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अंधाधुंध हो रही जंगलों की कटाई और अवैध खनन, क्या इसी वजह से साल-दर-साल बिगड़ता जा रहा मौसम?
बादलों का फटना हो या पहाड़ का टूटना, ये सब इसलिए भी हो रहा है क्योंकि इंसान ने प्रकृति की सीमाओं का बार बार अतिक्रमण किया है. पूरे हिमालय क्षेत्र में 2008 से 2018 के बीच यानी दस सालों में चार हजार 732 दशमलव 71 वर्ग किलोमीटर जंगल खत्म हो चुका है. बात जम्मू कश्मीर की करें तो वहां 410 वर्ग किलोमीटर जंगल उजड़ चुका है. हिमाचल प्रदेश में पहाड़ का अतिक्रमण करने वाले 33 हाइड्रो प्रोजेक्ट चल रहे हैं. तो उत्तराखंड में ऐसे 40 हाइड्रो प्रोजेक्ट चल रहे हैं.
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