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अपने किचन गार्डन में ऐसे उगाएं सफेद बैंगन, खत्म हो जाएगी सब्जी की टेंशन

अपने घर के किचन गार्डन में आसान तरीके से उगाएं सेहतमंद सफेद बैंगन, जिससे बाजार से सब्जी खरीदने का झंझट होगा खत्म और सालभर मिलेगी तरोताजा और केमिकल-मुक्त सब्जी.

आजकल लोग अपने घरों की छतों, बालकनी या किचन गार्डन में जैविक सब्जियां उगाना काफी पसंद कर रहे हैं. घर की उगाई ताजी सब्जियों का स्वाद और शुद्धता बाजार की केमिकल वाली सब्जियों से कहीं बेहतर होती है. अगर आप भी अपने किचन गार्डन में कोई ऐसी सब्जी उगाना चाहते हैं जो आसानी से लग जाए और लगातार पैदावार दे तो सफेद बैंगन एक बेहतरीन विकल्प है.

सफेद बैंगन न सिर्फ देखने में खूबसूरत लगते हैं बल्कि सेहत के लिए भी बहुत फायदेमंद होते हैं. इसे अपने घर पर उगाना बेहद आसान है और एक बार पौधा बड़ा हो जाने पर आपकी घर की सब्जी की टेंशन हमेशा के लिए खत्म हो जाएगी.

सफेद बैंगन उगाने के लिए सही समय और मिट्टी

सफेद बैंगन उगाने के लिए सबसे अच्छा समय फरवरी से मार्च और जून से जुलाई का महीना माना जाता है. वैसे इसे साल के किसी भी महीने में उगाया जा सकता है, बशर्ते बहुत ज्यादा कड़ाके की ठंड न हो. इसे गमले या ग्रो बैग में उगाने के लिए मिट्टी तैयार करते समय खास ध्यान रखें.

सामान्य मिट्टी में 40% पुरानी गोबर की खाद या वर्मीकंपोस्ट और 10% कोकोपीट मिलाएं. इस मिश्रण से मिट्टी उपजाऊ और भुरभुरी बनती है, जिससे पौधे की जड़ों का विकास बहुत तेजी से होता है. जल निकासी के लिए गमले के नीचे एक छोटा छेद जरूर रखें.

बीज से ऐसे तैयार करें छोटे पौधे

सफेद बैंगन को सीधे बड़े गमले में लगाने के बजाय पहले उसकी पौध तैयार की जाती है. किसी छोटी ट्रे या छोटे डिस्पोजेबल कप में तैयार मिट्टी भरें और सफेद बैंगन के बीजों को आधा इंच की गहराई पर बो दें. इसके बाद स्प्रे बोतल से हल्का पानी दें और इसे ऐसी जगह रखें जहां हल्की धूप आती हो. करीब 6 से 10 दिनों के भीतर बीज अंकुरित होकर बाहर आ जाते हैं. जब यह छोटे पौधे लगभग 4 से 5 इंच के हो जाएं और इनमें 4-5 पत्तियां निकल आएं, तब इन्हें बड़े गमले में सावधानी से शिफ्ट कर दें.

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धूप और पानी का सही संतुलन है जरूरी

बैंगन के पौधे को फलने-फूलने के लिए अच्छी धूप की जरूरत होती है. इसलिए अपने गमले को किचन गार्डन या छत के उस हिस्से में रखें, जहां रोजाना कम से कम 5 से 6 घंटे की सीधी और अच्छी धूप आती हो. छांव में रखने पर पौधे की ग्रोथ रुक जाएगी और उसमें फूल नहीं आएंगे. पानी देते समय इस बात का ख्याल रखें कि मिट्टी में हमेशा हल्की नमी बनी रहे, लेकिन गमले में पानी जमा नहीं होना चाहिए. ज्यादा पानी देने से जड़ें सड़ सकती हैं और पत्तियां पीली होकर गिर सकती हैं. गर्मियों के दिनों में रोज सुबह या शाम को पानी दें, जबकि सर्दियों में जरूरत के अनुसार ही पानी डालें.

अधिक फल पाने के लिए पिंचिंग और जैविक खाद

जब पौधे में फूल आने लगें, तो हर 15 से 20 दिनों में मिट्टी की हल्की गुड़ाई करके एक-दो मुट्ठी गोबर की खाद या नीम खली डालें. नीम खली डालने से मिट्टी में कीड़े नहीं लगते. बैंगन के पौधों में अक्सर कीटों या सफेद मक्खियों का हमला होता है. इससे बचने के लिए किसी भी केमिकल कीटनाशक का इस्तेमाल न करें. आप घर पर ही नीम के तेल को पानी में मिलाकर हर हफ्ते पौधे पर स्प्रे करें. इससे पौधा पूरी तरह सुरक्षित रहेगा.

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मनस्वी चौहान एबीपी नेटवर्क के साथ इंटर्न के तौर पर काम कर रही हैं, जहां वह एग्रीकल्चर बीट पर खबरें लिखती हैं. खेती, किसानों और एग्रीकल्चर से जुड़ी स्टोरीज लिखते हुए उनकी कोशिश रहती है कि खबर की जानकारी आसान और साफ भाषा में लोगों तक पहुंचे.

मनस्वी अपने कॉलेज की मीडिया टीम का हिस्सा रह चुकी हैं. इस दौरान उन्हें लाइव इवेंट्स की कवरेज, एंकरिंग और रिपोर्टिंग का मौका प्राप्त हुआ. यहां उन्हें खबरों पर रिसर्च करने, कंटेंट लिखने और किसी स्टोरी को सही तरीके से लोगों तक पहुंचाने का एक्सपीरियंस मिला.

पढ़ाई की बात करें तो मनस्वी मंदसौर यूनिवर्सिटी से Bachelor’s in Journalism and Mass Communication की पढ़ाई कर रही हैं. राइटिंग और मीडिया में लगातार कुछ नया सीखते हुए वह अपनी राइटिंग को और बेहतर बनाने पर काम कर रही हैं.

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