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हर दर से दुत्कारा गया पाकिस्तान बाज नहीं आ रहा है...

370 के मुद्दे पर पाकिस्तान को कहीं भी समर्थन नहीं मिल रहा है। प्रधानमंत्री इमरान खान बौखलाहट में भारत विरोधी बयान दे रहे हैं। हालांकि पाक की हालत पतली है, आर्थिक रूप से पाक कंगाल हो चुका है।

जिसे हम पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के तौर पर जानते हैं, जहां दमन चक्र चला रही पाकिस्तानी हुकूमत के खिलाफ आवाज बुलंद हो रही है तो वहीं भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी कह दिया है कि पाकिस्तान के खिलाफ अगर किसी मुद्दे पर बात होगी तो वो पाक अधिकृत कश्मीर का मुद्दा होगा। जाहिर है जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद तिलमिलाए घूम रहे पाकिस्तान पर दोहरी कूटनीतिक चोट होगी, क्योंकि जम्मू-कश्मीर पर पाकिस्तान की एक न चली...पूरी दुनिया में घूमने के बावजूद समर्थन में कोई नहीं आया और तो और उसके अपने ही मुल्क के भीतर उसके विरोध में आवाजें उठने लगी। पाकिस्तान के खिलाफ कई देशों में प्रदर्शन हुए...जिसने पाकिस्तान को बैकफुट पर ढकेल दिया।

हालांकि पाकिस्तान अपना प्रोपैगैंडा फैलाने से बाज नहीं आ रहा लेकिन पीओके में अपनी कमजोर स्थिति को देखते हुए पाकिस्तान के पीएम इमरान खान भी अपनी आवाम को आगाह कर रहे हैं हिंदुस्तान से होने वाली कार्रवाई को लेकर, इमरान खान ने ये बयान 14 अगस्त यानी पाकिस्तान की आजादी वाले दिन दिया है। हालांकि पाकिस्तानी मीडिया भारत सरकार और प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ प्रोपैगैंडा फैलाने से बाज नहीं आ रहा है। ये हाल तब है जब पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति लगातार खस्ता है। जब से पाकिस्तान में इमरान की हुकूमत आई है...तब से कंगाली बढ़ती जा रही है...कंगाली सिर्फ आवाम की जरूरतों के मद्देनजर ही नहीं...बल्कि बड़े ओहदों पर काबिल लोगों की कमी को लेकर भी...तभी तो इमरान को अपने सेना प्रमुख कमर बाजवा का कार्यकाल 3 साल बढ़ाना है।

अब आपको बताते हैं कि परमाणु हथियारों के लिए जिस फर्स्ट नो यूज़ पॉलिसी का ज़िक्र किया जाता है...वो कहां से आता है...आपको यहां पर ये भी बता देना जरूरी होगा कि जिस नो फर्स्ट यूज पॉलिसी का जिक्र यहां पर बार-बार होता रहा है उसको उसका सबसे पहला प्रयोग ही चीन ने वर्ष 1964 में किया था... तब से लेकर आज तक चीन अपनी इस नीति पर पूरी तरह से कायम है....वहीं नाटो सेनाएं इस पॉलिसी को नहीं मानती हैं....इसके अलावा पाकिस्तान की तरफ से हुई बयानबाजी भी इस पॉलिसी को नजरअंदाज करती हुई प्र‍तीत होती है...भारत की बात करें तो जिस तरह की मंशा राजनाथ सिंह ने अपने बयान में जताई है उसी मंशा को पूर्व रक्षा मंत्री मनोहर पर्रीकर भी जता चुके हैं....भारत ये भी काफी हद तक साफ कर चुका है कि परमाणु हथियारों का इस्तेमाल उस वक्त के हालातों पर तय होगा....इसका सीधा सा अर्थ है कि जब तक पाकिस्तान अपनी नीयत साफ रखेगा तब तक भारत भी एनएफयू पर अमल करता रहेगा...

परमाणु हथियारों को हमेशा से ही इंसानियत के लिए खतरा माना जाता रहा है...जापान के नागासाकी और हिरोशिमा की गवाही आज भी मिल जाएगी...यही वजह है कि समूची दुनिया में परमाणु हथियार हमेशा से फिक्र का विषय रहे हैं...परमाणु शक्ति संपन्न देशों के बीच टकराव की आशंका को लेकर चिंता की जाती रही है....आइए अब आपको बताते हैं कि किस देश के पास कितने परमाणु हथियार हैं...एक दावे के मुताबिक दुनिया शक्तिशाली देशों में शुमार किए जाने वाले रूस और अमेरिका इसमें अव्वल हैं...जहां रूस के पास परमाणु हथियारों की संख्या 7000 के करीब है...तो अमेरिका बेहद मामूली आंकड़ों से पीछे हैं...यहां 6800 हथियार हैं...इतनी बड़ी तादाद में किसी दूसरे देश के पास परमाणु हथियार नहीं है...फ्रांस के पास 300, भारत के पास 270, ब्रिटेन के पास 215, पाकिस्तान के पास 140, चीन के पास 200 और इजरायल के 80 परमाणु संपन्न हथियार हैं....हालांकि ये महज अनुमान हैं...लेकिन ये अनुमान ही दुनिया में खौफ भरने के लिए काफी है...

तो परमाणु हथियार की बात करने वाले पाकिस्तान के एक और सच से आपको रूबरू करा देते हैं...हिंदुस्तान के खिलाफ जंग लड़ने वाला पाकिस्तान कंगाली और भुखमरी के कगार पर पहुंच चुका है....पाकिस्तान की मीडिया में भी ये चर्चा जोर पकड़ रही है कि इमरान सरकार के एक वर्ष के कार्यकाल में आम लोगों को मुश्किलों का सामना करना पड़ा है...2011 के बाद पहली बार ऐसा देखने को मिल रहा है कि देश में मुद्रास्फिति की दर दहाई के आंकड़े को पार कर गई है....इतना ही नहीं सरकार के अपने अनुमान के मुताबिक इसके 11 फीसद तक बढ़ने की उम्मीद की गई है...पाक मीडिया के मुताबिक सीएनजी, पीएनजी, रुपये में गिरावट, जरूरत की चीजों के दाम और टैक्स में बढ़ोतरी से आम आदमी की जेब ढीली हो रही है। एक डॉलर की कीमत बीते एक वर्ष में 35 रुपये तक बढ़ी है...अगस्त 2018 में एक डॉलर की कीमत 123 थी वह अब बढ़कर 158 तक पहुंच चुकी है....

इमरान सरकार की नाकामी का अंदाजा सिर्फ इसी बात से लगाइए कि...पाकिस्तान में हर चीज के दाम बढ़ चुके हैं....पेट्रोल के दाम 95.24 रुपये से बढ़कर 117.84 तक हो चुके हैं और डीजल 112.94 रुपये से बढ़कर 132 रुपये के पार हो चुका है। इमरान सरकार की काबलियत और उनकी विफलता का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि जब वह सरकार में आए थे तब सीएनजी की कीमत 81.70 रुपये थी जो अब 123 प्रति किग्रा तक पहुंच चुकी है।

कुछ यही हाल रोजमर्रा की खाने पीने की चीजों का है...जिनके दाम आसमान पर पहुंच चुके हैं...चपाती और नान की कीमत इमरान के सत्‍ता में आने के बाद से दो रुपये से बढ़कर 12 रुपये तक हो चुकी है। इसके अलावा शीरीमल और ताफतान की कीमत 40 रुपये तक हो चुकी है...ब्रेड की कीमत की बात करें तो रमजान से पहले ही इसकी कीमतों में आठ फीसद की तेजी आ चुकी थी, ईद के बाद इसमें नौ फीसद की तेजी देखने को मिली है....चीनी की कीमतों में इमरान के सत्ता में आने के बाद 12 रुपये तक का इजाफा हुआ है....स्टील की कीमतों में भी जबरदस्त इजाफा इमरान के सत्ता में आने के बाद दिखाई दिया है...पिछले साल अगस्त में इसकी कीमत 103,000 रुपये हुआ करती थी जो अब बढ़कर 120,000 प्रति टन तक हो चुकी है। इसी तरह से सीमेंट के दामों में बीते एक वर्ष में सौ रुपये तक का इजाफा हो चुका है। घी और तेल से लेकर दालों की कीमत में 100-150 रुपये तक बढ़ चुकी है। इसी तरह से दूध और घी का भी हाल है। इसमें 20-30 रुपये की तेजी इमरान सरकार के बाद आई है।

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