालकृष्ण आवाडणी हुआ करते थे, रामविलास पासवान तब हिंदू-मुस्लिम एकता के तराने गुनगुना रहे थे. राष्ट्रवादी राजनीति के हज़ार साल की गुलामी की नैरेटिव का भरपूर विरोध करते थे. वो अपने भाषणों में अपने निराले अंदाज़ में कहते थे, "गुलाम वंश के बाद खिलजी वंश, उसके बाद तुग़लक़ वंश, फिर सैयद वंश और लोधी वंश. और आखिर में मुगलों का शासन... सब यहीं की मिट्टी में दफ्न हुए. ये इतिहास का सच है, इन शासकों की वजह से हम अपने मुस्लिम भाइयों से दुश्मनी कैसे कर सकते हैं?"

गरीबी और धिक्कारे जाने का दर्द उनसे बेहतर कौन समझ सकता है. ये धिक्कारना किसी समाज से हो सकता है. किसी प्राकृतिक ताकत से हो सकता है. तभी तो अपने राजनीतिक भाषणों में वो अक्सर कहा करते थे;

न जाने बादलों के दरम्यान क्या साजिश हुई

 मेरा घर मिट्टी का था मेरे ही घर बारिश हुई

राजनीति का पहिया तेजी से दौड़ रहा था. बिहार की राजनीति में सीएम बनने के बाद लालू प्रसाद यादव का कद बढ़ता ही जा रहा था और रामविलास पासवान को चुनौतियां भी मिल रही थीं. बीजेपी के विरोध की राजनीति का चेहरा अब लालू बन चुके थे. मुसलमानों को अपना नया ‘मसीहा’ मिल चुका था. जग्गन्नाथ मिश्र से रुठने के बाद मुसलमनों के बीच रामविलास पासवान के लिए 90 के शुरुआती दशक में जो प्यार परवान चढ़ने शुरू हुए थे, लालू ने उसे वक्त से पहले ही खत्म कर दिया. अब बिहार की राजनीति में रामविलास पासवान के लिए अपनी बिरादरी से बाहर वो शोरहत और समर्थन नहीं थे, तब वो जिसके हकदार थे. हालांकि, जब 1996 में वो रेलवे मंत्री बने तो बिहार में उनकी शोहरत काफी बढ़ी. वो दूसरे समाज में भी इज्जत की निगाहों से देखे गए.

1977 के लोकसभा चुनाव में रिकॉर्ड वोट से जीत दर्द करने वाले रामविलास पासवान को चुनावों में हार का भी सामना करना पड़ा है. वैसे भी राजनीति में दिग्गज नेताओं की जीत हार जानने की उत्सुकता ज्यादा ही होती है. बात 1999 के लोकसभा चुनाव के दौरान वोटों की गिनती की है. मैं पटना में इंजीनियरिंग कॉलेज वाले इलाके गोलकपुर मुहल्ले में रहा करता था. चुनाव के नतीजे आ रहे थे. सड़क पर एक दूकान में टेलीविजन था, जिसपर दिनभर चुनावी कवरेज चल रहा था. तब तक ईवीएम का दौर नहीं था. तीन-तीन दिनों में नतीजे आते थे.

गोलकपुर मुहल्ला गंगा के किनारे है और उस वक्त उस मुहल्ले के दूसरे हिस्से में दलित देहाड़ी मजूदरों की बड़ी आबादी का बसेरा था. मैंने वोटों की गिनती के दौरान देखा कि सैकड़ों दलित मजदूर दुकान के सामने खाली पड़ी जगह पर डेरा जमा रहे, वो सिर्फ रामविलास पासवान के चुनावी नतीजे जानने के लिए बेचैन थे. जब तक नतीजे नहीं आए, हुजूम जीत की खबर से झूम नहीं गया. दलित मजदूरों ने चैन की सांस नहीं ली. राजनीति में अपने नेता के लिए ऐसा प्यार, तब मैंने अपनी ज़िंदगी में पहली बार देखा था. लेकिन वो प्यार किसी से नफरत में नहीं पैदा हुआ था, बल्कि एक उम्मीद की किरण जैसा था.

वक्त के बीतने के साथ ही रामविलास पासवान राजनीति के ऐसे माहिर खिलाड़ी बने कि उनके विरोधी उन्हें राजनीति के ‘मौसम वैज्ञानिक’ तक खिताब दे बैठे. उनके सियासी फैसलों के बाद राजनीतिक गलियारों में ये चर्चा रहती थी कि उन्होंने हवा का रुख भांपने के बाद ही निर्णय लिया होगा, राजनीतिक पंडित भी उनके फैसलों के आधार पर अपने विश्लेषण की नोक पलक संवारते थे.

इस तरह वो अपने राजनीति के आखिरी दौर में एक ऐसे राजनेता बन गए जिसे सत्ता और गद्दी से सबसे ज्यादा प्यार हो. दलित समाज को छोड़कर अपना परिवार ही सर्वोपरी हो गया. पार्टी परिवार तक सिमट गया. जिनकी आंखें उन्हें उम्मीद की किरण के तौर पर देखता थी, उनके लिए वो एक अजनबी बन गए. 90 के शुरुआती दशक में जिस राजनीति से लोहा लेते थे अंत में उसके साझेदार बन गए. और जब उन्होंने आखिरी सांस ली तो उनके साथियों में वही लोग थे, जिनसे कभी उनका जोरदार राजनीतिक बैर था.

(नोट- उपरोक्त दिए गए विचार व आंकड़े लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं. ये जरूरी नहीं कि एबीपी न्यूज ग्रुप इससे सहमत हो. इस लेख से जुड़े सभी दावे या आपत्ति के लिए सिर्फ लेखक ही जिम्मेदार है)

View More

ओपिनियन

Sponsored Links by Taboola
25°C
New Delhi
Rain: 100mm
Humidity: 97%
Wind: WNW 47km/h

टॉप हेडलाइंस

अमेरिका-इजरायल के हमले में खामेनेई समेत ईरान की टॉप लीडरशिप खत्म, ट्रंप का दावा, अब कौन संभालेगा कमान?
US-इजरायल के हमले में खामेनेई समेत ईरान की टॉप लीडरशिप खत्म, ट्रंप का दावा, कौन संभालेगा कमान?
UP Politics: 'सोच रहे ढूंढें अब नया ठिकाना...' मनोज तिवारी के जवाब में अब अखिलेश यादव ने जारी किया Holi पर गाना
'सोच रहे ढूंढें अब नया ठिकाना...' मनोज तिवारी के जवाब में अब अखिलेश यादव ने जारी किया Holi पर गाना
कब और कहां खेले जाएंगे सेमीफाइनल के मुकाबले? किससे होगा भारत का मैच? जानें टी20 वर्ल्ड कप की सारी डिटेल्स
कब और कहां खेले जाएंगे सेमीफाइनल के मुकाबले? किससे होगा भारत का मैच? जानें डिटेल्स
Iron Beam: न रॉकेट, न ड्रोन... सिर्फ एक लेजर से दुश्मन खत्म! कैसा है इजरायल का आयरन बीम वाला हथियार, पहली बार हुआ इस्तेमाल
न रॉकेट, न ड्रोन... सिर्फ एक लेजर से दुश्मन खत्म! कैसा है इजरायल का आयरन बीम वाला हथियार, पहली बार हुआ इस्तेमाल
ABP Premium

वीडियोज

Vasudha: 😧Hanumant का License जब्त गाड़ी और नौकरी दोनों गए हाथ से, अब क्या करेगी Vasudha?
Israel Iran War: खामेनेई की मौत से जल उठा Pakistan ! | Khamenei | Trump । Iraq Protest | Breaking
Israel Iran War: Beirut में हिज्बुल्लाह के ठिकानों पर इजरायली सेना का बड़ा हमला| Netanyahu | Trump
Israel Iran War: Khamenei को इजरायली फोर्स IDF ने बताया आतंकी | Netanyahu | Trump
Israel Iran War: B2 बॉम्बर की एंट्री..तबाह हो जाएगा ईरान! | Khamenei | Trump | Netanyahu | Breaking

पर्सनल कार्नर

टॉप आर्टिकल्स
टॉप रील्स
अमेरिका-इजरायल के हमले में खामेनेई समेत ईरान की टॉप लीडरशिप खत्म, ट्रंप का दावा, अब कौन संभालेगा कमान?
US-इजरायल के हमले में खामेनेई समेत ईरान की टॉप लीडरशिप खत्म, ट्रंप का दावा, कौन संभालेगा कमान?
UP Politics: 'सोच रहे ढूंढें अब नया ठिकाना...' मनोज तिवारी के जवाब में अब अखिलेश यादव ने जारी किया Holi पर गाना
'सोच रहे ढूंढें अब नया ठिकाना...' मनोज तिवारी के जवाब में अब अखिलेश यादव ने जारी किया Holi पर गाना
कब और कहां खेले जाएंगे सेमीफाइनल के मुकाबले? किससे होगा भारत का मैच? जानें टी20 वर्ल्ड कप की सारी डिटेल्स
कब और कहां खेले जाएंगे सेमीफाइनल के मुकाबले? किससे होगा भारत का मैच? जानें डिटेल्स
Iron Beam: न रॉकेट, न ड्रोन... सिर्फ एक लेजर से दुश्मन खत्म! कैसा है इजरायल का आयरन बीम वाला हथियार, पहली बार हुआ इस्तेमाल
न रॉकेट, न ड्रोन... सिर्फ एक लेजर से दुश्मन खत्म! कैसा है इजरायल का आयरन बीम वाला हथियार, पहली बार हुआ इस्तेमाल
दुबई में बसीं कसौटी जिंदगी की फेम एरिका फर्नांडिस ने बताए हालात, बोलीं- ये डरावना है, मेरा दिल रो रहा
दुबई में बसीं कसौटी जिंदगी की फेम एरिका फर्नांडिस ने बताए हालात, बोलीं- ये डरावना है, मेरा दिल रो रहा
Israel Attack On Iran: अमेरिका संग जंग में कौन सी मिसाइलें दाग रहा ईरान, कहां तक पहुंच, ये रही पूरी लिस्ट
अमेरिका संग जंग में कौन सी मिसाइलें दाग रहा ईरान, कहां तक पहुंच, ये रही पूरी लिस्ट
पाकिस्तान में भी जय श्री राम, व्लॉगर से बात करते हुए पाकिस्तानियों ने दिखाया राम प्रेम, वीडियो हो रहा वायरल
पाकिस्तान में भी जय श्री राम, व्लॉगर से बात करते हुए पाकिस्तानियों ने दिखाया राम प्रेम, वीडियो हो रहा वायरल
क्या दुकान की छत पर भी लग सकता है सोलर पैनल, जानें प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के नियम?
क्या दुकान की छत पर भी लग सकता है सोलर पैनल, जानें प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के नियम?
Embed widget