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खेती पर नहीं पड़ेगा मौसम का असर, अपनाएं ये तकनीक

बेमौसम बारिश, सूखा या भयंकर गर्मी से फसलों के बर्बाद होने का डर अब हमेशा के लिए खत्म. किसान खेत में एक स्मार्ट तकनीक अपनाकर मौसम की मार से बच सकते हैं और 12 महीने पक्का मुनाफा कमा सकते हैं.

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  • एकीकृत कृषि मॉडल मौसम की मार से बचाता है.
  • इसमें एक ही जमीन पर अलग-अलग तरीकों से खेती आय बढ़ती है.
  • पॉलीहाउस, मल्टीलेयर तकनीक से से फसल सुरक्षित रहती है.

खेती में अच्छी फसल और बंपर पैदावार के लिए मौसम का किसानों के हित में होना बहुत जरूरी है. कई बार मौसम किसानों पर मेहरबान होता है और समय पर बारिश से खेत लहलहा उठते हैं. तो कई बार यही मौसम उनका सबसे बड़ा दुश्मन भी बन जाता है. कभी सूखा, कभी बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से पूरी मेहनत पर पानी फिर जाता है. ऐसे में पुराने तरीकों से सिर्फ एक फसल को उगाना किसानों के लिए फायदेमंद नहीं है

अब खेती में एक नया बदलाव आ रहा है. जिससे किसान मौसम की मार से पूरी तरह बच रहे हैं. इस बेहतरीन तकनीक का नाम है क्लाइमेट स्मार्ट इंटीग्रेटेड फार्मिंग सिस्टम यानी एकीकृत कृषि मॉडल. यूपी के कई इलाकों के किसान इस तकनीक को अपनाकर अच्छी कमाई कर रहे हैं.  अगर आप भी मौसम के होने वाले नुकसान के डर को कम करना चाहते हैं. तो खेती का यह तरीका अपना लें.

क्या है क्लाइमेट स्मार्ट इंटीग्रेटेड फार्मिंग मॉडल?

इंटीग्रेटेड फार्मिंग को आसान भाषा में समझें तो इसका मतलब है एक ही जमीन पर खेती से जुड़े कई काम साथ-साथ करना. इसमें किसान सिर्फ गेहूं और धान जैसी फसलों के भरोसे ही नहीं रहते. बल्कि खेत के हिसाब से सब्जियां, फल, डेयरी, मछली पालन या मुर्गी पालन भी जोड़ सकता है. इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि अगर मौसम की वजह से एक फसल को नुकसान होता है. तो बाकी कामों से कमाई जारी रहती है. 

से तेज बारिश से अनाज की फसल खराब हो गई तो सब्जियों, दूध, अंडे और दूसरी चीजों से आमदनी मिल सकती है. इस मॉडल में एक काम से निकलने वाली चीज दूसरे काम में इस्तेमाल हो जाती है. पशुओं का गोबर खेत के लिए खाद बन सकता है. जबकि फसल के कुछ हिस्से पशुओं के चारे के काम आ सकते हैं. इससे खेती का खर्च घटता है और जमीन की सेहत भी बेहतर बनी रहती है.


खेती पर नहीं पड़ेगा मौसम का असर, अपनाएं ये तकनीक

मल्टी-लेयर और पॉलीहाउस तकनीक से डबल फायदा

मौसम का मिजाज लगातार बदल रहा है और इसका सीधा असर खेती पर भी देखने को मिल रहा है. ऐसे में किसान अब फसलों को मौसम की मार से बचाने के लिए पॉलीहाउस, शेडनेट और मल्टी लेयर खेती जैसी तकनीकों का सहारा ले रहे हैं. कई किसानों ने इन तरीकों को अपनाकर ऑफ सीजन सब्जियों की खेती की और अच्छी कमाई हासिल की. पॉलीहाउस के अंदर तापमान, धूप और नमी को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है. इससे तेज गर्मी, पाला, तेज हवा और बेमौसम बारिश का फसल पर असर कम हो जाता है. 

वहीं मल्टी लेयर खेती में एक ही जमीन पर अलग-अलग ऊंचाई पर कई फसलें उगाई जाती हैं. जमीन के नीचे अदरक, हल्दी और अरबी जैसी फसलें लगाई जा सकती हैं. इसके ऊपर मचान बनाकर खीरा, करेला और लौकी उगाई जाती है, जबकि सबसे ऊपर पपीता और अमरूद जैसे पौधे लगाए जा सकते हैं. इस तरीके से खेत की लगभग हर जगह का इस्तेमाल हो जाता है और किसान एक ही जमीन से एक साथ कई फसलों की पैदावार ले सकता है. इससे कम जमीन में ज्यादा उत्पादन और अलग-अलग फसलों से कमाई का मौका मिलता है.


खेती पर नहीं पड़ेगा मौसम का असर, अपनाएं ये तकनीक

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सरकारी सब्सिडी से लागत कम

इस तरह की खेती शुरू करने में शुरुआती खर्च जरूर आता है. लेकिन सरकारी योजनाओं की मदद से किसान पर पूरा आर्थिक बोझ नहीं पड़ता. पॉलीहाउस, ड्रिप सिंचाई पर अलग-अलग योजनाओं के तहत सब्सिडी मिल सकती है. ड्रिप सिंचाई की मदद से पानी सीधे पौधों की जड़ों तक पहुंचता है. जिससे पानी की बर्बादी कम होती है और फसल को जरूरत के मुताबिक नमी मिलती रहती है. खासकर कम पानी वाले इलाकों में यह तरीका काफी काम का साबित हो सकता है. 

राष्ट्रीय बागवानी मिशन और कृषि विभाग की अलग-अलग योजनाओं के तहत पॉलीहाउस, ड्रिप, स्प्रिंकलर और पशुपालन से जुड़ी सुविधाओं पर किसानों को सब्सिडी मिल सकती है. किसान चाहें तो शुरुआत में अपनी जमीन और बजट के मुताबिक छोटे स्तर से इस खेती को शुरू कर सकते हैं. बाद में कमाई बढ़ने के साथ सब्जियां, फल, पशुपालन और दूसरी चीजों जोड़कर कमाई के और रास्ते बना सकते हैं.

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About the author नीलेश ओझा

नीलेश ओझा पिछले पांच साल से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उनकी लेखन शैली में तथ्यों की सटीकता और इंसानी नजरिए की गहराई दोनों साथ-साथ चलती हैं.पत्रकारिता उनके लिए महज़ खबरें इकट्ठा करने या तेजी से लिखने का काम नहीं है. वह मानते हैं कि हर स्टोरी के पीछे एक सोच होनी चाहिए.  

कुछ ऐसा जो पाठक को सिर्फ जानकारी न दे बल्कि सोचने के लिए भी मजबूर करे. यही वजह है कि उनकी स्टोरीज़ में भाषा साफ़ होती है.लिखने-पढ़ने का शौक बचपन से रहा है. स्कूल की नोटबुक से शुरू हुआ यह सफर धीरे-धीरे पेशेवर लेखन और पत्रकारिता तक पहुंचा. आज भी उनके लिए लेखन सिर्फ पेशा नहीं है यह खुद को समझने और दुनिया से संवाद करने का ज़रिया है.

पत्रकारिता के अलावा वह साहित्य और समकालीन शायरी से भी गहराई से जुड़े हुए हैं. कभी भीड़ में तो कभी अकेले में ख्यालों को शायरी की शक्ल देते रहते हैं. उनका मानना है कि पत्रकारिता का काम सिर्फ घटनाएं गिनाना नहीं है. बल्कि पाठक को उस तस्वीर के उन हिस्सों तक ले जाना है. जो अक्सर नजरों से छूट जाते हैं.

उन्होंने स्पोर्ट्सविकी, क्रिकेट एडिक्टर, इनशॉर्ट्स और जी हिंदुस्तान जैसे प्रमुख प्लेटफॉर्म्स के साथ काम किया है.

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