देश भक्ति की फिल्मों में फिर बढ़ रही है दर्शकों की दिलचस्पी
हाल ही में जब शाहरुख़ खान, कटरीना कैफ और अनुष्का चोपड़ा जैसे बड़े सितारों और बड़े बजट वाली फिल्म ‘जीरो’ जब 100 करोड़ रूपये का भी बिजनेस नहीं कर पाई. जबकि ‘जीरो’ मेरठ से मुंबई और फिर मंगल ग्रह तक की सैर कराती है. ऐसे में उन्हीं दिनों एक छोटी फिल्म जिसका बजट सिर्फ 25 करोड़ है और जिस फिल्म में बड़े सितारे भी नहीं हैं

नई दिल्ली: इस साल के पहले महीने में ही दर्शकों ने देशभक्ति की फिल्मों के प्रति अपना जो उत्साह दिखाया है, उससे फिल्म उद्योग में भी एक नया जोश भर आया है. इससे उन फिल्मकारों की हिम्मत बढ़ गयी है जो इन दिनों देशभक्ति की फिल्मों का निर्माण कर रहे हैं. साथ ही कुछ और फिल्मकार भी अपने ऐसे प्रोजेक्ट्स के काम में तेजी ला रहे हैं. इससे उम्मीद है कि साल 2019 में ही 12 से 15 ऐसी फिल्म प्रदर्शित हो सकेंगी, जो देश प्रेम - देश भक्ति से जुडी हैं.
असल में जब गत 11 जनवरी को ‘उरी’ फिल्म रिलीज़ हुई तो बहुत से लोगों का मत था कि यह फिल्म ख़ास नहीं चलेगी. लेकिन भारतीय सेना द्वारा पाकिस्तान को मुंह तोड़ जवाब देने वाली सर्जिकल स्ट्राइक पर बनी ‘उरी’ में दर्शकों ने इतनी दिलचस्पी दिखाई कि सभी दंग रह गए. ‘उरी’ ने पहले सप्ताह में देश में ही करीब 71 करोड़ का नेट बिजनेस करके अपनी विजय पताका लहरा दी थी. जबकि 30 जनवरी तक तो ‘उरी’ 167 करोड़ रूपये से भी अधिक की कमाई करके इस साल की पहली सुपर हिट फिल्म बन चुकी है. इस फिल्म का एक संवाद –‘हाउ द जोश -हाई सर’ तो दिन प्रतिदिन लोकप्रिय हो रहा है. यहां तक प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी ने भी मुंबई में ‘राष्ट्रीय फिल्म संग्रहालय’ के उद्धघाटन पर फिल्मकारों से ‘हाउ द जोश’ बोलकर संबोधन किया तो फिल्मकारों ने भी उसी तरह पूरे जोश से कहा –‘हाई सर’.
हाल ही में जब शाहरुख़ खान, कटरीना कैफ और अनुष्का चोपड़ा जैसे बड़े सितारों और बड़े बजट वाली फिल्म ‘जीरो’ जब 100 करोड़ रूपये का भी बिजनेस नहीं कर पाई. जबकि ‘जीरो’ मेरठ से मुंबई और फिर मंगल ग्रह तक की सैर कराती है. ऐसे में उन्हीं दिनों एक छोटी फिल्म जिसका बजट सिर्फ 25 करोड़ है और जिस फिल्म में बड़े सितारे भी नहीं हैं, वह अभी तक अपनी लागत से साढ़े 6 गुना कमाई कर चुकी है. यहाँ तक फिल्म के रिलीज़ इतने दिन बाद भी दर्शक इस फिल्म में इतनी दिलचस्पी ले रहे हैं कि कुछ नयी फिल्मों के मुकाबले में तीसरे सप्ताह में भी ‘उरी’ का कलेक्शन कहीं कहीं ज्यादा है. फिर उत्तर प्रदेश सरकार ने तो कुम्भ मेले में इसकी स्क्रीनिंग रख अब ‘उरी’ फिल्म को टैक्स फ्री भी कर दिया है, ये सब देखते हुए लगता है कि यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर अभी कुछ और उड़ान भरेगी.
‘मणिकर्णिका’ को भी मिली सफलता
उधर गत 25 जनवरी को प्रदर्शित एक और देश भक्ति की फिल्म ‘मणिकर्णिका-द क्वीन ऑफ़ झांसी’ ने भी अच्छी शुरुआत की है. पहले 6 दिन में ही इस फिल्म ने 56 करोड़ रूपये का विशुद्द व्यापार करके अपने नाम पहली सफलता दर्ज करा ली है. बड़ी बात यह भी है कि किसी महिला प्रधान यानी हीरोइन ओरिएंटेड फिल्म की यह बड़ी सफलता है. विदेशों में भी ‘उरी’ और ‘मणिकर्णिका’ को देखने में दर्शक अच्छी दिलचस्पी दिखा रहे हैं.
यहाँ यह भी दिलचस्प है कि देशभक्ति पर केन्द्रित इन दो फिल्मों के अलावा भी इस महीने तीन और भी ऐसी फिल्म प्रदर्शित हुईं हैं जिनका कथानक देश भक्ति के इर्द गिर्द है. इनमें एक अविनाश ध्यानी की फिल्म ’72 ऑवर्स’ है जो महावीर चक्र प्राप्त राइफलमैन जसवंत सिंह चौधरी की शौर्यगाथा है. जसवंतसिंह ने सन 1962 में चीन-भारत युद्द के दौरान अपने अकेले दम पर अरुणाचल प्रदेश में चीन की धोखेबाज़ सेना के छक्के छुड़ा दिए थे. जबकि दूसरी फिल्म राजेन्द्र गुप्ता की -‘वो जो एक मसीहा मौलाना आज़ाद’ स्वतंत्रता सेनानी और आज़ाद भारत के पहले शिक्षा मंत्री रहे मौलाना अबुल कलाम आज़ाद की जिंदगी पर है. फिल्म में मौलाना आज़ाद के हिन्दू –मुस्लिम एकता के लिए किये गए काम को फोकस कर देश प्रेम का सन्देश दिया गया है. इसके अलावा एक और फिल्म निर्देशक ब्रजेश बटुकनाथ त्रिपाठी की ‘बटालियन 609’ है. जिसमें भारत-पाक सेना के बीच क्रिकेट मैच दिखाकर देश भक्ति का जज्बा डालने की कोशिश की गयी.
हालांकि ये तीनों फ़िल्में कुछ दब सी गयीं. क्योंकि जब 11 और 18 जनवरी को ये फ़िल्में प्रदर्शित हुईं, तब इस दौरान 15 से अधिक फ़िल्में इन दो सप्ताह में रिलीज़ होने से ये नोटिस नहीं हो सकीं. फिर ये फ़िल्में दर्शकों को ख़ास पसंद भी नहीं आयीं. लेकिन अकेले जनवरी में देश भक्ति की 5 फ़िल्में आने से लग रहा है कि देश भक्ति की फिल्मों का ज़माना फिर से लौट रहा है.
शुरू से रही है देश भक्ति फिल्मों की गूंज
यूँ हमारे यहाँ देश भक्ति फिल्मों की लोकप्रियता सिनेमा के आरंभिक काल से रही है. शुरू में देश भक्ति की फिल्म देश में लोगों के बीच देश प्रेम की अलख जगाने के लिए बनती थीं. जिससे देश की आज़ादी के लिए अधिक से अधिक लोगों में ज़ज्बा आए. सच कहा जाए तो देश में अंग्रेजों के विरुद्द हुए आन्दोलन में हमारी फिल्मों और उन फिल्मों के गीतों ने भी एक अहम भूमिका निभाई. हालांकि अंग्रेज सरकार ऐसी फिल्मों और गीतों को प्रतिबंधित करने में देर नहीं लगाती थी. फिर भी ‘आज़ादी’ और ‘जन्मभूमि’ जैसी कुछ फ़िल्में शुरू में ही बनने लगी थीं. लेकिन आज़ादी के तुरंत बाद तो देश भक्ति की फिल्मों का सिलसिला बहुत तेजी से चल पड़ा. जिनमें सन 1948 में आई निर्माता फिल्मिस्तान और निर्देशक रमेश सहगल की ‘शहीद’ ने अहम भूमिका निभाई. इस फिल्म में दिलीप कुमार और कामिनी कौशल थे.
मनोज कुमार ने दिया देशभक्ति फिल्मों को भव्य रूप
दिलीप कुमार की ‘शहीद’ के बाद सन 1965 में आई एक और फिल्म ‘शहीद’ ने तो इतनी लोकप्रियता पायी कि सभी का ध्यान देश भक्ति की फिल्मों की ओर चला गया. निर्माता केवल कश्यप और निर्देशक एस राम शर्मा की ‘शहीद’ में मनोज कुमार शहीद भगत सिंह की भूमिका में थे. यह फिल्म सुपर हिट रही. इसके बाद तो मनोज कुमार को मानो हिट फिल्मों का अचूक फार्मूला मिल गया. मनोज कुमार ने खुद निर्माता बनके ‘उपकार’, ‘पूरब और पश्चिम’, ‘रोटी कपडा और मकान’ तथा ‘क्रांति’ जैसी सफल फ़िल्में बनाकर एक ऐसा इतिहास रचा कि आज तक कोई और फिल्मकार उनका मुकाबला नहीं कर सका है.
वैसे पुराने दौर में ‘आनंदमठ’, ‘जागृति’, ‘पैगाम’, ‘हम एक हैं’, ‘अमर शहीद’, ‘शहीद उधम सिंह’,’चंद्रशेखर आज़ाद’ और ‘हकीकत’ जैसी अनेक फ़िल्में हैं जिन्हें अच्छी सफलता मिली. बाद में सन 70 और 80 के दशक में भी चेतन आनंद के अतिरिक्त रामानंद सागर और सुभाष घई सहित कुछ और फिल्मकारों ने ‘हिन्दुस्तान की कसम’, ‘ललकार’ और ‘कर्मा’ जैसी बहुत सी देशभक्ति की फ़िल्में दर्शकों को दीं.
नयी सदी में ‘लगान’ और ‘ग़दर’ ने दी बड़ी दस्तक
बाद में भी देश भक्ति की फ़िल्में यदा कदा बनती तो रहीं. जिनमें ‘रोजा’, ‘माचिस’, ‘बॉर्ड’र और ‘सरफ़रोश’ जैसी कुछ फ़िल्में तो मील का पत्थर हैं. असल में भारत–पाकिस्तान की लड़ाई और कश्मीर में आतंकवाद की बढ़ती घटनाओं के बाद देश भक्ति की ज्यादातर फ़िल्में आतंकवाद पर केन्द्रित होने लगी थीं.
लेकिन नयी सदी में देश भक्ति की फिल्मों नया युग आया 15 जून 2001 को जब इस एक ही दिन एक साथ दो ऐसी फिल्म रिलीज़ हुईं जिससे सभी को यह अहसास हो गया कि लोगों में देश प्रेम का जज्बा अभी भी बरकरार है. ये फ़िल्में थीं ‘ग़दर’ और ‘लगान’. इन दोनों फिल्मों ने लोकप्रियता और सफलता के जो शिखर छूए वह किसी से छिपे नहीं हैं. इसके पश्चात तो ‘द लिजेंड ऑफ़ भगतसिंह’, ‘स्वदेश’, ‘लक्ष्य’, ‘मैं हूँ न’, ‘मंगलपांडे’ और ‘रंग दे बसंती’, ‘चक दे इंडिया’ जैसी कई शानदार फिल्मों की कतार लग गयी.
इधर ‘लगान’ और ‘चक दे इंडिया’ जैसी फिल्मों में खेल के साथ देश भक्ति को जोड़कर एक नया अध्याय शुरू हुआ. जिसके बाद ‘भाग मिल्खा भाग’ और ‘मेरी कॉम’ जैसी उन फिल्मों ने भी देश भक्ति की अच्छी छाप छोड़ी जो खिलाडियों की जिंदगी पर थीं.
पीछे ‘एयरलिफ्ट’ जैसी फ़िल्में भी पसंद की गयीं जो यह बताती है कि अपनी जाबांज भारतीय सेना के साहस और शौर्य की गाथा हमको बहुत पसंद हैं. यही बात हाल ही में ‘उरी’ की अपार सफलता ने एक बार फिर सिद्द की है.
आने वाली हैं अब कई ऐसी फ़िल्में
यूँ तो पिछले साल भी ‘राजी’,’परमाणु’, ‘सत्यमेव जयते’, ‘मुल्क’ और ‘गोल्ड’ जैसी कुछ ऐसी फ़िल्में प्रदर्शित हुईं थीं जो देश प्रेम की बात करती हैं. लेकिन इस साल शुरू में ही 5 ऐसी फ़िल्में आने के बाद देश भक्ति की आठ-दस और फ़िल्में भी आने वाली हैं.
इन प्रमुख फिल्मों में फिल्मकार करण जोहर और अक्षय कुमार की ‘केसरी’ 22 मार्च को प्रदर्शित होगी, वह सन 1897 की सारागढ़ की लड़ाई के वीर योद्धा हवालदार इशर सिंह की जिंदगी से प्रेरित है. अक्षय के साथ परिणिति चोपड़ा भी इसमें मुख्य भूमिका में हैं.
फिर 12 अप्रैल को ‘रोमियो अकबर वॉल्टर’ है जिसमें जॉन अब्राहम ‘रॉ’ एजेंट के अलग अलग किरदारों में हैं. लेकिन सभी का एक मिशन है –देश की रक्षा. इस फिल्म में पुराने फिल्म गीत ‘ए वतन, ए वतन’ को भी लिया गया है.
इनके बाद ईद पर 5 जून को सलमान खान अपनी बहुचर्चित फिल्म ‘भारत’ के साथ दर्शकों से रूबरू होंगे. सलमान टी सीरिज के भूषण कुमार के साथ खुद इस फिल्म के निर्माता भी हैं. कटरीना कैफ, तब्बू, दिशा पाटनी और सुनील ग्रोवर भी इस फिल्म में हैं. निर्देशक हैं अली अब्बास जाफर.
स्वतंत्रता दिवस 15 अगस्त पर भी देश प्रेम के रंग में रंगी एक फिल्म ‘बाटला हाउस’ रिलीज़ हो रही है. यह फिल्म सितम्बर 2008 में दिल्ली के बाटला हाउस में हुए चर्चित एनकाउंटर पर आधारित है. इसमें भी जॉन अब्राहम पुलिस अधिकारी संजीव कुमार यादव की मुख्य भूमिका में हैं.
इसके बाद 22 नवम्बर को अजय देवगन अपनी एक फिल्म ‘तानाजी-द अनसंग वारियर’ लेकर आ रहे हैं. फिल्म में सैफ अली खान और काजोल भी हैं. यह फिल्म 17 वीं शताब्दी में मराठा साम्राज्य के सेना नायक तानाजी मालुसरे की अद्दभुत शौर्य गाथा है.
साल के अंत में 6 दिसम्बर को भी देश भक्ति से ओत प्रोत एक फिल्म ‘पानीपत’ रिलीज़ करने की योजना है. फिल्मकार आशुतोष गोवारिकर की ‘पानीपत’ मराठा सेनापति सदाशिवराव भाऊ और अफगानिस्तान के अहमद शाह अब्दाली के उस युद्द को लेकर है जो पानीपत की तीसरी लड़ाई के रूप में जाना जाता है. सन 1761 में 14 जनवरी को हुए इस युद्द में 40 हज़ार मराठा शहीद हो गए थे. फिल्म में संजय दत्त, अर्जुन कपूर और कृति सेनन अपने एक नए अवतार में नज़र आयेंगे.
इनके साथ ही इस साल देश प्रेम पर केन्द्रित जो अन्य फिल्म प्रदर्शित हो सकती हैं उनमें निर्माता करण जोहर की भारतीय वायु सेना की पहली महिला पायलट गुंजन सक्सेना के जीवन पर बनी फिल्म है. जिसमें जाह्नवी कपूर गुंजन के रोल में है. कारगिल युद्द के दौरान 1999 में गुंजन कारगिल में तैनात थीं. इस युद्द में अपने योगदान के कारण गुंजन ‘कारगिल गर्ल’ के रूप में भी सुर्ख़ियों में आई थी. जाह्नवी इस फ़िल्मके लिए अपना 7 किलो वज़न बढ़ा रही है. फिल्म की शूटिंग फरवरी अंत में शुरू हो सकती है.
इधर सुना है कि बेडमिन्टन की सुप्रसिद्द खिलाडी सायना नेहवाल की जिंदगी पर बन रही फिल्म ‘सायना’ को भी उनके देश के लिए खेले गए खेल को देश भक्ति के रंग में प्रस्तुत किया जाएगा. सायना नेहवाल की भूमिका में श्रद्दा कपूर नज़र आएंगी. फिल्म के निर्माता भूषण कुमार हैं.
उम्मीद है कि फिल्म ‘पी एम मोदी’ भी इसी साल प्रदर्शित हो सकती है. निर्माता सुरेश ओबेरॉय और निर्देशक उमंग कुमार की इस फिल्म की शूटिंग शुरू हो चुकी है. फिल्म में विवेक ओबेरॉय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भूमिका में हैं. सूत्र बताते हैं कि इस फिल्म को भी देश रंग में ढाला गया है. ठीक ऐसे ही जैसे अब से पहले गांधी, नेहरु, पटेल, आंबेडकर और सुभाष चन्द्र बोस आदि के देश के लिए किये गए महान कार्यों पर फिल्म बनी हैं.
इतना ही नहीं अगले साल भी ऐसी फिल्मों का सिलसिला जारी रहेगा. जिसमें सुप्रसिद्द क्रिकेटर कपिल देव की जिंदगी पर बनी ‘83’ है,जिसमें कपिल देव की कप्तानी में सन 1983 में भारत के विश्व कप जीतने की घटना को फिल्म का बड़ा आधार बनाया गया है. 10 अप्रैल 2020 को प्रदर्शित करने की योजना वाली इस फिल्म में कपिल की भूमिका में अभिनेता रणवीर सिंह हैं.
साथ ही अगले बरस ‘सारे जहाँ से अच्छा’ भी आएगी. जिसमें अन्तरिक्ष यात्री राकेश शर्मा के जीवन के माध्यम से उनकी सफल अन्तरिक्ष यात्रा के साथ उस पल को फिल्म का विशेष आधार बनाया है जब उनके अन्तरिक्ष में पहुँचने पर तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी पूछती हैं, वहां से भारत कैसा दिख रहा है. इस पर राकेश शर्मा कहते हैं-सारे जहाँ से अच्छा.
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(नोट- उपरोक्त दिए गए विचार व आंकड़े लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं. ये जरूरी नहीं कि एबीपी न्यूज ग्रुप सहमत हो. इस लेख से जुड़े सभी दावे या आपत्ति के लिए सिर्फ लेखक ही जिम्मेदार है.)































