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दिल्लीवासियों चौंकिए मत, यह धूंध नहीं कुछ और ही है, जानिए कोहरानुमा मौसम की वजह

दिल्ली में इन दिनों मौसम करवटें बदल रही हैं. इससे लोगों को मई के महीने में ठंडक का एहसास हो रहा है. लोगों को दिल्ली एनसीआर और अन्य इलाकों जैसे इंडिया गेट आदि में सुबह में कोहरानुमा वातावरण दिखाई दिया. यूं तो दिल्ली अपनी गर्मी के सितम के लिए जानी जाती है, और वो भी अप्रैल और मई महीने में तो यह अपने सातवें आसमान पर रहती है. लेकिन इस बार मौसम का नजारा बदला-बदला सा दिख रहा है. लोगों को हैरानी भी हो रही है कि मई में ठंड जैसा नजारा कैसे दिख रहा. ऐसे में दिल्लीवासियों के मन में बदलते मौमम के रुख के पीछे के कारणों को जानना बेहद जरूरी है. इसी पर हमने  बात की है बिहार क्लाइमेट चेंज पॉलिसी समिति के अध्यक्ष और केंद्रीय विश्वविद्यालय दक्षिण बिहार के विज्ञान एवं अर्थ विभाग में कार्यरत प्रोफेसर सह डीन प्रधान पार्थ सारथी से और उन्होंने जो कुछ भी बताया वह आपके लिए जानना बहुत महत्वपूर्ण है.

डॉ. प्रधान ने दिल्ली में बदलते मौसम के बीच कोहरे छाने की बात को एक नॉर्मल फिनॉमिना बताया है. उन्होंने कहा कि इस तरह के कोहरेनुमा मौसम को देखकर दिल्लीवासियों को चौंकने की जरूरत नहीं है. चूंकि जब अप्रैल और मई के महीने में जब बहुत ज्यादा बारिश हो जाती है तब हवाओं की रफ्तार बहुत कम हो जाती है. इस वजह से वातावरण में बारिश की बूंदे लटकी हुई रह जाती हैं.जिसे हम सब आमतौर पर मॉइस्चर या फिर वाष्प कण कहते हैं वे लटके रह जाते हैं लेकिन बारिश नहीं कर पाते हैं और चूंकि हवाओं की गति बहुत अत्यधिक नहीं रह जाती है तो ऐसी स्थिति में ये वाष्प कण स्थिर हो जाते हैं. ऐसें में विजिबिलिटी यानी दृष्यता बहुत कम होकर 40 मीटर, 50 मीटर और 100 मीटर की दूरी तक सिमट जाती है. इससे धूंधनुमा स्थिति बनी रहती है लेकिन इसे वास्तिक कोहरा नहीं कह सकते हैं. चूंकि कोहरे का जो वैज्ञानिक परिभाषा है वह इसे पूरा नहीं कर पाता है. विजिबलिटी कम हो जाने की वजह से लोगों को गाड़ियों की लाइट जलानी पड़ जाती है. 

डॉ. प्रधान पार्थ सारथी ने आगे कहा कि इस तरह के मौसम बनने का कारण यह है कि तकरीबन हर चार से पांच साल के बाद अप्रैल और मई के महीने में बारिश होती है, जिसे हम प्री-मानसून शॉवर भी कहते हैं. ऐसे में जब बारिश होते रहती है या फिर जिसे हम थंडर स्टॉर्म एक्टिविटी कहते हैं इस वहज से बादलों का बनना जारी रहता है. फिर बारिश भी इन महीनों में ज्यादा हो जाती है. इसकी वजह से 5 से 7 डिग्री तक तापमान में गिरावट दर्ज की जाती है.

चूंकि अप्रैल और मई के महीने में दिल्लीवासियों को 40 से 42 डिग्री का तापमान झेलने की आदत रहती है. ऐसे में अगर तापमान में 7 से 8 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट हो जाती है तो लोगों को राहत महसूस होगी. अभी दिल्ली में भी यही हो रहा है. ये बहुत कोई नई बात नहीं है. ये एक सामान्य सी बात है और ऐसा एक नियमित अंतराल के बाद देखने को मिलता रहा है. इसमें क्लाइमेट चेंज की कोई बहुत बड़ी भूमिका नहीं है. अगर हम लोग याद करेंगे तो बिहार की राजधानी पटना में भी इस तरह का मौसम आज से तकरीबन 3 से 4 साल पहले देखने को मिला था. चूंकि उस वक्त भी थंडर स्टॉर्म की एक्टिविटी अत्यधिक हुई थी और बादल और पानी भी खूब हुआ था और उस वक्त भी मई का महीना बहुत ही सुहावना हो गया था. ये घटनाएं पहले भी पूरे गंगेटिक प्लेन में होती रही है. 

डॉ. प्रधान ने कहा कि क्लाइमेट चेंज के कारण थंडर स्टॉर्म एक्टिविटी जो है वो हो सकता है कि हर चार या पांच साल पर ज्यादा हो रही हो. इसकी वजह से यह स्थिति हो सकती है. थंडर स्टॉर्म की एक्टिविटी उसे कहते हैं जब लगातार एक-दो दिनों के अंतराल पर आंधी और बारिश होते रहती है. लेकिन यह ज्यादातर स्थितियां ग्लोबल वॉर्मिंग के होने से उत्पन्न होती है न की क्लाइमेट चेंज की वजह से. दिल्ली के वातावरण में भी अभी इसी तरह की गतिविधियां हो रही हैं और उसके परिणामस्वरूप कोहरे जैसी स्थिति देखने को मिली है.

(यह आर्टिकल निजी विचारों पर आधारित है)

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