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Akhilesh Yadav के किसानों से 'लुभावने' वादे
सबसे पहले पश्चिमी यूपी की बात करेंगे... जो 2014 से बीजेपी के लिए एक प्रयोगशाला रहा है.. क्योंकि बीजेपी ने यहां धर्म का ऐसा समीकरण बिठाया कि उसके बाद जातियों का कोई अंकगणित यहां नहीं चला.. और ये सिलसिला 2019 के लोकसभा चुनाव तक चलता रहा.. लेकिन इस बार किसान आंदोलन की वजह से हालात बिगड़े हुए हैं.. बीजेपी की हालत ठीक नहीं बताई जा रही है.. उधर दूसरी तरफ अखिलेश यादव ने सीधे जयंत चौधरी से गठबंधन कर लिया है.. और अब समाजवादी पार्टी किसानों के लिए बड़े बड़े वायदे कर रही है
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