हब एंड स्पोक मॉडल: अहमदाबाद से सीधे जुड़ेगी दुनिया, खाड़ी देशों को भारत की टक्कर
अहमदाबाद से अब दुनिया दूर नहीं नजर आएगी. यहां जल्दी ही 'हब एंड स्पोक' मॉडल की शुरुआत होने वाली है. जिसके बाद खाड़ी देशों के ट्रांजिट हब्स को भारत की सीधी टक्कर दे पाएगा.

अगर आप गुजरात में रहते हैं और अमेरिका, ब्रिटेन या कनाडा जाना चाहते हैं तो अब आपको दुबई, दोहा या अबू धाबी में रुककर कनेक्टिंग फ्लाइट पकड़ने की मजबूरी नहीं होगी. वाराणसी और अमृतसर के बाद अब अहमदाबाद भी भारत के नए एविएशन नेटवर्क का हिस्सा बन गया है.
नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू, राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल, गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और गृह राज्य मंत्री हर्ष संघवी की मौजूदगी में इस नई व्यवस्था की शुरुआत की गई. इसके तहत एयर इंडिया की 'ईजी कनेक्ट' (Easy Connect) सेवा से अब अहमदाबाद के यात्री दिल्ली को ट्रांजिट हब बनाकर दुनिया भर की उड़ानें भर सकेंगे.
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हब एंड स्पोक मॉडल क्या है? यात्री के सफर से आसान भाषा में समझिए
मान लीजिए अहमदाबाद एयरपोर्ट पर तीन अलग-अलग यात्री खड़े हैं- एक को न्यूयॉर्क जाना है, दूसरे को लंदन और तीसरे को फ्रैंकफर्ट. किसी भी एयरलाइन के लिए हर शहर से दुनिया के हर कोने के लिए 300 सीटों वाला बड़ा विमान उड़ाना मुमकिन नहीं होता क्योंकि हो सकता है किसी एक दिन अहमदाबाद से न्यूयॉर्क जाने वाले सिर्फ 30 यात्री ही हों. इतने कम मुसाफिरों में सीधी उड़ान चलाना घाटे का सौदा है.
यहीं काम आता है 'हब एंड स्पोक' मॉडल
एयरलाइन अहमदाबाद, वाराणसी, अमृतसर और जयपुर जैसे शहरों (स्पोक) के यात्रियों को एक डोमेस्टिक फ्लाइट में बिठाकर दिल्ली ले आती है. दिल्ली एयरपोर्ट (हब) एक बड़े जंक्शन की तरह काम करता है, जहां देश भर से आए सभी न्यूयॉर्क जाने वाले यात्रियों को एक बड़े अंतरराष्ट्रीय विमान में बैठाकर सीधे न्यूयॉर्क रवाना कर दिया जाता है. इससे एयरलाइन को पूरे यात्री मिल जाते हैं और मुसाफिर को अपने ही देश के रास्ते दुनिया भर का आसान कनेक्शन.
यात्री की परेशानी - पहले क्या था और अब क्या बदलेगा?
मान लीजिए अहमदाबाद के एक परिवार को टोरंटो जाना है.
पुराने तरीके की मुश्किलें
- दोहरा चेक-इन - दिल्ली में उतरकर अपना सामान बेल्ट से उठाना, डोमेस्टिक टर्मिनल से बाहर निकलना और फिर इंटरनेशनल टर्मिनल पर जाकर दोबारा लंबी कतार में लगना पड़ता था.
- सामान का झंझट- भारी बैग खुद एक टर्मिनल से दूसरे टर्मिनल तक ढोने पड़ते थे.
- फ्लाइट छूटने का रिस्क - दो अलग टिकट होने के कारण अगर पहली घरेलू फ्लाइट लेट हुई तो आगे की अंतरराष्ट्रीय फ्लाइट छूटने का पूरा नुकसान यात्री का होता था.
- विदेशी हब्स की मजबूरी- दुबई या दोहा होकर जाने पर टिकट और ट्रांजिट का पूरा मुनाफा विदेशी एयरलाइंस और विदेशी एयरपोर्ट्स के खाते में चला जाता था.
नया 'ईजी कनेक्ट' सिस्टम
- सिंगल टिकट व सिंगल चेक-इन- अहमदाबाद में ही टोरंटो तक का बोर्डिंग पास मिल जाएगा और इमिग्रेशन की औपचारिकता पूरी हो जाएगी.
- ऑटोमैटिक बैगेज ट्रांसफर - अहमदाबाद में जमा किया गया बैग सीधे टोरंटो में ही मिलेगा. दिल्ली में बैग उठाने की कोई झंझट नहीं.
- एयरलाइन की जवाबदेही - सिंगल टिकट होने की वजह से अगर पहली फ्लाइट लेट भी होती है तो आगे की फ्लाइट का इंतज़ाम करना एयरलाइन की जिम्मेदारी होगी.
- आसान ट्रांजिट - बिना टर्मिनल बदले और बिना दोबारा लंबी लाइन में लगे यात्री सीधे कनेक्टिंग विमान में सवार हो सकेंगे.
1.7 करोड़ यात्रियों और अरबों रुपये की कमाई का खेल
भारत से हर साल करीब 2.5 करोड़ यात्री लंबी दूरी की अंतरराष्ट्रीय उड़ानों से सफर करते हैं. इनमें से 2 करोड़ यात्रियों को कहीं न कहीं कनेक्टिंग फ्लाइट लेनी पड़ती है. इन 2 करोड़ में से करीब 85% (लगभग 1.7 करोड़ मुसाफिर) दुबई, दोहा या अबू धाबी जैसे विदेशी एयरपोर्ट्स पर रुककर अपनी मंजिल तक जाते हैं. इसका सीधा असर यह होता है कि भारतीय यात्रियों के टिकट का बड़ा हिस्सा एयरपोर्ट ड्यूटी और विदेशी मुद्रा विदेशी कंपनियों के पास चली जाती है. भारत का यह मॉडल इसी अरबों रुपये के कारोबार को घरेलू एविएशन सेक्टर में वापस लाने की सीधी रणनीति है.
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एयर इंडिया का 'ईजी कनेक्ट' - अब तक का सफर
- 25 जून - वाराणसी बना देश का पहला स्पोक एयरपोर्ट. पहली फ्लाइट (AI 1111) से दिल्ली के रास्ते 9 अंतरराष्ट्रीय शहर जुड़े.
- जुलाई - अमृतसर दूसरा स्पोक बना, जहां से दिल्ली होकर 27 वैश्विक शहरों (अमेरिका, यूके, कनाडा, यूरोप आदि) के लिए सीधी कनेक्टिविटी मिली.
- अब अहमदाबाद- मजबूत एनआरआई नेटवर्क और भारी कारोबारी ट्रैफिक के चलते अहमदाबाद को तीसरा बड़ा स्पोक बनाया गया.
- अगली कतार में - पटना और चंडीगढ़ , गोवा, कोच्चि, चेन्नई, हैदराबाद, गुवाहाटी, पटना, वडोदरा और विशाखापत्तनम.
नागरिक उड्डयन मंत्रालय का लक्ष्य देश में 4 बड़े हब (दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु आदि) और 40 स्पोक एयरपोर्ट्स तैयार करना है ताकि छोटे शहरों के हवाई अड्डों का भी पूरा इस्तेमाल हो सके.
अहमदाबाद को प्राथमिकता क्यों?
गुजरात से अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा और खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासियों की तादाद बहुत बड़ी है. साथ ही व्यापारिक यात्राएं भी लगातार होती रहती हैं. अब तक इनमें से ज्यादातर यात्री खाड़ी देशों के एयरपोर्ट्स के जरिए जाते थे. अहमदाबाद को स्पोक बनाकर दिल्ली से जोड़ने से यह पूरा ट्रैफिक अब भारतीय नेटवर्क में ही बना रहेगा.
जमीन पर क्या हैं असली चुनौतियां?
- समय की पाबंदी - अगर अहमदाबाद से दिल्ली आने वाली फ्लाइट लेट हुई तो आगे की अंतरराष्ट्रीय कनेक्टिंग फ्लाइट छूटने का जोखिम रहेगा.
- दिल्ली एयरपोर्ट का इन्फ्रास्ट्रक्चर- घरेलू से अंतरराष्ट्रीय टर्मिनल ट्रांसफर, इमिग्रेशन और ऑटोमैटिक बैगेज सिस्टम की स्पीड विश्वस्तरीय रखनी होगी.
- किराया और सर्विस-खाड़ी देशों की एयरलाइंस से मुकाबला करने के लिए भारतीय एयरलाइंस को बेहतर सर्विस और किफायती किराया देना होगा.
- सीमित विकल्प- फिलहाल यह सुविधा मुख्य रूप से एयर इंडिया ही दे रही है जिससे यात्रियों के पास एयरलाइंस के ज्यादा विकल्प नहीं हैं.
अहमदाबाद का जुड़ना देश के एविएशन नेटवर्क के लिए एक बड़ा कदम है. आने वाले समय में जब विदेश से आने वाले यात्रियों के लिए 'इनबाउंड ईजी कनेक्ट' शुरू होगा और मुंबई तथा बेंगलुरु भी हब बनेंगे तब तय होगा कि भारत अंतरराष्ट्रीय उड़ानों का बड़ा ग्लोबल ट्रांजिट सेंटर बनने में कितना कामयाब होता है.





















