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ब्लॉगः चुनाव खत्म, दोस्ती हजम, मायावती ने तोड़ा अखिलेश से गठबंधन
2014 में हाशिये पर पहुंच चुकी मायावती की राजनीति 2019 में 10 सीटें जीतकर एक बार फिर पटरी पर लौट आई है और सपा फिर से अपनी खोई जमीन तलाशने में लगी है। 19 साल की सियासी अदावत को ताक पर रखकर मायावती और अखिलेश यादव ने लोकसभा चुनावों से पहले जिस दोस्ती की शुरुआत की थी वो दोस्ती खत्म हो चुकी है लेकिन शर्मिंदगी का दौर इस बेमेल राजनीतिक दोस्ती के होने पर नहीं बल्कि टूटने पर शुरु हो गया है। इंजीनियरिंग के छात्र रहे अखिलेश यादव चुनावी नतीजे के एक महीने गुजर जाने के बाद भी ये नहीं जान सके हैं कि दोस्ती की उनकी मशीन के कौन से पुर्जों में खामियां रह गईं लेकिन महीने भर से हार की पड़ताल में लगी मायावती ने साफ कर दिया कि मुसलमानों और दलितों को लेकर सपा का रुख गठबंधन के लिए नुकसानदायक साबित हुआ। अखिलेश अभी तक मौन हैं।
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