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गाजीपुर में रिश्तों का कत्ल
.इश्क जो मुकम्मल नहीं होता...और अगर हो भी जाए तो उसका अंजाम शायद गाजीपुर की इस कहानी की तरह ही होता है...वो इश्क अपने अंजाम तक भी पहुंचा...शादी के सात फेरों के रिवाजों को भी पूरा किया...लेकिन न जाने ऐसा क्या हुआ कि उस इश्क को किसी की नजर लग गई...जिस राजकुमारी की अरमानों की डोली अखिलेश अपने घर लेकर आया था...अब उसके कत्ल का इल्जाम भी उसी अखिलेश पर हैं...ऐसा क्यों हुआ आइए समझने की कोशिश करते हैं...
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श्रीप्रकाश सिंह, प्रोफेसरकुलपति, हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय, गढ़वाल उत्तराखंड
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