यूपी: शरारती तत्वों ने चिता की आग से सुलगाया हुक्का, श्मशान घाट में घिनौने कृत्य पर पुलिस का एक्शन
Hapur News In Hindi: हाफिजपुर क्षेत्र से मानवता को शर्मसार कर देने वाला वीडियो सामने आया है. यहां ग्राम महमूदपुर स्थित श्मशान घाट पर चिता से हुक्का सुलगाने का वीडियो का सामने आया है.

कहते हैं कि मृत्यु के बाद श्मशान की शांति और चिता की पवित्रता का सम्मान हर धर्म और समाज में सर्वोपरि है, लेकिन उत्तर प्रदेश के जनपद हापुड़ के थाना हाफिजपुर क्षेत्र से मानवता को शर्मसार कर देने वाला वीडियो सामने आया है. इस वीडियो को देखकर किसी का भी खून खौल जाए. सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में कुछ युवक श्मशान घाट में जलती हुई चिता से हुक्का भरने के लिए आग लेते हुए दिखाई दे रहे हैं. घटना ग्राम महमूदपुर स्थित श्मशान घाट की है.
जानकारी के अनुसार, 10 अप्रैल 2026 को गांव की ही एक 75 वर्षीय बुजुर्ग महिला, मुन्नी देवी (पत्नी जोगिंदर), का निधन हो गया था. परिजनों ने विधि-विधान से उनका अंतिम संस्कार किया और भारी मन से घर लौट गए. लेकिन, जैसे ही परिजन वहां से हटे, गांव के ही कुछ अराजक तत्वों ने इस शोक की घड़ी को अपनी ओछी आदतों का अड्डा बना लिया.
चिता की आग से सुलगाया हुक्का
वायरल वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि किस तरह इन युवकों ने एक मृत आत्मा की शांति और अंतिम विदाई का मजाक उड़ाते हुए जलती चिता की आग का इस्तेमाल हुक्का सुलगाने के लिए किया. यह न केवल धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाला कृत्य है, बल्कि सामाजिक नैतिकता के पतन का एक भयावह उदाहरण भी है.
पुलिस ने की आरोपियों की पहचान, एक गिरफ्तार
वीडियो के वायरल होते ही हापुड़ पुलिस हरकत में आई और आरोपियों की पहचान कर तत्काल छापेमारी की. पुलिस के अनुसार, आरोपियों की पहचान अभिषेक (पुत्र सुरेंद्र), विनीत (पुत्र सुरेंद्रपाल), आरिफ (पुत्र शाहिद) और मोइन (पुत्र इस्लाम) के रूप में हुई है. ये सभी महमूदपुर के ही निवासी हैं. एक आरोपी अभिषेक को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है और उसे पूछताछ के लिए थाने लाया गया है. पुलिस ने उस हुक्के को भी बरामद कर लिया है, जिसके लिए चिता की आग का अपमान किया गया था. मुख्य आरोपी आरिफ को पकड़ने के लिए भी पुलिस लगातार दबिश दे रही है.
पुलिस बोली- नहीं बख्शे जाएंगे दोषी
हापुड़ की हाफिजपुर पुलिस ने स्पष्ट किया है कि इस मामले में किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा. पकड़े गए आरोपी के खिलाफ कड़ी धाराओं में विधिक कार्रवाई की जा रही है, जबकि फरार चल रहे अन्य तीन आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए दबिश दी जा रही है.
यह घटना समाज के सामने एक बड़ा सवाल खड़ा करती है कि आखिर आधुनिकता और रील बनाने के दौर में युवा पीढ़ी अपनी जड़ों और संस्कारों से इतनी दूर कैसे हो गई कि उसे जीवन के अंतिम पड़ाव यानी 'चिता' की मर्यादा का भी ध्यान नहीं रहा? पुलिस की इस सख्त कार्रवाई ने यह संदेश दिया है कि आस्था और मर्यादा से खिलवाड़ करने वालों की जगह केवल जेल की सलाखों के पीछे है.
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