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किसानों की समस्याओं से रूबरू हुए राहुल गांधी

राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा करीब ढाई हजार किलोमीटर का फासला तय करने के बाद आगर मालवा जिले के सुसनेर इलाके में पहुंची जहां पर दोपहर विश्राम के दौरान राहुल गांधी ने प्रदेश के अलग-अलग इलाकों से आए हुए किसानों से सीधा संवाद किया और किसानों की समस्याओं को सीधे तौर पर जाना. सुसनेर में कांग्रेस नेता गांधी ने किसानों से सीधे मुलाकात की और अलग-अलग क्षेत्रों से आए अलग-अलग प्रकार की खेती करने वाले किसानों से उनकी समस्याओं के बारे में जाना. इस बैठक में रीवा हरदा शिवपुरी ग्वालियर शाजापुर आगर मालवा आदि जिलों के करीब 30 किसान सम्मिलित हुए और उन्होंने फसल की बुवाई से लेकर उपज के बेचने तक की बीच आने वाली परेशानियों को राहुल गांधी के समक्ष रखा.

किसानों ने बताया कि बीज खरीदने से लेकर फसल उत्पाद बेचने तक हर स्तर पर उनको परेशानियों और दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. महंगे दाम का बीज, खाद, दवाई आदि खरीद कर जब उपज मंडी में लेकर जाते हैं तो किसानों को मामूली रुपये हाथ में मिलते हैं, जिससे उनके ऊपर हमेशा आर्थिक संकट बना रहता है.

शाजापुर के विकसित किसान रामवीर सिंह सिकरवार ने बताया कि सोयाबीन, गेहूं, प्याज और लहसुन की खेती में जो लागत होती है और उसके बाद मंडी में जिस तरह की कठिनाई बेचने में आती है उसके बारे में समाधान निकालने की बात कही.

मंदसौर इलाके के एक किसान ने अफीम की खेती में एनडीपीएस एक्ट के दुरुपयोग के साथ-साथ किसानों को शासन की तरफ से दिया जा रहे मूल्य के बारे में बताते हुए कहा कि जब अफीम पुलिस जब्त करती है तो उसका मूल्य एक करोड़ रुपये प्रति किलो के हिसाब से बताती है. किसानों से जब यही अफीम खरीदी जाती है तो 1200 से 1800 रुपये तक का रेट मिलता है. साथ ही अफीम के नाम पर किसानों के ऊपर केस दर्ज कर सताया जाता है.

सिंचाई के लिए सस्ती और पर्याप्त बिजली की उपलब्धता के अलावा नियमित और आवश्यकता अनुसार खाद उपलब्ध ना होने की स्थिति में किसान अपनी उपज पूरी नहीं ले पाते हैं. इसके लिए जितनी बिजली उतना दाम के आधार पर किसानों को आवश्यकता अनुसार बिजली कनेक्शन और जरूरत के मुताबिक खाद उपलब्ध कराने की भी बात किसानों ने रखी.

राहुल गांधी ने किसानों की इन समस्याओं के निराकरण के लिए कहा कि जिस तरह सीमा पर जवान की चिंता की जाती है उसी तरह देश के किसान की भी फिक्र सरकार को करनी चाहिए.

गांधी ने कहा कि जिस तरह से इमरजेंसी में जवानों को याद किया जाता है उसी तरह से किसानों का भी एक इमरजेंसी बटन होना जरूरी है क्योंकि किसान देश की रीढ़ है. देश को चलाने वाली किसान होता है. इसके लिए जरूरी है कि हम किसानों के लिए एक सुरक्षित कारपेट बिछाए जिससे किसान नीचे की तरफ नहीं जा सके. सुरक्षित कारपेट से तात्पर्य इस बात का है कि किसानों को एक निश्चित राशि साल भर में मिलना चाहिए ताकि वह अपना भरण-पोषण कर सके. हमने अपने घोषणापत्र में न्याय योजना की बात कही थी और इसको छत्तीसगढ़ में लागू भी किया है जिसमें किसानों को सालाना ₹72000 राशि उनके खाते में देने की योजना है अगर यह राशि किसान की जेब में जाती है तो उसका परिवार कभी संकट में नहीं रहेगा. किसान की फिक्र करना सरकार की जिम्मेदारी है और दायित्व भी है. 

नोट- उपरोक्त दिए गए विचार लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं. ये जरूरी नहीं कि एबीपी न्यूज ग्रुप इससे सहमत हो. इस लेख से जुड़े सभी दावे या आपत्ति के लिए सिर्फ लेखक ही जिम्मेदार है.

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