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बच्चा-बच्चा राम का सिर्फ पानी लाने के काम का? 2 डिब्बे पानी के लिए जान हथेली पर लगाने की मजबूरी क्यों?
जिस देश की संपन्नता का जिक्र करते हुए कहा जाता था कि भारत में दूध की नदियां बहती थीं. उसी भारत में पानी के लिए बच्चे जान जोखिम में डाल रहे हैं. देश के दो शहरों की कहानी आज हम दिखाने जा रहे हैं. जहां पानी के लिए ट्रेन ही अब आखिरी सहारा है. इस रिपोर्ट को देखते हुए, आप सहमत हैं तो घंटी बजाकर आवाज उठाइए. सरकारों को जगाइए.
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