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Captain Smit Machchhar: हमले के बीच पढ़ते रहे हनुमान चालीसा, संकट में हनुमान जी ही क्यों आते हैं याद?

कॉकपिट में हमले के बीच कैप्टन स्मित मच्छार हनुमान चालीसा पढ़ते रहे. जानें डर और संकट में हनुमान जी को ही क्यों याद किया जाता है और क्यों उन्हें संकटमोचन कहते हैं.

कॉकपिट में हमला हो चुका था. भारतीय कैप्टन स्मित माछर घायल थे. विमान हवा में था और हर सेकंड कीमती था. लेकिन इस पूरी घटना के बीच एक चीज लगातार उनके साथ थी... हनुमान चालीसा.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बातचीत में स्मित ने खुद बताया कि दर्द और मुश्किल वक्त में वे हनुमान चालीसा पढ़ते हैं. उस दिन भी पढ़ रहे थे. अब जरा इस बात को कैप्टन स्मित से आगे समझते हैं.

भारत में किसी बच्चे को रात में डर लगे तो अक्सर कहा जाता है कि हनुमान जी का नाम लो. घर से लंबा सफर शुरू हो, कोई बड़ी परेशानी आ जाए या मन में अनजाना डर बैठ जाए, हनुमान चालीसा याद आने लगती है.

लेकिन कृष्ण, शिव और राम की पूजा भी घर-घर होती है. फिर डर और संकट के समय हनुमान जी से यह रिश्ता इतना गहरा कैसे बन गया?

हनुमान चालीसा में बार-बार आता है डर, पीड़ा और संकट

इसका एक जवाब हनुमान चालीसा के भीतर ही छिपा है.

भूत पिशाच निकट नहिं आवै.  
महाबीर जब नाम सुनावै॥

फिर आता है-

नासै रोग हरै सब पीरा.  
जपत निरंतर हनुमत बीरा॥

और आगे तुलसीदास लिखते हैं-

संकट तें हनुमान छुड़ावै.  
मन क्रम वचन ध्यान जो लावै॥

यानी हनुमान चालीसा में हनुमान जी की छवि केवल बलवान देवता की नहीं है. उनके साथ डर से रक्षा, पीड़ा और संकट से निकलने का भाव भी लगातार जुड़ा है. यही बात पीढ़ी-दर-पीढ़ी लोगों के मन में बैठती चली गई.

रामायण में भी हनुमान तब आए, जब रास्ता आसान नहीं था

सीता जी की खोज में रुकावट आ गई तो सामने समुद्र था. हनुमान जी उसे पार कर गए. लंका में वे अकेले थे. फिर भी सीता जी तक पहुंचे. लक्ष्मण जी के प्राणों पर संकट आया और समय बहुत कम था. संजीवनी लाने की जिम्मेदारी भी हनुमान जी पर आई.

इन प्रसंगों में एक बात समान है. हनुमान जी संकट देखकर रुकते नहीं हैं. वे तुरंत काम में लगते हैं. शायद यही वजह है कि घरों में उनकी कहानी केवल भगवान की कहानी बनकर नहीं रही. वह डर के समय हिम्मत रखने की सीख भी बन गई.

पूरी चालीसा याद न हो, फिर भी बजरंगबली याद आ जाते हैं

यह हिस्सा और दिलचस्प है. कई लोगों को हनुमान चालीसा की सभी चौपाइयां याद नहीं होंगी. लेकिन अचानक डर लगने पर जय बजरंगबली या हनुमान जी रक्षा करना जैसे शब्द अपने आप निकल जाते हैं. क्यों?

क्योंकि हम संकट आने के बाद पहली बार यह रिश्ता नहीं बनाते. इसकी शुरुआत बहुत पहले हो चुकी होती है. बचपन की कहानियों से. मंगलवार की पूजा से. घर में किसी बड़े को हनुमान चालीसा पढ़ते देखने से. डर लगने पर मां-दादी से सुनी बातों से. वही याद मुश्किल समय में फिर सामने आ सकती है.

कैप्टन स्मित के मामले में भी इसका एक संकेत मिलता है. उनके पिता ने मीडिया से बातचीत में परिवार में हनुमान चालीसा के पाठ की पुरानी परंपरा का जिक्र किया है.

तो क्या हनुमान चालीसा ने उन्हें बचाया?

बात को यहां साफ रखना जरूरी है. कैप्टन स्मित एक अनुभवी पायलट हैं. उस मुश्किल स्थिति में उनकी ट्रेनिंग, सूझबूझ और फैसले अहम थे.  लेकिन स्मित के अपने शब्द बताते हैं कि उस बेहद मुश्किल वक्त में उनकी आस्था उनके साथ थी.

और शायद इसी में उस सवाल का जवाब भी है कि संकट में हनुमान जी इतनी जल्दी क्यों याद आते हैं. क्योंकि पीढ़ियों से हनुमान जी की पहचान उस देवता की रही है, जो संकट देखकर पीछे नहीं हटते.

कैप्टन स्मित के सामने भी संकट था. हनुमान चालीसा उनके मन में थी. लेकिन आखिर में उन्हें वही करना था, जो उस समय सबसे जरूरी था, डटे रहना.

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

हृदेश कुमार सिंह । Hirdesh Kumar Singh 

Senior Vedic Astrologer । Head – Religion & Astrology, ABP Live । Lead – ABP Dharma LIVE

हृदेश कुमार सिंह वरिष्ठ वैदिक ज्योतिषाचार्य और मीडिया पेशेवर हैं. उन्हें ज्योतिष, धर्म और मीडिया के क्षेत्र में 17 साल से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वे ABP Live में Religion & Astrology वर्टिकल का नेतृत्व करते हैं. साथ ही ABP Dharma LIVE की कंटेंट और डिजिटल रणनीति की जिम्मेदारी संभालते हैं.

उनके काम में ज्योतिषीय लेखन, संपादन, वेबसाइट और वीडियो के लिए विषय चयन तथा संपादकीय योजना शामिल है. वे Search, Google Discover और सोशल मीडिया पर पाठकों की रुचि को ध्यान में रखकर धर्म और ज्योतिष की कवरेज तय करते हैं.

पंचांग, राशिफल, ग्रह गोचर, व्रत-त्योहार और धार्मिक परंपराएं उनके लेखन के प्रमुख विषय हैं. वे करियर, विवाह, शिक्षा और व्यापार से जुड़े सवालों पर भी लिखते हैं. राजनीति और सामाजिक घटनाओं पर उनके ज्योतिषीय विश्लेषण वैदिक गणना, गोचर और मेदिनी ज्योतिष पर आधारित होते हैं. इनमें ग्रह स्थितियों को संभावित संकेतों के रूप में प्रस्तुत किया जाता है.

उन्होंने Indian Institute of Mass Communication (IIMC), नई दिल्ली से पत्रकारिता और IIMT University, मेरठ से ज्योतिष शास्त्र एवं वास्तु शास्त्र की शिक्षा ग्रहण की है. वे AstroSage और Astrotalk जैसे प्लेटफॉर्म के साथ भी काम कर चुके हैं. उन्होंने Semrush Academy से 'Content Marketing Essentials for SEO and AI Search with Semrush' सर्टिफिकेशन प्राप्त किया है.

नई पीढ़ी के पाठकों के लिए उन्होंने 'Gen-Z Horoscope' जैसे प्रारूप पर काम किया है. इसमें पढ़ाई, नौकरी, रिश्तों और रोजमर्रा के फैसलों से जुड़े सवालों को राशिफल में जगह दी गई है. उनके लेख धार्मिक परंपराओं से जुड़े उन प्रश्नों पर भी केंद्रित होते हैं, जो बदलती जीवनशैली में सामने आते हैं.

वैदिक ज्योतिष, होरा शास्त्र, संहिता, मेदिनी ज्योतिष, अंक ज्योतिष, शकुन शास्त्र और वास्तु उनके अध्ययन एवं लेखन के विषय हैं. उनका मानना है, 'ज्योतिष केवल भविष्य बताने की विद्या नहीं, बल्कि समय को समझने की कला है.'

ज्योतिष और मीडिया के अलावा उन्हें सिनेमा, संगीत, साहित्य, राजनीति, पर्यावरण, ग्रामीण जीवन और यात्राओं में विशेष रुचि है.

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