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चालान की टेंशन नहीं, पुराने से पुराना स्कूटर EV और हाइब्रिड में ऐसे बदलें
पुराने स्कूटर को इलेक्ट्रिक या हाइब्रिड बनाने के लिए ग्राहक को अपना पेट्रोल स्कूटर रेट्रोफिट सेंटर ले जाना होता है. यहां स्कूटर की तकनीकी स्थिति की जांच करने के बाद उसमें जरूरी बदलाव होते हैं.

ऐसे स्कूटर लगेगा नया
Source : Green Tiger
अगर आपके पास पुराना पेट्रोल स्कूटर है और आप उसे केवल इसलिए बदलना नहीं चाहते क्योंकि वह पुराना हो गया है तो आपके लिए एक नया ऑप्शन सामने आया है. अब पुराने पेट्रोल स्कूटर को इलेक्ट्रिक या हाइब्रिड स्कूटर में बदला जा सकता है. इससे पुराना स्कूटर पूरी तरह हटाने के बजाय उसे नए पावरट्रेन के साथ दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता है.
Green Tiger Mobility नाम की कंपनी पुराने पेट्रोल स्कूटर को रेट्रोफिट करके इलेक्ट्रिक या हाइब्रिड बनाने का काम कर रही है. कंपनी के मुताबिक, उसके इस कन्वर्जन सिस्टम को ARAI की मंजूरी भी मिली हुई है.
पुराने स्कूटर को कैसे बदला जाता है?
- पुराने स्कूटर को इलेक्ट्रिक या हाइब्रिड बनाने के लिए ग्राहक को अपना पेट्रोल स्कूटर कंपनी के रेट्रोफिट सेंटर पर ले जाना होता है. यहां स्कूटर की तकनीकी स्थिति की जांच करने के बाद उसमें जरूरी बदलाव किए जाते हैं.
- बेंगलुरु के Bommanahalli स्थित Green Tiger के रेट्रोफिट सेंटर में स्कूटर की करीब 130 अलग-अलग मानकों पर जांच की जाती है. इस जांच के बाद स्कूटर की स्थिति और ग्राहक की जरूरत के हिसाब से कन्वर्जन का ऑप्शन चुना जाता है.

- कंपनी पुराने स्कूटर को बाई-मोड हाइब्रिड में बदलने का ऑप्शन देती है. इस सिस्टम की खास बात यह है कि स्कूटर में पेट्रोल और इलेक्ट्रिक, दोनों मोड का इस्तेमाल किया जा सकता है.
- इसे जरूरत के हिसाब से एक बटन दबाकर पेट्रोल और इलेक्ट्रिक मोड के बीच स्विच किया जा सकता है. इसका सबसे बड़ा फायदा उन लोगों को हो सकता है जिन्हें इलेक्ट्रिक स्कूटर की रेंज को लेकर चिंता रहती है.
- अगर बैटरी में पर्याप्त चार्ज है तो शहर में इलेक्ट्रिक मोड इस्तेमाल किया जा सकता है, जबकि लंबी दूरी या जरूरत पड़ने पर पेट्रोल मोड का सहारा लिया जा सकता है.
पुराने स्कूटर को पूरी तरह EV में भी बदल सकते हैं
- अगर कोई ग्राहक पेट्रोल इंजन को पूरी तरह हटाकर अपने पुराने स्कूटर को इलेक्ट्रिक बनाना चाहता है, तो उसके लिए फुल इलेक्ट्रिक कन्वर्जन का ऑप्शन भी मौजूद है.
- इस तरह के कन्वर्जन के बाद स्कूटर बैटरी और इलेक्ट्रिक मोटर से चलता है. कंपनी के मुताबिक, इसे घर के सामान्य 5-एम्पियर सॉकेट से भी चार्ज किया जा सकता है. यानी इसके लिए जरूरी नहीं कि ग्राहक के घर में कोई अलग और महंगा चार्जिंग सेटअप लगाया जाए.

- कंपनी ने उन लोगों के लिए भी एक अलग समाधान तैयार किया है जो स्कूटर का इस्तेमाल रोजाना ज्यादा दूरी तय करने के लिए करते हैं. खास तौर पर डिलीवरी राइडर्स के लिए स्वैपेबल बैटरी सिस्टम का ऑप्शन दिया गया है.
- अगर कोई राइडर रोजाना करीब 100 से 150 किलोमीटर तक स्कूटर चलाता है, तो बैटरी खत्म होने पर उसे कई घंटे तक चार्जिंग का इंतजार नहीं करना पड़ेगा. इसके बजाय खाली बैटरी को निकालकर पहले से चार्ज की गई दूसरी बैटरी लगाई जा सकती है. इससे स्कूटर को जल्दी से दोबारा सड़क पर उतारा जा सकता है.
बैटरी स्वैपिंग के लिए कई कंपनियों के साथ काम
- Green Tiger ने इस बैटरी स्वैपिंग सिस्टम के लिए Indofast Energy, Indian Oil, Sun Mobility और Battery Smart जैसी कंपनियों के साथ काम किया है. इसका उद्देश्य खास तौर पर ज्यादा किलोमीटर चलने वाले कमर्शियल और डिलीवरी वाहनों के लिए डाउनटाइम कम करना है.
- साधारण भाषा में समझें तो निजी ग्राहक के लिए घर पर स्कूटर चार्ज करना सुविधाजनक हो सकता है, जबकि डिलीवरी राइडर जैसे ज्यादा चलने वाले लोगों के लिए बैटरी बदलना समय बचाने वाला ऑप्शन बन सकता है.
ARAI से मिली मंजूरी क्यों जरूरी?
- इस पूरे कन्वर्जन में ARAI की मंजूरी सबसे महत्वपूर्ण बातों में से एक है. ARAI यानी Automotive Research Association of India भारत में वाहनों और ऑटोमोटिव तकनीक की टेस्टिंग और प्रमाणन से जुड़ी प्रमुख संस्था है.
- कंपनी का कहना है कि उसका रेट्रोफिट समाधान ARAI से अप्रूव्ड है. इसका मतलब यह है कि पुराने पेट्रोल स्कूटर को इलेक्ट्रिक बनाने के बजाय एक प्रमाणित रेट्रोफिट समाधान के जरिए बदलने का ऑप्शन मौजूद है. हालांकि, किसी गाड़ी को सड़क पर चलाने से पहले उसके दस्तावेज, रजिस्ट्रेशन और स्थानीय नियमों की आवश्यकताओं को भी पूरा करना जरूरी है.
- Green Tiger Mobility के मुताबिक, उसके इलेक्ट्रिक में बदले गए वाहनों ने अब तक कुल मिलाकर 1.5 लाख किलोमीटर से ज्यादा दूरी तय की है. कंपनी के पास रेट्रोफिट और पावर इलेक्ट्रॉनिक्स तकनीक से जुड़े छह मंजूर पेटेंट भी हैं.
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