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मोदी 3.0 का यह पहला बजट पूरे भारत की अर्थव्यवस्था के लिए बूस्टर, सलेक्टिव ऑडिएंस के लिए नहीं

नरेंद्र मोदी 3.0 का पहला पूर्ण बजट आज शनिवार 1 फरवरी को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पेश कर दिया. यह बजट कुछ वैसा ही है, जैसे अर्थव्यवस्था को बीमार होते देख उसे एक बूस्टर डोज दिया गया है. मिडल क्लास को लुभाने की पुरजोर कोशिश की गयी है. इनकमटैक्स का स्लैब बढ़ाकर 12 लाख तक कर दिया गया है. इससे यह बेहद लोकलुभावन बजट जैसा दिख रहा है, भले ही यह लोकसभा चुनाव के एक साल बाद आया पहला बजट ही क्यों न हो?

2047 की हो रही है तैयारी 

जहां तक इकोनॉमी की बात है, तो अभी-अभी आइएमएफ ने तो हाल ही में एक अध्ययन किया था, जिसके मुताबिक अगले साल हमारी अर्थव्यवस्था का जो विकास है, वह सबसे तेज है. हमारे स्तर पर, यानी अगर इतनी बड़ी अर्थव्यवस्था की बात करें तो अमेरिका और चीन भी नहीं हैं, यानी कोई नहीं है. प्रधानमंत्री का जो विजन 2047 को लेकर है, दरअसल ये सारी घोषणाएं उसी का हिस्सा हैं. सबका प्रयास हो, सबके अंदर आत्मविश्वास भरे, उसके लिए ये सारी घोषणाएं हैं. सोशल मीडिया के दौर में छवियों का भी सवाल है. जैसे, अभी ही सबके दिमाग में भर गया था कि डबल टैक्सेशन हो रहा है, ट्रिपल टैक्सेशन हो रहा है, उसके लिए इतना बोला गया और उसको इस कदर हाइलाइट किया गया था कि जैसे कुछ लोग कमा रहे हैं और बाकी लोग मलाई खा रहे हैं. 

अब इस दौर में ये जो पूरा प्रकरण है, उसमें फोकस भारतवर्ष पर था. भारत केवल मेट्रो या शहरों में सीमित नहीं है. पूरी ग्रामीण अर्थव्यवस्था को जिस तरह से शेक करने की कोशिश की गयी है, जिस तरह उस पर ध्यान दिया गया है, वह बहुत कुछ इस बजट के बारे में कहता है. वित्त मंत्री सीतारमण ने अपने भाषण की शुरुआत में ही ज्ञान (GYAN यानी ग्रामीण, यूथ, अन्नदाता और नारी) पर खास ध्यान देने की बात कही है, वह भी बहुत कुछ कहता है. इनका साथ तो हमें चाहिए ही चाहिए, वरना हम विकास कैसे करेंगे, तब तो हम प्रगतिशील थे और वही बने रहेंगे. इनका साथ तो हमें चाहिए ही चाहिए. तो, केंद्र सरकार का जो फोकस है, जो ध्यान है, वह सबसे अधिक दे रही है. तो, कहा जाना चाहिए कि जो सबसे बड़ी बात होती है, या फिर जो ब्रेकिंग न्यूज की तरह की बात थी, उसे वित्तमंत्री ने सबसे आखिर के लिए बचा कर रखा था और कहा कि टैक्स-स्लैब अब ये होगा. 

मिडिल क्लास और बिहार 

बिहार को फायदा क्या हुआ है? बिहार को कभी उस ढंग से फायदा तो मिला नहीं, इसलिए अब थोड़ा सा भी कुछ होता है तो दूसरों को लगता है कि ऐसा क्यों हो रहा है? जो फ्रेट-इक्वलाइजेशन 1950 के दशक में आया, उसके बाद से बिहार को तो केवल घाटा ही घाटा हुआ है. एक तरह से कहें तो हमारे खर्चे पर बहुतेरे राज्य बने हैं, खासकर जिनके आसपास समंदर था और जो आज बड़ी इकोनॉमी वाले हैं, जैसे गुजरात, महाराष्ट्र, तमिलनाडु इत्यादि, तो वे बिहार के खर्चे पर बने हैं, बिहार में तो इंफ्रास्ट्रक्चर है ही नहीं, तो उसके लिए बहुत कुछ करना तो होगा. मेरे हिसाब से तो यह भी कम ही था. इसके अलावा एक बात और ये भी है कि बिहार का नाम लिया गया इसलिए तवज्जो भी दी गयी, वरना आप खुद देखिए. अब बिहार में एयरपोर्ट अगर नहीं है तो बनाना पड़ेगा न भाई. बिहटा एयरपोर्ट पर तो बहुत पहले से काम चल रहा है. हरेक स्टेट में ऐसा एक एयरपोर्ट है, तो अगर ग्रीनफील्ड में नाम चला गया तो ऐसा क्या हो गया? जहां तक मखाना का सवाल है, तो पहले से कई सारी योजनाएं चल ही रही हैं. उनको ही तो थोड़ा बूस्ट किया गया है. 

अब कहने के लिए तो निर्मला सीतारमण ने मिथिला पेंटिंग वाली साड़ी भी पहनी थी, लेकिन उन्होंने यह अपना सिग्नेटर स्टेटमेंट बना रखा है. पिछली बार उन्होंने तेलंगाना के हैंडीक्राफ्ट वाली साड़ी पहनी थी. यह सचमुच एक बड़ी बात है. इनकी दृश्यता तो भारत के बाहर भी है, तो अगर हम अपनी संस्कृति को शोकेस कर पाते हैं, तो इससे अच्छी बात भला क्या होगी? 

ये बजट पूरे भारत के लिए

मीम्स तो जो बनाते हैं, वो बनाएंगे ही. ये सारे ऐसे प्रोडक्ट हैं, जिनकी मार्केट वैल्यू होती है. लोगों को कुछ देर के लिए मजा आता है. ट्रंप तक पर बहुतेरे मीम्स बनते हैं, तो वो एक अलग मसला है. हालांकि, इस बार बजट में जो बात मुझे सबसे अलग लगी, वह ये कि ये बजट किसी तरह से ऑडिएंस को देखकर नहीं बनाया गया है. आमतौर पर बजट पहुत वैयक्तिक होता है, हमारे आलोचक हमारी आलोचना न करें, इसको ध्यान में रखकर बजट बनाया जाता है. यह बजट इनसे मुक्त है. बजट तो पूरे देश की अर्थव्यवस्था का द्योतक होता है, होना चाहिए. इसमें मैक्रो-इकोनॉमी की बात होगी, जैसे इसमें खेती पर बहुत बात हुई है, एमएसएमई पर बहुत अधिक फोकस दिया है. 37 फीसदी योगदान है लघु और मध्यम दर्जे के उद्योगों का- इंफ्रास्ट्रक्चर में. हमारे देश का जो कुल निर्यात है, वह 45 फीसदी एमएसएमई ही करता है. अगर उसको बूस्ट किया जा रहा है, तो रोजगार के लिए, आय के लिए इससे अच्छी बात क्या होगी...

हमारे ग्रोथ इंजन में इन्होंने केवल फिजिकल कैपिटल यानी इंफ्रास्ट्रक्चर की बात नहीं की, बल्कि ह्युमन कैपिटल यानी मानव संपदा की भी बात की. हमारे देश में कुपोषण एक बड़ी समस्या है, इस बजट में उस पर भी बात की गयी है. कुशल श्रमिक बनाने पर भी फोकस दिया गया है. बजट ओवरऑल दीर्घकालीन योजना को ध्यान में रखकर बनाया गया है और यह एक अच्छी बात है. 

[नोट- उपरोक्त दिए गए विचार लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं. यह ज़रूरी नहीं है कि एबीपी न्यूज़ ग्रुप इससे सहमत हो. इस लेख से जुड़े सभी दावे या आपत्ति के लिए सिर्फ लेखक ही ज़िम्मेदार है.] 

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