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किसान से बिजनेस वूमेन तक का सफर, बिहार की रंजू प्रकाश कमा रहीं लाखों

घर की छत से शुरू हुआ एक मामूली सा देसी आइडिया लाखों के बिजनेस में बदला. बिहार की इस महिला ने करके दिखाया ऐसा कमाल. जानें किसान से बिजनेस वूमेन बनी रंजू प्रकाश की प्रेरक कहानी.

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  • रंजू प्रकाश ने छत पर ऑर्गेनिक सब्जियां उगाना शुरू किया.
  • केवीके मुंगेर की मदद से आधुनिक खेती की बारीकियां सीखीं.
  • अचार बनाकर लाखों का सफल कारोबार बनाया.

बिहार के मुंगेर जिले के हवेली खड़गपुर की रहने वाली श्रीमती रंजू प्रकाश ने यह साबित कर दिखाया है कि अगर आप ईमानदारी से मेहनत करें और नए तरीके आजमाएं तो अच्छी कमाई की जा सकती है. एक आम घरेलू महिला किसान से सफल बिजनेस वूमेन बनने का उनका यह सफर आज लाखों महिलाओं के लिए प्रेरणा बन चुका है. साल 2020 में उन्होंने अपने घर की छत पर रीसाइकल्ड थर्माकोल के डिब्बों में आर्गेनिक सब्जियां उगाने का छोटा सा प्रयोग शुरू किया था. 

आज वही पहल एक बड़े अर्बन फार्मिंग और फूड प्रोसेसिंग वेंचर का रूप ले चुकी है. छत पर उगाई गई ताजी उपज को सीधे बेचने के बजाय उन्होंने उसका वैल्यू एडिशन किया और होममेड अचार का ब्रांड खड़ा कर दिया. घर की चारदीवारी से निकलकर लाखों का टर्नओवर हासिल करने वाली रंजू प्रकाश की यह सफलता दिखाती है कि मॉडर्न फार्मिंग तकनीकों और स्मार्ट मार्केटिंग के तरीकों से कम जगह में भी बड़ा बिजनेस खड़ा किया जा सकता है. जान लीजिए पूरी खबर.

10 थर्माकोल बॉक्स से 150 तक का सफर

रंजू प्रकाश का यह ग्रीन मॉडल साल 2020 में महज 10 वेस्ट थर्माकोल बॉक्स से शुरू हुआ था. उन्होंने बाजार में फेंके जाने वाले डिब्बों को रीसायकल किया और अपनी छत को एक उत्पादक अर्बन फार्म में तब्दील करना शुरू कर दिया. धीरे-धीरे उनकी लगन रंग लाई और आज उनकी छत पर 150 से ज्यादा थर्माकोल बॉक्स में हरी-भरी सब्जियां लहलहा रही हैं. उन्होंने अपनी रूफटॉप स्पेस का ऐसा शानदार मैनेजमेंट किया कि छत पर वजन भी न बढ़े और हर मौसम में ताजी हरी सब्जियां मिलती रहें. 

इस रूफटॉप किचन गार्डन ने न केवल उनके परिवार को पूरी तरह से केमिकल-फ्री और पौष्टिक सब्जियां दीं. बल्कि एक मजबूत सप्लाई बेस भी तैयार कर दिया. थोड़े से इनवेस्टमेंट और कबाड़ के सही इस्तेमाल से खड़ा हुआ यह माइक्रो-फार्म आज साबित करता है कि शहर हो या गांव आपकी छत ही आपके लिए अच्छा कमाई का जरिया बन सकता है.


किसान से बिजनेस वूमेन तक का सफर, बिहार की रंजू प्रकाश कमा रहीं लाखों

केवीके मुंगेर की तकनीकी का साथ 

रंजू प्रकाश की इस बिजनेस जर्नी में आईसीएआर-कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) मुंगेर ने बेहद अहम भूमिका निभाई है. केवीके के वैज्ञानिकों ने रंजू जी को मॉडर्न अर्बन फार्मिंग की बारीकियों से जोड़ा. उन्हें थर्माकोल बॉक्स के लिए सही सॉइल मिक्स, कोकोपीट का बैलेंस और न्यूट्रिएंट मैनेजमेंट की ट्रेनिंग दी गई जिससे पौधों को कम मिट्टी में भी भरपूर खुराक मिले. 

इसके अलावा वैज्ञानिकों ने उन्हें प्रैक्टिकल फील्ड विजिट्स करवाईं. जिससे उन्हें दूसरे सफल एग्री-बिजनेस मॉडल्स को करीब से समझने का मौका मिला. वर्कशॉप्स और डेमो सेशंस ने उनके कॉन्फिडेंस को बढ़ाया और उन्हें केवल खेती तक लिमिटेड न रहकर प्रोसेसिंग यूनिट लगाने की मेटिवेशन मिली. जिससे उनके काम का तरीका और भी बेहतर हुआ. 

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ऐसे खड़ा किया अच्छा बिजनेस

रंजू प्रकाश ने सिर्फ कच्ची सब्जियां बेचकर ही कमाई नहीं की है. बल्कि उन्होंने वैल्यू एडिशन करके भी अच्छी कमाई की है. उन्होंने छत पर उगने वाली ताजी सब्जियों से पारंपरिक तरीके से स्वादिष्ट और शुद्ध अचार तैयार करना शुरू किया. बिना किसी केमिकल और प्रिजर्वेटिव्स के तैयार इस होममेड अचार का स्वाद लोगों की जुबान पर ऐसा चढ़ा कि ऑर्डर्स की लाइन लग गई. 


किसान से बिजनेस वूमेन तक का सफर, बिहार की रंजू प्रकाश कमा रहीं लाखों

वैल्यू एडेड प्रोडक्ट्स के दम पर आज उनका यह काम एक प्रॉफिटेबल बिजनेस का रूप ले चुका है. जिससे वे सालाना लाखों की कमाई कर रही हैं. अपनी मेहनत से उन्होंने न केवल खुद को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाया. बल्कि आसपास की कई महिलाओं को भी अपने साथ जोड़कर रोजगार के अवसर दिए हैं. रंजू जी का यह सफर बताता है कि सही सोच और वैल्यू एडिशन से कोई भी महिला घर बैठे बड़ी कामयाबी हासिल कर सकती है.

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About the author नीलेश ओझा

नीलेश ओझा पिछले पांच साल से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उनकी लेखन शैली में तथ्यों की सटीकता और इंसानी नजरिए की गहराई दोनों साथ-साथ चलती हैं.पत्रकारिता उनके लिए महज़ खबरें इकट्ठा करने या तेजी से लिखने का काम नहीं है. वह मानते हैं कि हर स्टोरी के पीछे एक सोच होनी चाहिए.  

कुछ ऐसा जो पाठक को सिर्फ जानकारी न दे बल्कि सोचने के लिए भी मजबूर करे. यही वजह है कि उनकी स्टोरीज़ में भाषा साफ़ होती है.लिखने-पढ़ने का शौक बचपन से रहा है. स्कूल की नोटबुक से शुरू हुआ यह सफर धीरे-धीरे पेशेवर लेखन और पत्रकारिता तक पहुंचा. आज भी उनके लिए लेखन सिर्फ पेशा नहीं है यह खुद को समझने और दुनिया से संवाद करने का ज़रिया है.

पत्रकारिता के अलावा वह साहित्य और समकालीन शायरी से भी गहराई से जुड़े हुए हैं. कभी भीड़ में तो कभी अकेले में ख्यालों को शायरी की शक्ल देते रहते हैं. उनका मानना है कि पत्रकारिता का काम सिर्फ घटनाएं गिनाना नहीं है. बल्कि पाठक को उस तस्वीर के उन हिस्सों तक ले जाना है. जो अक्सर नजरों से छूट जाते हैं.

उन्होंने स्पोर्ट्सविकी, क्रिकेट एडिक्टर, इनशॉर्ट्स और जी हिंदुस्तान जैसे प्रमुख प्लेटफॉर्म्स के साथ काम किया है.

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