अब सामने आया एलडीए का फर्जीवाड़ा....नियमों की धज्जियां उड़ाते हुये मनमाने ढंग से दिये गये प्लॉट
यूपी की योगी सरकार लगातार घिरती जा रही है। पीएफ घोटाले को लेकर सरकार पर सवाल उठ रहे थे..इस बीच एक और नये घोटाले ने सरकार की मुसीबत बढ़ा दी है

लखनऊ, शैलेश अरोड़ा। पहले बिजली विभाग, फिर होमगार्ड और अब एलडीए... एक एक कर सभी विभागों में घोटाले सामने आ रहे हैं। घोटाले का नया मामला एलडीए में सामने आया है जिसकी शिकायत खुद डिप्टी सीएम केशव मौर्या ने मुख्यमंत्री से की है। ये शिकायत अगस्त में की गई थी। डिप्टी सीएम केशव मौर्या की तरफ से मुख्यमंत्री को भेजे गए पत्र में एलडीए के घोटालेबाजों की एक एक करतूत बिंदुवार लिखी गई है। शिकायत के अनुसार एलडीए ने न सिर्फ नियम दरकिनार कर प्लॉटों की नीलामी की बल्कि कई आवंटियों की फाइलें भी गायब कर दी। समायोजन के नाम पर भी चहेतों को चार गुना बड़े प्लाट थमा दिए। फ़िलहाल मुख्यमंत्री कार्यालय के निर्देश पर मामले की जांच चल रही है।
ये हैं शिकायतें
- महज 9 दिन पुरानी कंपनियों को प्लॉटों की नीलामी में जमीन दी गई, जबकि नियमनुसार 3 साल पुरानी कम्पनियां ही नीलामी में शामिल हो सकती थी। कई कम्पनियां तो नीलामी का विज्ञापन आने के बाद बनाई गई।
- शान ए अवध को पीपीपी मॉडल पर विकसित करने की जगह कमर्शियल प्लाट की तरह बेच दिया गया वो भी बिना शासन की अनुमति के। ऑडिट में भी इसमें वित्तीय अनियमित्ता की रिपोर्ट लगाई है।
- पारिजात, पंचशील, स्मृति, सृष्टि, सुलभ और सहज अपार्टमेंट में ठेकेदारों की धांधली सामने आने के बावजूद उनको ब्लैकलिस्ट नहीं किया गया। आरोप है सुलभ और सहज बनाने वाली कंपनी सिंटेक्स ने तो काम लेने के बाद उसे सबलेट भी कर दिया।
- आरोप है की पुरानी योजनाओं में 40 वर्गमीटर प्लाट के एवज में चहेते दलालों को गोमतीनगर विस्तार में 150 वर्गमीटर के प्लाट दिए गए।
- टीपी नगर, गोमतीनगर, जानकीपुरम समेत कई योजनाओं में सैंकड़ों आवंटियों की फाइलें गायब हुई। आरोप है की दोषियों की पहचान होने के बाद भी कार्रवाई नहीं हुई।
- करीब 200 फ्लैट्स का पंजीकरण होने के बाद कोई शुल्क जमा नहीं हुआ, इसके बाद भी ऐसे आवंटनों पर कार्रवाई नहीं हुई।
- रोहतास के खिलाफ हज़रतगंज समेत अन्य क्षेत्रों में 100 से अधिक FIR हैं। बावजूद इसके एलडीए रोहतास को बचाने में लगा है।
डिप्टी सीएम केशव मौर्या ने एलडीए की कारस्तानियों भरा पत्र 27 अगस्त को मुख्यमंत्री के यहां भेजा था। वहां से ये पत्र अगस्त में ही प्रमुख सचिव आवास को भेज दिया गया। सूत्रों की माने तो आवास विभाग ने अक्टूबर में मामले की जाँच के लिए कमिश्नर के यहां पत्र भेजा। इसके बार 17 अक्टूबर को कमिश्नर ने एलडीए को पत्र भेजकर जानकारी मांगी। करीब एक महीना होने को आया लेकिन इतने गंभीर मामले के बाद भी एलडीए की तरफ से कमिश्नर को जानकारी नहीं दी गई। अब एक बार फिर से कमिश्नर मुकेश मेश्राम ने एलडीए वीसी को तत्काल प्राथमिक रिपोर्ट देने के लिए कहा है।
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