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खतरनाक गठजोड़ है ISI-खालिस्तान, सीमा पार की शह पर बिगाड़ना चाहते हैं देश का अमन-चैन

हमारे देश के दुश्मन देश को डिस्टैबलाइज करने के लिए पूरी तरह से प्रयासरत हैं. उन दुश्मनों में पाकिस्तान की इंटेलिजेंस एजेंसी सबसे महत्वपूर्ण है, जो रावलपिंडी में बैठकर टारगेट किलिंग कराता है. ये हमारी कमजोरियों का फायदा उठाकर मज़हबी जुनून पैदा करते हैं और हिंसा कराते हैं.

हमारे मुल्क को, हमारे आवाम को सतर्क रहने की सख्त जरुरत है. देशद्रोही ताकतों का एक गठजोड़ है, जो विदेश से कंट्रोल होता है. हमारे मुल्क में आतंकवादियों का घुसपैठ करा दिया जाता है, जो आम जनता में आकर मिल जाते हैं और जनता के बीच भ्रम पैदा करते हैं. आम लोगों को आतंकी गतिविधियों से जोड़ने की कोशिश की जाती है. ऐसे लोग अभी-अभी दिल्ली में पकड़े गए हैं. ऐसे एलिमेंट से हमें सावधानी बरतनी चाहिए और उनको पुलिस के हवाले कर देना चाहिए. ऐसे लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होनी ही होनी चाहिए.

घुसपैठियों से सख्ती से निपटती है फौज

घुसपैठ को रोकने की जिम्मेदारी फौज को दी गई है, ताकि आतंकियों के घुसपैठ को पूरी सख्ती से रोका जा सके. फौज पूरी सख्ती से कॉर्डन और सर्च ऑपरेशन के जरिए ऐसे आतंकियों का सफाया करती है.

खतरनाक गठजोड़ है ISI-खालिस्तान

हमारे सामने ISI-खालिस्तान गठजोड़ से जुड़ी सुरक्षा चुनौतियां हैं और ये भविष्य में भी तब तक बनी रहेगी, जबतक ऐसी ताकतों का अस्तित्व है. हमारे याहां पुरानी पुरानी ऐतिहासिक गलतियां हुई हैं, वो कश्मीर में भी हुई हैं और तिब्बत में भी. उनका ही ये अंजाम है कि हमें इन ताकतों के खिलाफ लगातार युद्धरत रहना पड़ेगा. खासकर इस हाइब्रिड वारफेयर में कहीं भी हमला हो सकता है. ये सिर्फ बॉर्डर से जुड़ा हुआ मसला नहीं है. आजकल सोशल सिक्योरिटी भी होगी, साइबर सिक्योरिटी भी होगी और स्कूलों की सिक्योरिटी भी होगी. जैसा कि देखा गया कि दर्जी की दुकान पर भी हमला हो गया. इसलिए पूरे समाज को, पूरे आवाम को सतर्क रहना पड़ेगा. इसलिए हम अग्निवीर भी लाए हैं, ताकि पूरे अवाम में ट्रेनड सोल्जर उपलब्ध हो सकें. सिर्फ फौज ही नहीं, पूरे समाज को सतर्क रहना बहुत जरूरी है क्योंकि दुश्मन रtप बदलकर सोसायटी में घुस रहा है.

टारगेट किलिंग से भय फैलाने का काम

टारगेट किलिंग के जरिए आतंक, भय का माहौल पैदा होता है. मजहबी जुनून भड़कता है, जिससे लोग आपस में लड़ पड़ते हैं. इससे खतरे और मजहबी जुनून का मुद्दा खड़ा हो जाता है क्योंकि ऐसे टारगेट किलिंग के खिलाफ प्रतिक्रिया होती है. रीएक्शन में मजहबी जुनून और बढ़ जाता है.

सिक्योरिटी सिर्फ फौज या पुलिस का काम नहीं

सबकी ट्रेनिंग ऐसी होनी चाहिए कि सिक्योरिटी सिर्फ फौज या पुलिस का काम न हो. ये पूरे समाज का काम हो. कम से कम खुद की सिक्योरिटी को लेकर तो ये होना ही चाहिए. 'नेशनल सिक्योरिटी' स्कूलों में एक विषय होना चाहिए. दूसरा मसला है ट्रेनिंग. जैसे अग्निवीर सिर्फ फौज में ही नहीं, वे सिविल में आकर भी हिफाजत का काम करेंगे. तीसरी बात है अग्निवीर की तरह कम्प्लसरी मिलिट्री ट्रेनिंग. फिर एनसीसी में सभी नागरिकों की सतर्कता पर भी ट्रेनिंग होनी चाहिए. जैसे बम ब्लास्ट से निपटने के लिए कहा जाता है कि अनजान वस्तुओं का नहीं छुएं. किसी पर शक हो, तो पास के सिक्योरिटी एजेंसी को सूचना दें या टेलीफोन से जानकारी दें. सिक्योरिटी जीवन का एक अभिन्न पहलू होना चाहिए. आजकल के जमाने में जब हाईब्रिड वार फैल गया है, यूक्रेन और रूस जंग लड़ रहे हैं. हम भी दुश्मनों से घिरे हुए हैं. हमारी सीमाएं काफी संवेदनशील हैं. ऐसे हालात में जब उग्रवादी ट्रेनड करके अंदर भेजे जा रहे हैं, तो हमें भी सिक्योरिटी माइंडेड होना पड़ेगा.

समाज के हर तबके को मिले ट्रेनिंग

ISI-खालिस्तान कई मौकों पर टारगेट किलिंग कर भी चुके हैं. मगर हमारे देश की ख़ास बात ये है कि हम बड़े से बड़े संकट को टाल देते हैं. "कुछ बात है कि हस्ती, मिटती नहीं हमारी. सदियों रहा है दुश्मन, दौर-ए-ज़माँ हमारा." हमारे मुल्क ने बड़े से बड़े संकट झेले हैं. इस मुल्क ने औरंगज़ेब जैसों को भी झेला है. उसके बाद बड़े-बड़े आततायियों को झेला है. नादिरशाह के कत्ल-ए-आम को भी झेला है. तो हम टारगेट किलिंग की समस्या से भी निपट लेंगे और इसके लिए समाज के हर तबके को हर तरह की सतर्कता की ट्रेनिंग देनी होगी.

सेल्फ डिफेंस की ट्रेनिंग बेहद जरूरी

अब तो महिलाएं भी फौज में कॉम्बेट रोल में आ गई हैं. सियाचीन पर कैप्टन शिवा चौहान पोस्टेड हैं. लड़कियां फाइटर पायलेट के रूप में भी ट्रेनड हुई हैं. महिलाओं को फौज में लेने का संबंध बराबर का हक़ देने से तो है ही, मगर असली कारण है कि आज के दिन समाज के हर तबके को सेल्फ डिफेंस के लिए ट्रेनड होना पड़ेगा. मार्शल आर्ट, कॉम्बेट ट्रेनिंग, सेल्फ डिफेंस ट्रेनिंग, ये स्कूल पाठ्यक्रम में अनिवार्य करना होगा. 

[नोट- उपरोक्त दिए गए विचार लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं. ये जरूरी नहीं कि एबीपी न्यूज़ ग्रुप इससे सहमत हो. इस लेख से जुड़े सभी दावे या आपत्ति के लिए सिर्फ लेखक ही जिम्मेदार है.] 

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