क्या बारिश से भीग गया धान, जानें मंडी में अब कैसे मिलेगा सही दाम?
बेमौसम बारिश के कारण खेतों धान भीगने से किसानों की चिंता बढ़ गई है; आइए जानते हैं कि इस नमी वाले धान को नुकसान से बचाने और सरकारी खरीद केंद्रों पर इसका सही सरकारी दाम पाने के क्या उपाय हैं

अक्टूबर का महीना आते ही देश की अनाज मंडियों में धान की आवक तेजी से बढ़ने लगती है, लेकिन इसी समय मानसून की विदाई और अचानक होने वाली बेमौसम बारिश किसानों की पूरी मेहनत पर पानी फेर देती है. पिछले कुछ दिनों में उत्तर भारत समेत कई राज्यों की मंडियों में खुले में रखा लाखों क्विंटल धान अचानक हुई मूसलाधार बारिश की वजह से भीग गया है. ऐसी स्थिति में किसानों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह खड़ी हो जाती है कि भीगे हुए धान को मंडी में सही दाम पर कैसे बेचा जाए.
चूंकि सरकारी खरीद केंद्रों पर फसल बेचने के बेहद कड़े नियम होते हैं, इसलिए जरा सी लापरवाही के कारण किसानों को अपनी फसल कम दामों में बिचौलियों या प्राइवेट व्यापारियों को बेचनी पड़ती है. आइए जानते हैं कि बारिश से धान भीगने के बाद मंडी में सही कीमत पाने के लिए आपको कौन से जरूरी कदम उठाने चाहिए.
सरकारी खरीद के लिए 17 प्रतिशत नमी का कड़ा नियम
मंडियों में धान की सरकारी खरीद के लिए सरकार ने बेहद सख्त मानक तय किए हैं, जिन्हें फेयर एवरेज क्वालिटी (FAQ) नॉर्म्स कहा जाता है. इन नियमों के तहत मंडी या सरकारी क्रय केंद्र पर केवल वही धान न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदा जाता है, जिसमें नमी का स्तर अधिकतम 17 प्रतिशत तक होता है. यदि बारिश के कारण आपके धान में नमी का प्रतिशत 17 से ज्यादा हो जाता है, तो सरकारी एजेंसियां उसे तोलने से साफ मना कर देती हैं.
भीगे धान को वापस लौटाने या कटौती से कैसे बचें?
यदि आपकी फसल कटाई के दौरान या मंडी में लाने के बाद अचानक हुई बारिश से भीग गई है, तो उसे सीधे तौर पर बेचने की गलती कभी न करें. नमी अधिक होने की स्थिति में या तो सरकारी केंद्र आपकी फसल को पूरी तरह वापस लौटा देगा या फिर प्रति क्विंटल वजन में भारी कटौती कर दी जाएगी.
इस नुकसान से बचने का सबसे सटीक तरीका यह है कि धान को मंडी के चबूतरे में कम से कम 2 से 3 दिनों तक तेज धूप में अच्छी तरह फैलाकर सुखाएं. सुखाते समय धान की ढेरी को बीच-बीच में उलटते-पलटते रहें, ताकि नीचे दबी नमी भी पूरी तरह उड़ जाए और फसल का मॉइस्चर लेवल वापस 17 प्रतिशत के सुरक्षित दायरे में आ सके.
कंबाइन मशीन से कटाई के समय का रखें ध्यान
बारिश के मौसम में धान की गुणवत्ता को बनाए रखने और उसमें प्राकृतिक नमी को बढ़ने से रोकने के लिए कृषि विशेषज्ञों और जिला प्रशासनों द्वारा कड़े दिशा-निर्देश जारी किए जाते हैं. किसानों को सलाह दी जाती है कि वे शाम 6:00 बजे से लेकर सुबह 10:00 बजे के बीच कंबाइन मशीनों से धान की कटाई पूरी तरह बंद रखें.
दरअसल, रात के समय और सुबह के शुरुआती घंटों में हवा में ओस और नमी की मात्रा बहुत ज्यादा होती है. यदि इस समय फसल काटी जाती है, तो बिना बारिश के भी धान में मॉइस्चर का लेवल बढ़ जाता है, जो बाद में मंडी में बिक्री के समय बड़ी रुकावट बनता है.
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एमएसपी का पूरा लाभ उठाने के लिए पंजीकरण जरूरी
सरकार ने खरीफ सीजन 2024-25 के लिए सामान्य धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य MSP 2300 रुपये प्रति क्विंटल और ग्रेड-ए धान का रेट 2320 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है. इस तय सरकारी रेट पर अपनी फसल बेचने के लिए किसानों का अपनी स्थानीय सहकारी समिति या कृषि पोर्टल पर एडवांस पंजीकरण होना अनिवार्य है. इसलिए पूरी तरह सुखाए गए धान को ही अपने पंजीकृत केंद्र पर ले जाएं, जहां सरकार द्वारा फसल बेचने के महज 24 घंटे के भीतर सीधा आपके बैंक खाते में भुगतान सुनिश्चित किया जा रहा है.
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