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Electoral bond: चुनावी चंदे की हकीकत क्या है..6000 करोड़ पर हंगामा क्यों बरपा ? पूरा मामला समझिए
इलेक्टोरल यानी चुनावी बॉन्ड. इस बॉन्ड पर राजनीतिक घमासान मचा हुआ है. केन्द्र सरकार की तरफ से राजनीतिक पार्टियों को चंदा देने के लिए इलेक्टोरल बॉन्ड की ये स्कीम जनवरी 2018 में लाई गई थी, लेकिन कांग्रेस ने इस पर नवंबर 2019 में जाकर आपत्तियां उठाई हैं. यानी इस बॉन्ड से होने वाले नुकसानों को समझने में कांग्रेस को एक साल 10 महीने लग गए. राजनीति में अक्सर ऐसा होता है, जब नेताओं को नुकसान समझ में नहीं आता.
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