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Congress का मतलब है Gandhi-Nehru परिवार...लेकिन यही परिवार अब Congress के लिए रोड़ा बन रहा है !
दाग का शेर है ...जीस्त से डरते हो दाग तो फिर जीते क्यों हो , जान जाती भी नहीं जान से जाते भी नहीं . ये शेर राहुल गांधी पर फिट बैठता है . जीस्त का मतलब होता है जीवन के संघर्ष . दिल्ली दंगों में जो सड़क पर न दिखे , जो जोखिम लेने को तैयार नहीं हो , जो फिर से कांग्रेस अध्यक्ष बनने तो तैयार नहीं लेकिन कोई दूसरा बने इसके लिए रास्ता खोलने को तैयार नहीं . अब दाग का शेर फिर से सुनिये ...जीस्त से डरते हो दाग तो फिर जीते क्यों हो जान जाती भी नहीं , जान से जाते भी नहीं। देश के आर्थिक हालात खराब हैं , निर्माण और उत्पादन ठप्प है , बेरोजगारी चरम पर है , दिल्ली में दंगों से प्रधानमंत्री की छवि बदनाम हुई है .....एक विपक्षी दल को मोदी सरकार के खिलाफ और क्या चाहिए .....अगर विपक्षी दल देश की सबसे पुरानी पार्टी हो जिसने 17 आम चुनाव में दस जीते हो , जिसने पिछले 73 साल में 55 साल राज किया हो उस दल को तो अब तक सियासी हाहाकार मचा देना चाहिए था . लेकिन हो उल्टा ही रहा है . 2014 में जो बीजेपी 282 सीटें लाती हैं वो पांच साल बाद सीटों में इजाफा कर वापस सत्ता में लौटती है . लेकिन कांग्रेस तय ही नहीं कर पा रही है कि उसे करना क्या है . महाराष्ट्र में चौथे नंबर की पार्टी बनती है और सत्ता में शिव सेना के साथ भागेदारी कर लेती है . झारखंड में झारखंड मुक्ति मोर्चे की परछाई बन कर भी खुश दिखाई देती है . हैरानी की बात है कि दिल्ली विधानसभा में खाता भी नहीं खोलने के बावजूद कांग्रेस नेता प्रसन्न है क्योंकि बीजेपी हार गयी . कांग्रेस को समझ नहीं आ रहा कि जिस जिस राज्य में उसका वोट बीस फीसद से कम हुआ है वहां वहां वो फिर से सत्ता में नहीं आई है . यूपी में हमने देखा , बिहार में ऐसा ही हुआ , ओड़ीसा इसका उदाहरण है . तमिलनाडु तेलंगाना और आन्ध्र प्रदेश में यही हो रहा है . अब झारखंड और महाराष्ट्र को भी इसमें शामिल किया जा सकता है .
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