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आंधी आए या बरसे आग, ये फसलें कभी नहीं होंगी खराब, यहां जानिए उनके नाम

Farming Tips: मौसम के बदलते मिजाज और भीषण गर्मी के बीच किसान भाई ऐसी मजबूत फसलों को चुनते हैं. जो आंधी-तूफान और सूखे को भी आसानी से झेल जाती हैं. जान लीजिए इनके नाम.

Farming Tips: आजकल मौसम का मिजाज जिस तेजी से बदल रहा है. कई जगहों पर भयंकर गर्मी पड़ रही है तो कई जगहों पर आंधी-तूफान आ रहा है. जिसने किसानों की चिंता काफी बढ़ा दी है. ऐसे बिगड़ते मौसम में पारंपरिक फसलों में भारी नुकसान का खतरा हमेशा बना रहता है. लेकिन इस समस्या का एक बहुत ही शानदार समाधान है. 

और वो है ऐसी फसलों चुनना जो हर तरह के मौसम की मार को आसानी से झेल सकें. कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार, कुछ ऐसी मजबूत फसलें हैं जिन्हें न तो तेज आंधी का डर होता है और न ही भीषण गर्मी का. इन फसलों को अपने खेतों में लगाकर आप मौसम के रिस्क को पूरी तरह खत्म कर सकते हैं. जानें लें इनकी पूरी जानकारी.

गर्मी और सूखे को मात देने वाली फसलें

अगर आपके इलाके में पानी की कमी है या गर्मियों में तापमान बहुत हाई रहता है. तो मोटे अनाज यानी मिलेट्स आपके लिए सबसे बेस्ट ऑप्शन हैं. इसमें बाजरा, ज्वार, रागी और कंगनी जैसी फसलें शामिल हैं. इन फसलों की जड़ें जमीन में काफी गहराई तक जाती हैं जिससे ये बेहद कम पानी में भी हरी-भरी रहती हैं. 

आसमान से कितनी भी आग बरसे इनकी सेहत पर कोई खास असर नहीं पड़ता. इसके अलावा दलहन फसलों में मूंग और ग्वार ऐसी श्रेणियां हैं जो तेज धूप को सह करके भी बढ़िया पैदावार देती हैं. इन फसलों की सबसे अच्छी बात यह है कि इनमें लागत बहुत कम आती है और मुश्किल हालातों में भी ये किसानों को कभी निराश नहीं करतीं.

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तेज आंधी और चक्रवात वाली फसलें

मौसम खराब होने पर सबसे ज्यादा नुकसान उन फसलों का होता है जो लंबाई में बड़ी और कमजोर होती हैं. आंधी के खतरे से बचने के लिए किसान भाई कम ऊंचाई वाली या जमीन पर फैलने वाली फसलें चुन सकते हैं. जैसे कंद वाली फसलें यानी शकरकंद, अरबी, अदरक और हल्दी जमीन के नीचे सुरक्षित रहती हैं.

इसलिए ऊपर चाहे कितनी भी तेज आंधी आए इन्हें कोई नुकसान नहीं पहुंचता. वहीं सब्जियों की बात करें तो कद्दू, लौकी और तरोई जैसी बेल वाली फसलें जिन्हें मचान के बजाय जमीन पर फैलाकर उगाया जाए वह तेज हवाओं में भी पूरी तरह सुरक्षित रहती हैं. इन फसलों को चक्रवात या अंधड़ का कोई डर नहीं होता.

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About the author नीलेश ओझा

नीलेश ओझा पिछले पांच साल से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उनकी लेखन शैली में तथ्यों की सटीकता और इंसानी नजरिए की गहराई दोनों साथ-साथ चलती हैं.पत्रकारिता उनके लिए महज़ खबरें इकट्ठा करने या तेजी से लिखने का काम नहीं है. वह मानते हैं कि हर स्टोरी के पीछे एक सोच होनी चाहिए.  

कुछ ऐसा जो पाठक को सिर्फ जानकारी न दे बल्कि सोचने के लिए भी मजबूर करे. यही वजह है कि उनकी स्टोरीज़ में भाषा साफ़ होती है.लिखने-पढ़ने का शौक बचपन से रहा है. स्कूल की नोटबुक से शुरू हुआ यह सफर धीरे-धीरे पेशेवर लेखन और पत्रकारिता तक पहुंचा. आज भी उनके लिए लेखन सिर्फ पेशा नहीं है यह खुद को समझने और दुनिया से संवाद करने का ज़रिया है.

पत्रकारिता के अलावा वह साहित्य और समकालीन शायरी से भी गहराई से जुड़े हुए हैं. कभी भीड़ में तो कभी अकेले में ख्यालों को शायरी की शक्ल देते रहते हैं. उनका मानना है कि पत्रकारिता का काम सिर्फ घटनाएं गिनाना नहीं है. बल्कि पाठक को उस तस्वीर के उन हिस्सों तक ले जाना है. जो अक्सर नजरों से छूट जाते हैं.

उन्होंने स्पोर्ट्सविकी, क्रिकेट एडिक्टर, इनशॉर्ट्स और जी हिंदुस्तान जैसे प्रमुख प्लेटफॉर्म्स के साथ काम किया है.

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