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समंदर के रास्ते क्या फिर से हो रही है मुंबई को दहलाने की आतंकी साजिश?

चौदह साल बाद क्या फिर से मुंबई को दहलाने की किसी आतंकी साजिश को अंजाम देने की तैयारी है? मुंबई के समंदर में दो संदिग्ध नाव मिलने के बाद हमारी खुफिया व सुरक्षा एजेंसियों के हाथ-पैर इसलिये फुल गए हैं कि इनमें एक नाव से तीन रायफल और गोला बारुद मिला है. लिहाज़ा किसी आतंकी साजिश के पहलू को नकारा नहीं जा सकता. चिंता की बड़ी बात ये है कि रायगढ़ के समुद्र में जिस जगह से हथियारों से लैस नाव मिली है, वहां से मुम्बई 200 किलोमीटर और पुणे महज 170 किलोमीटर दूर है. साल 2008 में 26 नवम्बर की रात मुम्बई को दहलाने वाले 10 पाकिस्तानी आतंकवादी समंदर के रास्ते ही मुम्बई में दाखिल हुए थे.

हालांकि महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा है कि फिलहाल किसी आतंकी एंगल की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन सरकार व सुरक्षा एजेंसियों को इसे हल्के में लेने की जरा भी भूल नहीं करना चाहिये. ये भी तो हो सकता है कि आतंकी समूहों की आका पाक की खुफिया एजेंसी आईएसआई ने भारतीय एजेंसियों को चकमा देने के लिए जानबूझकर खाली नाव में हथियार भेजने का ट्रायल किया हो. यह देखने के लिए कि इसकी क्या प्रतिक्रिया होती है.

फडणवीस के मुताबिक इस मामले को लेकर भारतीय कोस्ट गार्ड के साथ संपर्क करके तफ्तीश शुरू की गई है और इस नाव का नाम लिडिहार है. इसकी मालिक एक ऑस्ट्रेलियन महिला है और उस महिला के पति इस नाव के कप्तान हैं. ये नाव मस्कट यानी ओमान से यूरोप की तरफ जा रही थी, नाव का इंजन खराब होने पर नाव पर मौजूद लोगों ने डिस्ट्रेस कॉल दिया. कोरियन नेवी ने फिर रेस्क्यू किया और उन्हें ओमान के सुपुर्द किया. दावा किया गया कि हाई टाइड के कारण ये नाव श्रीवर्धन की तरफ आकर उसके किनारे पर आ लगी. 

उन्होंने बताया कि नाव से तीन एके-47 राइफलें मिलीं. आधी टूटी हालत में नाव हाईटाइड के कारण कोकण तट की ओर आ गई. केंद्रीय एजेंसियों को सूचित कर दिया गया है. किसी भी परिणाम की किसी भी संभावना को हल्के में नहीं लिया जाएगा. एटीएस भी इस पर काम कर रही है, लेकिन बड़ा सवाल ये है कि तीन रायफलों से लैस एक लावारिस नाव भारतीय कोस्ट गार्ड के सुरक्षाकर्मियों की निगाहों से बचकर रायगढ़ के हरिहरेश्वर समुद्र तट पर आखिर कैसे पहुंच गई? 

शुरुआती जानकारी के आधार पर ही फडणवीस ने दावा किया है कि ये नाव ओमान से यूरोप की तरफ जा रही थी, लेकिन कौन जानता है कि इसे ओमान के जरिये ही भारत की समुद्री सीमा में भेजा जा रहा हो? ये भी तो संभव है कि इसमें आतंकवादी सवार हों और वे अपनी पूर्व नियोजित प्लानिंग के तहत किसी और नाव में सवार हो गए हों और इसमें हथियार रखकर उसे भारत की सीमा में छोड़ दिया हो?

इन सारे सवालों के उठने की वजह भी है. दरअसल, पिछले साल दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने पाकिस्तान से ट्रेनिंग लेकर आये दो आतंकियों को पकड़ा था. उन्होंने ही पूछताछ में ये खुलासा किया था कि उन्हें समुद्री रास्ते से ओमान के जरिये ही पाकिस्तान पहुंचने की सलाह दी गई थी. इसलिये संदिग्ध नाव मिलने की ये ऐसी गुत्थी है, जिसे सुलझाने के लिए हमारी खुफिया व सुरक्षा एजेंसियों को बेहद मगज़ खपाना होगा. वह इसलिये कि इस बार मुंबई की बजाय पुणे या कोई और महानगर के साथ ही गोवा भी तो आतंकियों के निशाने पर हो सकता है. लेकिन सुरक्षा एजेंसियों का ध्यान भटकाने के मकसद से उन्होंने हथियारों से लदी नाव रायगढ़ के समुद्री तट पर भेजकर कोई खतरनाक चाल खेली हो.

समंदर में किसी खाली नाव का मिलना उतने बड़े खतरे का विषय नहीं है, लेकिन हथियारों व बारुद से लैस मिलने वाली ऐसी हरेक नाव किसी आतंकी साज़िश को अंजाम देने का एक बड़ा अलार्म ही होती है. चिंता की बात ये है कि आतंकी समूहों ने इस अलार्म को बजा दिया है और अब इस साजिश को नेस्तनाबूत करना हमारी सुरक्षा एजेंसियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती है.

नोट- उपरोक्त दिए गए विचार लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं. ये जरूरी नहीं कि एबीपी न्यूज ग्रुप इससे सहमत हो. इस लेख से जुड़े सभी दावे या आपत्ति के लिए सिर्फ लेखक ही जिम्मेदार है.

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