रेलवे की बेडशीट ओढ़कर बाजार घूमते दिखे लोग? VIDEO वायरल
वायरल वीडियो में तीन पुरुष सड़क किनारे एक बाजार जैसी जगह पर दिखाई दे रहे हैं. तीनों ने सफेद रंग की चादरें शरीर पर इस तरह लपेट रखी हैं, जैसे कोई शॉल या कंबल ओढ़ता है.

सोशल मीडिया पर एक वीडियो इन दिनों जमकर चर्चा में है, जिसमें तीन लोग सफेद रंग की चादरों को शॉल की तरह ओढ़े नजर आ रहे हैं. पहली नजर में यह वीडियो आम लग सकता है, लेकिन चादरों पर लिखा हुआ "Western Railway" लोगों का ध्यान खींच रहा है. वीडियो सामने आते ही सोशल मीडिया पर सवाल उठने लगे कि आखिर रेलवे की चादरें ट्रेन से बाहर बाजार तक कैसे पहुंचीं. मामला इसलिए भी चर्चा में आ गया क्योंकि इसी समय रेलवे की बेडरोल चोरी को लेकर RTI से सामने आए आंकड़े बेहद चौंकाने वाले हैं. हालांकि, वायरल वीडियो में दिख रही चादरें चोरी की ही हैं, यह वीडियो अपने आप में साबित नहीं करता है.
चादर पर लिखा था Western Railway, वीडियो ने खड़े किए सवाल
वायरल वीडियो में तीन पुरुष सड़क किनारे एक बाजार जैसी जगह पर दिखाई दे रहे हैं. तीनों ने सफेद रंग की चादरें शरीर पर इस तरह लपेट रखी हैं, जैसे कोई शॉल या कंबल ओढ़ता है. इन चादरों पर रेलवे से जुड़ी पहचान साफ दिखाई देती है. इसी वजह से वीडियो देखने वाले लोग हैरान रह गए. सोशल मीडिया पर दावा किया गया कि ये चादरें Western Railway की ट्रेन से चोरी की गई थीं. लेकिन यहां एक बात साफ समझना जरूरी है कि वायरल वीडियो में सिर्फ रेलवे की मार्किंग वाली चादरें दिखाई देती हैं. यह अपने आप में यह साबित नहीं करता कि इन्हें इन्हीं लोगों ने ट्रेन से चोरी किया या ये वही सामान हैं जो रेलवे के रिकॉर्ड में चोरी हुआ है. फिर भी वीडियो ने रेलवे की संपत्ति की सुरक्षा और उसके गलत इस्तेमाल को लेकर बहस जरूर छेड़ दी है.
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4 साल में 1.27 करोड़ बेडरोल सामान गायब
अब इस वायरल वीडियो के साथ रेलवे के बेडरोल चोरी के आंकड़े भी चर्चा में आ गए हैं. RTI के जरिए सामने आए आंकड़ों के मुताबिक जनवरी 2022 से मई 2026 के बीच भारतीय रेलवे की AC ट्रेनों से कम से कम 1.27 करोड़ बेडरोल सामान गायब या चोरी होने की जानकारी मिली है. इनमें करीब 46.54 लाख फेस टॉवल, 41.13 लाख बेडशीट, 23.59 लाख पिलो कवर, 12.95 लाख कंबल और 2.76 लाख तकिए शामिल हैं. उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर बेडरोल कॉन्ट्रैक्टर्स को करीब 104.51 करोड़ रुपये का नुकसान होने का अनुमान है. RTI के जवाब 69 में से 54 रेलवे डिवीजनों से मिले थे और कुछ डिवीजनों ने अधूरा डेटा दिया था, इसलिए वास्तविक आंकड़ा इससे ज्यादा भी हो सकता है. रिपोर्ट के मुताबिक 2022 से 2025 के बीच ऐसे सामान के गायब होने की घटनाओं में 56 फीसदी की बढ़ोतरी हुई.
नोट: वायरल वीडियो में दिख रही चादरों के बारे में चोरी का दावा सोशल मीडिया पर किया जा रहा है, लेकिन उपलब्ध जानकारी से यह स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं होती कि वीडियो में मौजूद लोगों ने ही उन्हें रेलवे से चोरी किया था. इसलिए इस मामले को "कथित रेलवे बेडशीट के इस्तेमाल" के तौर पर ही देखना ज्यादा सही है. एबीपी लाइव वायरल वीडियो की पुष्टि नहीं करता.
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सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस, कोई बोला सजा दो तो कोई बोला पहले जांच करो
वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स दो हिस्सों में बंट गए हैं. कई लोगों ने रेलवे की संपत्ति को निजी इस्तेमाल में लाने पर नाराजगी जताई और कहा कि लोगों में सार्वजनिक संपत्ति को लेकर जिम्मेदारी की भावना होनी चाहिए. कुछ यूजर्स ने तो ऐसे मामलों में कड़ी सजा की मांग तक कर दी. एक यूजर ने लिखा कि ऐसे लोगों में "civic sense" नहीं है, जबकि दूसरे ने कहा कि रेलवे की चीजें इस तरह इस्तेमाल करना गलत है और ऐसे लोगों को शर्मिंदा किया जाना चाहिए. वहीं कुछ लोगों ने वीडियो बनाने और लोगों को ऑनलाइन टारगेट करने पर ही सवाल उठा दिए. एक यूजर ने कहा कि अगर कोई व्यक्ति बारिश से बचने के लिए चादर का इस्तेमाल कर रहा है तो सिर्फ वीडियो बनाकर उसे परेशान करना सही नहीं है.
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