एक्सप्लोरर

आखिर कांग्रेस ने मान लिया कि सत्ता पाने के लिए हिंदुओं का साथ जरूरी है

आखिरकार कांग्रेस को यह सच मानने पर मजबूर होना पड़ा है कि देश के बहुसंख्यक समुदाय यानी हिंदुओं का समर्थन उसे हासिल नहीं है और इसीलिए वो केंद्र की सत्ता से बाहर है. अब उसे ये भी समझ आ रहा है कि सत्ता में आने के लिए उसे मुस्लिम तुष्टिकरण की अपनी नीति छोड़नी होगी और हिंदुओं का साथ लेना होगा.

अगर यही बात विपक्ष के किसी नेता ने कही होती तो कांग्रेस उसे हवा में उड़ा देती, लेकिन इस हकीकत का बखान यूपीए सरकार में रक्षा मंत्री रह चुके पार्टी के वरिष्ठ व सुलझे हुए नेता ए. के.एंटनी ने किया है, इसलिए इसका वजन है और अपना महत्व भी है.

गांधी परिवार समेत कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व को एंटनी के इस बयान को गंभीरता से लेते हुए न सिर्फ आत्मनिरीक्षण करने की जरूरत है, बल्कि उसी लिहाज से अपनी रणनीति को भी बदलना होगा. एंटनी ने पूरी ईमानदारी और साफगोई से जिस जमीनी हकीकत का जिक्र किया है, वह पार्टी को एक तरह का आईना दिखाने जैसा ही है.

कांग्रेस को गहराई से ये चिंतन करना चाहिए कि साल 2014 के लोकसभा चुनाव से लेकर अब तक हिंदुओं का एक बड़ा तबका उससे आखिर कटा हुआ क्यों है और देश के सबसे बड़े सूबे उत्तर प्रदेश में पिछले तीन दशक से उसकी सियासी हालत इतनी पतली क्यों है.

ये सच है कि कांग्रेस अब तक अल्पसंख्यकों खासकर मुस्लिमों को खुश करने की राजनीति ही करती आई है लेकिन यूपी के सियासी इतिहास पर नज़र डालें, तो वहां के मुस्लिमों ने अगर दिल खोलकर उसका साथ दिया होता, तो उसकी सियासी जमीन इतनी कमजोर तो कभी न होती.

यानी यूपी के मुस्लिमों को साधने में भी कांग्रेस नाकामयाब रही है. यूपी का उदाहरण देना इसलिए जरूरी है कि इस सूबे की अधिकांश सीटें जीते बगैर किसी भी पार्टी के लिए केंद्र की सत्ता में आने का सपना देखना, दिन में तारे देखने के समान ही है.

दरअसल, पिछले इतने सालों में मुस्लिमों को खुश रखने की राजनीति करती आई कांग्रेस ने 2004 से 2014 तक लगातार दो बार सत्ता में रहने के बावजूद इस तरफ गंभीरता से कभी ध्यान ही नहीं दिया कि देश के हिंदू उससे नाराज होकर पार्टी से दूर आखिर क्यों जा रहे हैं?

निष्पक्ष होकर अगर आकलन किया जाए तो हिंदुओं को कांग्रेस से नाराज करने में दिग्विजय सिंह और मणिशंकर अय्यर जैसे नेताओं के बड़बोले बयानों का ही सबसे अधिक योगदान रहा है. मनमोहन सिंह सरकार के दौरान दिग्विजय सिंह की डिक्शनरी से निकले "भगवा आतंकवाद" जैसे शब्द ने सिर्फ हिंदूवादी संगठनों को नहीं बल्कि उदारवादी हिंदुओं के भी एक बड़े तबके को भी कांग्रेस के ख़िलाफ लामबंद कर दिया.

आतंकवाद से जुड़े मसले पर पार्टी नेताओं को कठोर रुख़ अपनाना चाहिए था, लेकिन ऐसे कई मौके देखने को मिले, जब ये नेता आतंकियों के ख़िलाफ सॉफ्ट स्टैंड लेते और सहानुभूति दिखाते रहे. चाहे वह दिल्ली के बाटला हाउस में पुलिस की आतंकियों से हुई मुठभेड़ का मामला हो या फिर कुख्यात आतंकी ओसामा बिन लादेन को संसद में "ओसामा जी" कहकर पुकारने की घटना हो. रही सही कसर मणिशंकर अय्यर ने पाकिस्तान में ये बयान देकर पूरी कर दी कि अगर नरेंद्र मोदी को भारत का प्रधानमंत्री बनने से रोकना है तो पाकिस्तान को कांग्रेस का साथ देना होगा.

ऐसे बड़बोले बयानों से ही हिंदुओं में ये संदेश गया कि कांग्रेस पाकिस्तान की गोद में बैठी हुई है और वह हिंदू विरोधी है. इस तरह के बयानों से कांग्रेस की सियासी जमीन तो भरभराने लगी लेकिन इससे मोदी लगातार मजबूत होते चले गए और 2014 के चुनाव नतीजों ने बहुसंख्य हिंदुओं ने ही उन्हें देश की सबसे बड़ी ताकत बनाते हुए ये भी साबित कर दिखाया कि मोदी ही असली हिंदू हृदय सम्राट हैं.

उन दस सालों में दिग्विजय, अय्यर जैसे नेताओ ने कभी ये भांपने की कोशिश ही नहीं की कि उनके बयानों के ख़िलाफ हिंदुओं में कितना गुस्सा है और वे कांग्रेस को सबक सिखाने के लिए किस कदर एकजुट हो रहे हैं.

दरअसल, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एके एंटनी ने केरल में पार्टी के एक कार्यक्रम में कहा है कि 2024 के आम चुनाव में बीजेपी को सत्ता से बाहर करने के लिए कांग्रेस को बहुसंख्यक समुदाय को भी अपने साथ लेना चाहिए क्‍योंकि इस लड़ाई में अल्पसंख्यक पर्याप्त नहीं होंगे. यह कहते हुए कि अल्पसंख्यकों को अपने धर्म का पालन करने की आजादी है, एंटनी ने कहा कि जब हिंदू समुदाय के लोग मंदिरों में जाते हैं या जब वे तिलक या बिंदी लगाते हैं तो उन्हें एक सॉफ्ट हिंदुत्व (Soft Hindutva) विचारधारा वाले लोगों के रूप में देखा जाता है, यह सही रणनीति नहीं है.

उन्होंने एक और अहम बात ये भी कही है कि कांग्रेस "सॉफ्ट-हिंदुत्व लाइन" पर नहीं चलेगी, उससे केवल मोदी को फायदा होगा. अब देखना ये होगा कि हिंदुत्व की लाइन लेने से कांग्रेस को सियासी फायदा होगा या फिर उसका अल्पसंख्यक वोट बैंक भी बूंदी के लड्डू की तरह बिखरकर रह जाएगा?

नोट- उपरोक्त दिए गए विचार लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं. ये जरूरी नहीं कि एबीपी न्यूज ग्रुप इससे सहमत हो. इस लेख से जुड़े सभी दावे या आपत्ति के लिए सिर्फ लेखक ही जिम्मेदार है.

View More

ओपिनियन

Sponsored Links by Taboola
25°C
New Delhi
Rain: 100mm
Humidity: 97%
Wind: WNW 47km/h

टॉप हेडलाइंस

यूजरनेम विवाद: व्हाट्सएप के बाद आईटी मंत्रालय ने अब Signal और Telegram को भेजा नोटिस
यूजरनेम विवाद: व्हाट्सएप के बाद आईटी मंत्रालय ने अब Signal और Telegram को भेजा नोटिस
Monsoon Update: पूरे यूपी पर छाया मानसून, मगर चाल सुस्त, जोर नहीं पकड़ पा रहा बारिश का सिलसिला
पूरे यूपी पर छाया मानसून, मगर चाल सुस्त, जोर नहीं पकड़ पा रहा बारिश का सिलसिला
तारक मेहता फेम शैलेश लोढ़ा की बेटी की शादी, जमकर नाचे एक्टर, सिंगिंग का भी लगाया तड़का, वीडियो
तारक मेहता फेम शैलेश लोढ़ा की बेटी की शादी, जमकर नाचे एक्टर, सिंगिंग का भी लगाया तड़का
इन 3 खिलाड़ियों को रिलीज कर सकती है चैंपियन RCB, जानें किस-किस के बाहर होने की है उम्मीद
इन 3 खिलाड़ियों को रिलीज कर सकती है चैंपियन RCB, जानें किस-किस के बाहर होने की है उम्मीद

वीडियोज

Sansani | Crime News | Ketan Murder Case: सिया के 'खूनी दिमाग' का पॉलीग्राफ टेस्ट खोलेगा राज?
Cloudburst in Jammu Kashmir | Flash Flood Video: बादल फटने से सड़कों पर आया सैलाब, यातायात ठप
Ram Mandir Donation Scam: जो जनता से हारे, 27 में श्रीराम के सहारे? | Champat Rai | Ayodhya | UP
PM Modi | Japan India Summit | Sanae Takaichi | Chaar Ki Chaal: भारत-जापान के बीच ऐतिहासिक समझौता!
Bollywood News: रूढ़िवादी या रियलिटी? फिल्म 'Toxic' में महिलाओं के चित्रण पर इंटरनेट पर छिड़ी जंग। (02-07-2026)

पर्सनल कार्नर

टॉप आर्टिकल्स
टॉप रील्स
यूजरनेम विवाद: व्हाट्सएप के बाद आईटी मंत्रालय ने अब Signal और Telegram को भेजा नोटिस
यूजरनेम विवाद: व्हाट्सएप के बाद आईटी मंत्रालय ने अब Signal और Telegram को भेजा नोटिस
Monsoon Update: पूरे यूपी पर छाया मानसून, मगर चाल सुस्त, जोर नहीं पकड़ पा रहा बारिश का सिलसिला
पूरे यूपी पर छाया मानसून, मगर चाल सुस्त, जोर नहीं पकड़ पा रहा बारिश का सिलसिला
तारक मेहता फेम शैलेश लोढ़ा की बेटी की शादी, जमकर नाचे एक्टर, सिंगिंग का भी लगाया तड़का, वीडियो
तारक मेहता फेम शैलेश लोढ़ा की बेटी की शादी, जमकर नाचे एक्टर, सिंगिंग का भी लगाया तड़का
इन 3 खिलाड़ियों को रिलीज कर सकती है चैंपियन RCB, जानें किस-किस के बाहर होने की है उम्मीद
इन 3 खिलाड़ियों को रिलीज कर सकती है चैंपियन RCB, जानें किस-किस के बाहर होने की है उम्मीद
संयुक्त अभ्यास, रणनीतिक सहयोग और समुद्री सुरक्षा… भारत दौरे पर आयीं जापान PM ताकाइची ने क्या-क्या कहा
संयुक्त अभ्यास, रणनीतिक सहयोग और समुद्री सुरक्षा… भारत दौरे पर आयीं जापान PM ने क्या-क्या कहा
'असली TMC किसकी?', ममता बनर्जी और रितब्रत बनर्जी को चुनाव आयोग का नोटिस, 6 जुलाई तक मांगा जवाब
'असली TMC किसकी?', ममता बनर्जी और रितब्रत बनर्जी को चुनाव आयोग का नोटिस, 6 जुलाई तक मांगा जवाब
Explained: NDA का 'मिशन 360' क्या? 41 सांसद जुटा लो या फिर विपक्षी सांसद रहें गायब, किस तिकड़म में उलझी बीजेपी?
NDA का 'मिशन 360' क्या? 41 सांसद जुटें या विपक्षी सांसद रहें गायब, किस तिकड़म में उलझी बीजेपी?
TRE-3 शिक्षक भर्ती: 18 महीने का NIOS D.El.Ed करने वालों की छिनेगी जॉब, शिक्षा विभाग का सख्त आदेश
TRE-3 शिक्षक भर्ती: 18 महीने का NIOS D.El.Ed करने वालों की छिनेगी जॉब, शिक्षा विभाग का सख्त आदेश
Embed widget