अब बच्चों को भी गंदी राजनीति में मोहरा बना रहे हैं राजनेता ! #KarnatakaHijabControversy
धर्म पर राजनीति होना भारत में कोई नई बात नहीं है. कर्नाटक में हिजाब का मुद्दा जब उछला तो पहली नज़र में शायद ही कोई अचंभित होता लेकिन फिर भी ये मामला तूल पकड़ गया क्योंकि इस बार इस राजनीति के बीच फँसे थे स्कूल के बच्चे. एक तरफ़ बच्चे हिजाब को अपना हक बता रहे थे तो दूसरी तरफ़ बच्चे एक 'ख़ास' रंग का गमछा पहन कर अपना विरोध जाता रहे थे. मामला एक स्कूल का न रह कर पूरे देश में एक बड़ा मुद्दा बन गया. लेकिन इस सब राजनीति के बीच अगर कोई पिस रहा है तो वो हैं बच्चे, जिनके ज़हन में अभी से ही ज़हर घोलने की कोशिश की जा रही है.
ज़हनों पर क़ाबिज़ नफ़रतों को हटाना ज़रूरी है, हर फ़िक्र धुएं में नहीं उड़ाई जाती
बच्चों को तो बख़्श दो ! तुम्हारे सियासी झमेलों में, उनको शामिल करना छोड़ दो
ये बचपन है उनका - जो करना चाहते हैं, करने दो
एक दूसरे की टांग खींचना चाहते हैं, तो खींचने दो
पढ़ना-खेलना चाहते हैं तो पढ़ने दो, खेलने दो
रंगों से रंगना चाहते हैं, तो रंगने दो
पर रंगों में, मज़हबी रंग न घुलना ज़रूरी है
हर फ़िक्र धुएं में नहीं उड़ाई जाती
ज़हनों पर क़ाबिज़ नफ़रतों को हटाना ज़रूरी है, हर फ़िक्र धुएं में नहीं उड़ाई जाती
किसी की दस्तार है, तो किसी का हिजाब है
पेशानी पर लगे चन्दन-तिलक का भी कोई हिसाब है?
भगवे और हरे के बीच सफ़ेद भी तो है !
जो याद रहे तो हो आबाद, जो भूल जाओ तो हर जानिब शहाब
जोड़ना है इस मुल्क़ की फ़ितरत, तोड़ना नहीं
जब बाँटने लगे कोई सियासत-दाँ तुम्हें, तो देना ये जवाब
मज़हब और धर्म के बीच का फ़र्क़ मिटाना ज़रूरी है
हर फ़िक्र धुएं में नहीं उड़ाई जाती
ज़हनों पर क़ाबिज़ नफ़रतों को हटाना ज़रूरी है, हर फ़िक्र धुएं में नहीं उड़ाई जाती


























