Taliban के जुर्म से बचने के लिए भारत में ली शरण, उस खौफनाक मंजर को याद कर सिहर जाते हैं लोग
ज़हरा अफगानिस्तान से भारत 15 साल पहले आईं थीं. वहां इनका किडनैप हुआ और चाचा की हत्या कर दी गयी, जिसके बाद इन्हें वहां से भागना पड़ा. ये यहां पर अफगानी पेशेंटस के लिए मेडिकल केस ट्रांसलेटर का काम करती हैं. बाकी परिवार अफगानिस्तान ही है और बात करने पर परिवार ने बताया कि तालिबानी घर-घर मे घुसकर उन लोगों को ढूंढ रहे हैं, जो सरकार के साथ काम कर चुके हैं. उन्होंने कहा कि तालिबान इस वक्त लिबरल होने का दिखावा कर रहा है, लेकिन ये कभी नहीं सुधरेंगे. ओमीद भी 4 साल पहले मां के साथ भारत आये थे. ओमीद अफगानिस्तान में इंजीनियर थे पर दिल्ली में वेटर का काम कर रहे हैं. हालात याद कर के ओमीद रोने लगते हैं. बताते हैं कि बहन और बाकी परिवार वहीं हैं. क्या होगा उनका, सोच-सोच के रोना आता है.




























