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प्रयागराज: करोड़ों की भीड़ के साथ माघ मेला कराना होगा बड़ी चुनौती, तैयारियां शुरू

मेले के आयोजन से जुड़े अफसरों से लेकर जन प्रतिनिधि तक मानते हैं कि कोरोना की महामारी के बीच इस तरह का आयोजन किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं होगा.

प्रयागराज: हरिद्वार में अगले साल होने वाले कुंभ मेले पर अभी भले ही आशंकाओं के बादल मंडरा रहे हों, लेकिन यूपी की योगी सरकार ने संगम नगरी प्रयागराज में माघ मेले के आयोजन पर अपनी मुहर लगा दी है. सीएम योगी की मंशा के मुताबिक़ सरकारी अमले ने मेले की तैयारियां शुरू भी कर दी हैं, लेकिन उसके सामने तकरीबन पांच करोड़ श्रद्धालुओं की भीड़ को कोरोना से बचाते हुए उन्हें सही सलामत घर तक वापस भेजना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं होगा. सरकार को इस चुनौती का बखूबी अंदाजा भी है, इसीलिये वह यहां सेहत और सुरक्षा का ऐसा मॉडल लागू करने की तैयारी में है, जो दूसरी जगहों पर होने वाले सार्वजनिक आयोजनों के लिए नज़ीर के तौर पर पेश हो सके.

मेले को लेकर योगी सरकार की मंशा है कि कल्पवासियों का संकल्प कतई खंडित न हो. कल्पवासियों से लेकर शंकराचार्य और दूसरे साधू-संत हमेशा की तरह इस बार भी महीने भर गंगा की गोद में रहकर जप-तप और पूजा-अर्चना कर सकें, लेकिन व्यवस्था कुछ इस तरह की हो, जिससे यहां आने वाली लाखों करोड़ों की भीड़ कोरोना के संक्रमण से भी बची रहे. इसी वजह से मेले के स्वरुप में बदलाव कर इसे छोटा किये जाने की तैयारी है. रणनीति यह बनाई गई है कि कल्पवासियों और साधू संतों के शिविर तो लगेंगे, लेकिन इनकी संख्या में कटौती की जाएगी.

हर साल की तरह इस बार भी अलग से तम्बुओं का शहर आबाद होगा, लेकिन निजी संस्थाओं के कैम्प नहीं लगेंगे. इससे मेले में करीब एक तिहाई कम शिविर लगाने होंगे. कम शिविर लगने के बावजूद न तो मेले का क्षेत्रफल कम होगा और न ही सेक्टरों की संख्या. स्नान घाटों की संख्या तकरीबन डेढ़ गुना बनाए जाने की तैयारी है, ताकि भीड़ किसी एक जगह पर इकट्ठी होने के बजाय बंटकर रहे. कल्पवासियों और संतों के शिविरों में भी तमाम पाबंदियां रहेंगी. यहां स्थाई तौर पर महीने भर या कुछ दिनों के लिए रुकने वाले सभी श्रद्धालुओं-सेवकों व कर्मचारियों का डाटा रखना होगा. मेले के लिए इस बार यह एडवाइजरी भी जारी करने की तैयारी है कि कल्पवास करने वाले सभी श्रद्धालु और साधू संत अपना कोविड टेस्ट कराकर ही मेले में आएं. मेले में कई जगहों पर कोविड जांच के सेंटर भी बनाए जाएंगे. यहां बीमार और संदिग्ध के साथ ही रुकने वाला कोई भी श्रद्धालु अपनी जांच करा सकेगा. मेले में स्थाई तौर पर ड्यूटी करने वाले कर्मचारियों- पुलिस कर्मियों और दुकानदारों का भी रैंडम टेस्ट कराया जाएगा.

पिछले साल के मेले पर 78 करोड़ रूपये खर्च किये गए थे

मेले के सभी सेक्टरों में अस्पताल और आइसोलेशन वार्ड बनाए जाएंगे. कोविड सुरक्षा को लेकर सरकारी अमले का पूरा फोकस कल्पवास करने यानी एक महीने तक स्थाई तौर पर रहने वाले संत महात्माओं और श्रद्धालुओं पर होगा. प्रमुख स्नान पर्वों पर आने वाले श्रद्धालुओं को जल्द से जल्द स्नान कराकर मेला क्षेत्र से वापस भेजने की तैयारी है. पिछले साल के मेले पर 78 करोड़ रूपये खर्च किये गए थे. इस बार का बजट अभी सरकार की तरफ से अनुमोदित नहीं किया गया है. विभागों से बजट का ब्यौरा भेजने को कहा गया है.

सरकार ने साफ़ कर दिया है कि कोविड की महामारी और हरिद्वार कुंभ की वजह से कम श्रद्धालु आने के बजाय सुविधाओं में कोई कटौती नहीं की जाएगी. सेनेटाइजेशन पर ख़ास फोकस किया जाएगा. इस बार का मेला ढाई हज़ार बीघे से ज़्यादा क्षेत्रफल में बसाया जाएगा. कोविड प्रोटोकॉल का हर हाल में पालन कराने के लिए इस बार ज़्यादा पुलिसकर्मियों की तैनाती की जाएगी. शिविरों और दुकानों के बीच दूरी रखी जाएगी. मेले में आने वाले हर व्यक्ति को मास्क पहनने के लिए प्रेरित किया जाएगा. कल्पवासियों के लिए ऐसी व्यवस्था रहेगी, जिसमे उनके रहने वाली जगहों पर बाहरी लोग प्रवेश न कर सकें.

हालांकि मेले के आयोजन से जुड़े अफसरों से लेकर जन प्रतिनिधि तक मानते हैं कि कोरोना की महामारी के बीच इस तरह का आयोजन किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं होगा. फूलपुर सीट से बीजेपी की सांसद केशरी देवी पटेल का मानना है कि चुनौती के बावजूद सीएम योगी ने मेले के आयोजन का एलान कर साहसिक कदम उठाया है. उनके मुताबिक़ गंगा मइया के आशीर्वाद और बेहतरीन व्यवस्थाएं लागू कर सरकार इस आयोजन को भी सफलतापूर्वक संपन्न कराएगी. उनका दावा है कि कोरोना से निपटने के इंतजामों पर सीएम योगी की अगुवाई में यूपी ने जो उपलब्धियां हासिल की हैं, उसे माघ मेले में और आगे बढ़ाया जाएगा.

मेले में छह प्रमुख स्नान पर्व होंगे

प्रयागराज रेंज के आईजी पुलिस केपी सिंह का कहना है कि मेले में कोविड गाइडलाइन का सख्ती से पालन कराया जाएगा. हर व्यक्ति की जांच तो संभव नहीं है, लेकिन यह एडवाइजरी जरूर जारी की जा सकती है कि मेले में रुकने वाले लोग अपना कोविड टेस्ट कराकर ही आएं. बीमार लोग आने से बचें. मेले में आने पर जिन्हे भी कुछ दिक्कत हो, वह तुरंत यहां बनाए गए अस्थाई अस्पतालों में अपना चेकअप कराएं. उनके मुताबिक़ लोगों की सुरक्षा और सेहत को लेकर तमाम कदम उठाए जाएंगे. व्यवस्था कुछ इस तरह से की जाएगी कि सभी श्रद्धालु सकुशल अपने घरों को वापस जाएं. साधू संत भी तमाम सुझाव देते हुए बेहतर सुविधाएं मुहैया कराए जाने की मांग कर रहे हैं. निर्वाणी अणि अखाड़े के महंत गोपाल जी महाराज के मुताबिक़ सीएम योगी ने जब मेले के आयोजन की बड़ी चुनौती को स्वीकार किया है, तो वह लोगों को सुरक्षित भेजने के भी उचित कदम ज़रूर उठाएंगे.

प्रयागराज का माघ मेला चौदह जनवरी से शुरू होना है. मेला ग्यारह मार्च को महाशिवरात्रि तक चलेगा. मेले में छह प्रमुख स्नान पर्व होंगे. सबसे बड़ा स्नान पर्व मौनी अमावस्या का होता है. मेले में हर साल तकरीबन पांच करोड़ श्रद्धालु आते हैं. प्रयागराज के माघ और कुंभ मेले में ही कल्पवास की परंपरा है. तकरीबन दो से तीन लाख साधू संत और श्रद्धालु हर साल यहां पूरे माघ महीने में रहकर कल्पवास करते हैं.

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मोहम्मद मोईन को पत्रकारिता का करीब तीन दशक का अनुभव है. वह प्रिंट - इलेक्ट्रानिक और डिजिटल तीनों ही माध्यमों में सालों तक काम कर चुके हैं. ABP नेटवर्क से वह पिछले करीब 18 सालों, स्टार न्यूज़ के समय से ही जुड़े हुए हैं. राजनीति - धर्म और लीगल टापिक के साथ सम सामयिक विषयों के एक्सपर्ट हैं. पत्रकार होने के साथ ही राजनीतिक विश्लेषक, एक्सपर्ट पैनलिस्ट, आलोचक और टिप्पणीकार भी हैं. इनकी चुनावी भविष्यवाणी ज्यादातर मौकों पर सटीक साबित हुई है. 8 लोकसभा चुनाव और कई विधानसभा चुनाव कवर कर चुके हैं. 7 कुंभ और महाकुंभ की कवरेज कर अपनी अलग पहचान बनाई है. यह अपनी बेबाक- निष्पक्ष और तथ्यपरक पत्रकारिता के लिए जाने जाते हैं. मोहम्मद मोईन ने चार विषयों पत्रकारिता एवं जनसंचार, राजनीति विज्ञान, हिंदी और मध्यकालीन व आधुनिक इतिहास विषयों में मास्टर डिग्री यानी स्नातकोत्तर किया हुआ है. लॉ ग्रेजुएट भी हैं. देश के कई राज्यों में काम करने का अनुभव रखते हैं. देश की तमाम नामचीन हस्तियों का इंटरव्यू ले चुके हैं और कई चर्चित घटनाओं को कवर चुके हैं. 

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