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पाकिस्तान: हारी हुई बाज़ी को आखिर कैसे जीत पाएंगे इमरान खान?

पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान में मचा सियासी बवाल अब अपने आखिरी अंज़ाम तक आ पहुंचा है और इमरान खान सरकार के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर कल बहस शुरू होने से पहले ही सेना ने भी अपना रंग दिखा दिया है. सहयोगी पार्टियों के सरकार से समर्थन वापस लेने के बाद इमरान खान बुधवार की शाम राष्ट्र के नाम संबोधन करने वाले थे, जिसे लेकर पाकिस्तान के मीडिया में दो तरह की अटकलें तेज थीं.

पहली ये कि इमरान पीएम पद से इस्तीफा दे सकते हैं और दूसरी यह कि पद पर बने रहने के लिए वह देश में इमरजेंसी लगाने जैसे कड़े फैसले का ऐलान भी कर सकते हैं. लेकिन उससे पहले ही सेना प्रमुख क़मर जावेद बाज़वा और आईएसआई प्रमुख नदीम अंजुम ने इमरान खान से मुलाकात कर ली. बताया गया है कि सेना के इन दोनों आला अफसरों की इस मुलाकात का मकसद इमरान के राष्ट्र के नाम संबोधन को रोकना ही था. 

इसलिये पाक मीडिया में कयास यही लगाए जा रहे हैं कि इमरान की नीयत इस्तीफा देने की नहीं, बल्कि कुछ और बड़ा करने की ही थी, जिसे सेना ने रोक दिया. इमरान खान ने रविवार को अपनी इस्लामाबाद में हुई रैली में दावा किया था कि उनकी सरकार को गिराने की विदेशी साजिश है और वहीं से इसके लिए फंडिंग भी हो रही है. अपने इस दावे के समर्थन में उन्होंने एक चिट्ठी का हवाला भी दिया था.

बुधवार की देर शाम इमरान ने वही पत्र पाकिस्तान के वरिष्ठ पत्रकारों को दिखाकर एक नया सियासी दांव खेलने की कोशिश की है. अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में इमरान ने जो चिट्ठी जारी की है,उसका लुब्बे-लुबाब यही है कि अगर इमरान खान के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पास नहीं हुआ, तो इससे पाकिस्तान की मुश्किलें और बढ़ेगी. उसमें एक जगह यह भी लिखा है, " पाकिस्तान में जो कुछ हो रहा है, उससे हम खुश नहीं हैं. लेकिन सब कुछ ठीक हो जाएगा, जब अविश्वास प्रस्ताव पास हो जाएगा''. 

लेकिन इमरान ने पत्रकारों के कई सवाल करने के बावजूद ये नहीं बताया कि इस चिट्ठी को लिखने वाला कौन है और उन्हें ये कहां से मिली. उन्होंने सिर्फ इतना ही कहा कि विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी कल इस चिट्ठी को संसद में पेश करेंगे.

हालांकि इस्लामाबाद रैली के बाद इमरान की पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) ने ही ये दावा किया था कि प्रधानमंत्री ने अंतरराष्ट्रीय साजिश का यह आरोप अमेरिका से भेजे गए एक ‘कूटनीतिक संदेश’ (डिप्लोमैटिक केबल) के आधार पर लगाया है. बताया गया है कि अमेरिका स्थित पाकिस्तान राजदूत ने ही सरकार को ये संदेश भेजा था.

पाक राजनीति के जानकार मानते हैं कि सरकार के तीनों सहयोगी दलों की समर्थन वापसी के बाद इमरान संसद में अपना बहुमत खो चुके हैं. लिहाज़ा अब अगर वे अविश्वास प्रस्ताव पर वोटिंग का सामना करते हैं, तो ये उनकी सबसे बड़ी सियासी बेइज्जती होगी. उनके लिये बेहतर तो ये है कि वे गुरुवार को नेशनल असेंबली का सत्र शुरु होते ही अपने भाषण में विपक्ष के खिलाफ अपनी सियासी भड़ास निकालें और इस्तीफा देकर राजनीतिक शहीद बन जाएं.

लेकिन इमरान के तेवरों से ऐसा जरा भी नहीं लग रहा कि वे अपनी हार मानने के लिए तैयार हैं. उनके खास सिपहसालार और आंतरिक मामलों के मंत्री शेख रशीद ने दावा किया है कि इस्तीफे का सवाल ही पैदा नहीं होता है और इमरान खान आखिरी गेंद तक लड़ेंगे.

सूचना-प्रसारण मंत्री फवाद चौधरी ने भी यही दोहराया कि इमरान खान आखिरी बॉल तक खेलने वाले खिलाड़ी हैं, इस्तीफा नहीं होगा. मैदान लगेगा , दोस्त भी देखेंगे और दुश्मन भी. लेकिन इमरान सरकार को आज सबसे बड़ा झटका उस समय लगा, जब कानून मंत्री फारूक नसीम और आईटी मंत्री अमीनुल हक ने इस्तीफा देने का एलान करके संयुक्त विपक्ष के साथ हाथ मिला लिया. 

दोनों ही नेता इमरान सरकार की प्रमुख सहयोगी पार्टी मुत्ताहिदा कौमी मूवमेंट-MQM के बड़े नेता हैं. इस सियासी उलटफेर के बाद ही पाकिस्तान मीडिया ने यह दावा किया है. एमक्यूएम-पी के सरकार से बाहर जाने के बाद इमरान खान ने बहुमत खो दिया है. 

दरअसल,पाकिस्तान की नेशनल असेंबली में नंबरों का गणित अब पूरी तरह से विपक्ष के पक्ष में आ गया है. एमक्यूएम के सरकार से अलग होने के फैसले के बाद संयुक्त विपक्ष के पास अब नेशनल असेंबली के 177 सदस्य हो गए हैं. जबकि इमरान सरकार के पास 164 सदस्य ही बचे हैं. बता दें कि इमरान सरकार को गिराने और संयुक्त विपक्ष को सत्ता में काबिज होने के लिए 172 सदस्यों के जादुई आंकड़े की जरूरत है,जबकि विपक्ष ने इससे पांच सदस्य ज्यादा जुटा लिए हैं.

हालांकि पाक के वरिष्ठ पत्रकार हामिद मीर के मुताबिक इमरान सरकार की विदाई होना तय है. अविश्वास प्रस्ताव पर वोटिंग होने की सूरत में संयुक्त विपक्ष को 190 सदस्यों तक का समर्थन मिलने की उम्मीद है. इसलिये समझ से परे है कि इमरान खान हारी हुई बाजी के लिए ये सारा तमाशा आखिर क्यों कर रहे हैं?

(नोट- उपरोक्त दिए गए विचार लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं. ये जरूरी नहीं कि एबीपी न्यूज ग्रुप इससे सहमत हो. इस लेख से जुड़े सभी दावे या आपत्ति के लिए सिर्फ लेखक ही जिम्मेदार है.)

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