'जितना पैसा आप सैफई महोत्सव में खर्च...', शिक्षा दिवस पर बोले CM योगी
सीएम योगी ने शनिवार 5 सितंबर को शिक्षक दिवस पर राजनीति करने वालों पर प्रहार करते हुए कहा कि चुनावी घोषणा अलग विषय है, पर स्मार्ट क्लास, डिजिटल लाइब्रेरी प्रदेश के अंदर आज दिखाई दे रहा है.

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार (5 सितंबर) को शिक्षक दिवस पर बेसिक और माध्यमिक शिक्षा के उत्कृष्ट शिक्षकों को राज्य अध्यापक पुरस्कार एवं मुख्यमंत्री अध्यापक पुरस्कार वितरित करने के बाद उपस्थित शिक्षकों व अन्य जन को संबोधित कर रहे थे. योगिराज बाबा गंभीरनाथ प्रेक्षागृह में आयोजित समारोह में बेसिक शिक्षा विभाग के 61 और माध्यमिक शिक्षा विभाग के 20 शिक्षकों (कुल 81) को पुरस्कृत किया गया. सभी शिक्षकों को मुख्यमंत्री ने अपने हाथों से पुरस्कृत किया.
शिक्षकों को पुरस्कार देते समय सीएम योगी ने उनसे आत्मीय संवाद कर बधाई दी और उन्हें खूब प्रोत्साहित भी किया. इस अवसर पर अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने विगत साढ़े नौ साल में शिक्षा व्यवस्था में आए सकारात्मक परिवर्तन की विस्तार से चर्चा करते हुए कहा कि बेसिक और माध्यमिक शिक्षा व्यवस्था में सुदृढ़ता लाने के काम वर्ष 2017 से पहले भी हो सकते थे, तबकी सरकारों ने ध्यान नहीं दिया.
इस दौरान सीएम योगी ने किसी का नाम लिए बिना तंज कसा, ‘जितना पैसा आप सैफई महोत्सव में खर्च करते थे, उसी पैसे में से थोड़ा सा पैसा शिक्षा की तरफ डाइवर्ट करते तो लाखों बच्चों का भविष्य बन चुका होता. जितना पैसा वर्किंघम की बग्गी मंगा कर अपना जन्मदिन मनाते थे, उतना पैसा शिक्षा पर खर्च करते, तो बच्चों का भविष्य बनता, पहचान का संकट नहीं आता.’
चुनावी घोषणा अलग पर स्मार्ट क्लास, डिजिटल लाइब्रेरी यूपी में दिख रहे
मुख्यमंत्री ने शिक्षा पर राजनीति करने वालों पर प्रहार करते हुए कहा कि चुनावी घोषणा अलग विषय है, पर स्मार्ट क्लास, डिजिटल लाइब्रेरी बनाना कठिन कार्य होता है और यह प्रदेश के अंदर आज दिखाई दे रहा है. उन्होंने कहा कि बयान देना आसान है, लेकिन एक करोड़ 60 लाख बच्चों के अकाउंट में डीबीटी के माध्यम से पैसा पहुंचा देना कठिन कार्य है और वह कार्य हुआ है. संस्कृत के छठी क्लास से लेकर के आचार्य तक बच्चों को स्कॉलरशिप के साथ जोड़ देना कठिन कार्य था लेकिन सरकार ने वह भी किया.
उन्होंने कहा कि प्रोजेक्ट अलंकार जैसे इनोवेशन के माध्यम से, ऑपरेशन कायाकल्प के माध्यम से, बेसिक हो या माध्यमिक इन विद्यालयों में परिवर्तन का निर्णय करना कठिन था और इसे भी किया गया. उन्होंने कहा कि टिप्पणी करना आसान काम है लेकिन करके दिखाना मुश्किल. सीएम योगी ने यूपी को बदनाम करने के लिए दुष्प्रचार की तरफ भी ध्यान आकृष्ट कराया. कहा कि दूसरे राज्य के एक जर्जर विद्यालय भवन का वीडियो झांसी का बताकर चलाया जा रहा था.
यूपी के शिक्षा जगत को अपमानित करने वालों को परिवर्तन नहीं दिखाई देता
सीएम ने कहा यूपी के शिक्षा जगत को अपमानित करने का प्रयास करने वालों को स्मार्ट क्लास, ऑपरेशन कायाकल्प जैसे व्यापक परिवर्तन दिखाई नहीं देता. मुख्यमंत्री ने शिक्षकों से अपील की कि हमारी प्रतिस्पर्धा चुनावी घोषणाबाजों से नहीं है. चुनावी उड़ानों पर बैठे लोगों की बजाय हमारी प्रतिस्पर्धा समय से है. उन्होंने कहा कि जिस बच्चे को आज आप पढ़ा रहे हैं, अगर आज आप चूक गए तो उसका बचपन दोबारा नहीं आने वाला है. इसलिए समय के साथ सही दिशा में, सही समय पर निर्णय लेने की आदत होनी चाहिए.
उन्होंने कहा कि शिक्षा के प्रति विश्वास को बनाए रखना सरकार और शिक्षकों की सामूहिक जिम्मेदारी है. उन्होंने कहा कि बदलती टेक्नोलॉजी पर हम मौन नहीं बने रह सकते. हमें एआई, रोबोटिक और ड्रोन टेक्नोलॉजी के अनुरूप खुद को तैयार करने की जरूरत है.
सपा का नाम लिए बगैर मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन लोगों को प्रदेश में चार बार शासन करने का अवसर मिला वह और जिस कांग्रेस को लगभग छह दशक तक यूपी में शासन करने का अवसर प्राप्त हुआ था, वह दोनों प्रदेश की बदलती व्यवस्था पर प्रश्न खड़ा करने का फिर से प्रयास कर रहे हैं. उनके स्वयं के स्मारक बने जर्जर भवन जिनको हम रिप्लेस कर चुके हैं, वे शिक्षा व्यवस्था पर प्रश्न खड़ा करने का प्रयास कर रहे हैं.
शिक्षा व्यवस्था को संसाधनपूर्ण व पारदर्शी बना रही सरकार
मुख्यमंत्री ने कहा कि डबल इंजन की सरकार अपनी एजुकेशन को एक्सक्लूसिव बनाने, उसे और अधिक रिसोर्सफुल (संसाधनपूर्ण) बनाने तथा शिक्षा की इस व्यवस्था को पूरी तरह ट्रांसपेरेंट (पारदर्शी) बनाने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि आपने पिछले नौ-साढ़े नौ वर्ष के अंदर बदलते हुए उत्तर प्रदेश को अपनी आंखों से देखा है. आप में से कोई भी शिक्षक ऐसा नहीं, जिसने नौ वर्ष पहले के उत्तर प्रदेश और पिछले नौ-साढ़े नौ वर्ष के अंदर बदलते हुए उत्तर प्रदेश को अपनी आंखों से न देखा हो. 2017 के उत्सव के पहले उपद्रव होता था. उस उपद्रव, कर्फ्यू, दंगों और अराजकता के माहौल में स्कूल-कॉलेजों के चलने की कल्पना भी नहीं की जा सकती थी.
उन्होंने कहा कि अब बीते साढ़े नौ वर्षों से यूपी में सुरक्षा का संकट नहीं है. अब उत्सव के पहले कोई उपद्रव नहीं कर सकता. सीएम ने कहा कि कल जन्माष्टमी थी. जन्माष्टमी के आयोजन पूरे प्रदेश में सभी 1586 थानों में, सभी देव मंदिरों में, सभी 75 जनपदों की पुलिस लाइन में, प्रदेश की सभी जेलों में, हर मोहल्ले हर गांव में आयोजित हुए लेकिन आपने कहीं कर्फ्यू या दंगा का नाम नहीं सुना होगा.
यूपी के अब शिक्षकों पर कोई प्रश्न नहीं
सीएम योगी ने कहा कि आज के उत्तर प्रदेश में कोई शिक्षकों पर प्रश्न नहीं खड़ा करता. जबकि 2017 के पहले क्या यह सच नहीं था कि ठेके पर नकल होता था. शिक्षा व्यवस्था बदनाम होती थी. युवाओं के सामने पहचान का संकट आता था और भारत की सबसे बड़ी आबादी का राज्य कटघरे में खड़ा होता था. 2017 के पहले उत्तर प्रदेश में लोग आना नहीं चाहते थे.
मुख्यमंत्री ने कहा यूपी का कोई युवा या कोई शिक्षक यूपी के बाहर जाता था, तो उसे संशय और शक की निगाहों से देखा जाता था. जबकि 2017 के बाद बाहर के लोग यूपी के युवा या शिक्षक का सम्मानजनक तरीके से अभिवादन करने को उत्सुक दिखाई देते हैं. मुख्यमंत्री ने कहा कि यूपी के प्रति धारणा बदली और आमूलचूल परिवर्तन आया है. इस परिवर्तन के महत्वपूर्ण वाहक शिक्षक हैं. इस परिवर्तन की सबसे प्रारंभिक कड़ी शिक्षा है और शिक्षा की मजबूत नींव शिक्षक हैं.
शिष्य का योग्य व संस्कारी बनना ही सबसे बड़ी गुरु दक्षिणा
सीएम योगी ने कहा कि भारत की अपनी विशिष्ट ज्ञान की परंपरा रही है. इस ज्ञान परंपरा ने शिक्षा को कभी व्यापार नहीं माना. प्राचीनकाल में गुरुकुल की शिक्षा पूरी होने पर शिष्य अपनी सामर्थ्य के अनुसार जो भी गुरु दक्षिणा देता था, गुरु उसके अनुसार संतुष्ट होकर के उसको आगे बढ़ने के लिए आशीर्वाद देता था. सीएम ने कहा कि गुरु के लिए सबसे बड़ी दक्षिणा होती थी कि उसका शिष्य योग्य हो, संस्कारी बने. इसी परंपरा ने भारत को दुनिया में ज्ञान की आराधना की भूमि के रूप में प्रस्तुत किया.
टीचर, टैलेंट और ट्रांसफॉर्मेशन को जोड़ा गया
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए टीचर, टैलेंट और ट्रांसफॉर्मेशन जोड़ा गया. इस ट्रिपल टी में शिक्षक का सम्मान है, विद्यार्थी की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा है विद्यालयों संसाधनों की उपलब्धता पर ध्यान है. मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने शिक्षामित्रों का मानदेय बढ़ाकर 18 हजार और अनुदेशकों का 17 हजार रुपये कर दिया है. साथ ही 5 लाख रुपये कैशलेस की स्वास्थ्य की सुविधा भी दी गई है. सामाजिक सुरक्षा की भी गारंटी उनको उपलब्ध करवाई गई. बेसिक, माध्यमिक, उच्च शिक्षा से जुड़े हुए सभी शिक्षकों, शिक्षणोत्तर कर्मचारियों, सबको उनके परिवार सहित 5 लाख रुपये प्रतिवर्ष कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा की व्यवस्था उपलब्ध करवाने का काम किया गया.
उन्होंने कहा पहली बार सोशल सिक्योरिटी की गारंटी भी इसके साथ दी गई है. ये व्यवस्थाएं शिक्षक के सम्मान में हैं. उन्होंने कहा कि शिक्षक का सम्मान हमारे लिए केवल मानदेय बढ़ाने का मुद्दा नहीं था. बल्कि हमारा मानना है कि गांव के बच्चे के भविष्य के साथ जिसे खड़ा रहना है, पहले उसका स्वयं का सम्मान होना चाहिए. कहा कि राज्य अध्यापक पुरस्कार की राशि जो पहले 10000 थी, इसको बढ़ाकर 25000 रुपये किया गया. सेवा से जुड़े हुए मामले में पारदर्शिता के लिए ह्यूमन रिसोर्स मैनेजमेंट पोर्टल विकसित किया गया. अब शिक्षक की समस्या फाइलों में कैद नहीं होगी. उसका समयबद्ध समाधान होगा.
मुख्यमंत्री ने कहा कि इसी तरह विद्यार्थियों की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए अनेक कार्य किए गए. इसके लिए सरकार के स्तर पर ऑपरेशन कायाकल्प से लेकर के निपुण भारत अभियान ये सभी कार्यक्रम व्यवस्थित रूप से आगे बढ़े. सीएम ने कहा कि अब केवल दूसरी क्लास में निपुण भारत अभियान नहीं चलेगा, बल्कि पांचवी क्लास तक चलेगा और उसके बहुत अच्छे परिणाम आ रहे हैं.
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि 2017 के पहले विद्यालय, नकल के अड्डे बन गए थे. ठेके चलते थे. दूर-दराज के, दूसरे राज्यों के छात्र यहां पर परीक्षा देने के लिए आते थे. परीक्षा देने के नाम पर ठेका होता था. 2017 के बाद ऐसे विद्यालय को परीक्षा केंद्र नहीं बनने दिया जाता है.
पूरा देश देख रहा है यूपी का शिक्षा मॉडल
मुख्यमंत्री ने बेसिक और माध्यमिक शिक्षा के क्षेत्र में आए बदलाव की विस्तार से चर्चा की. बताया कि अकेले माध्यमिक शिक्षा में 1500 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि पुराने और जर्जर विद्यालय भवनों की जगह नए भवन बनाने के लिए उपलब्ध करवाए गए. इससे 2100 से अधिक माध्यमिक विद्यालयों के अच्छे भवन आज सामने दिखाई दे रहे हैं. इसी तरह पहले चरण में हर जनपद में दो-दो सीएम कंपोजिट विद्यालय बनवाए जा रहे हैं. प्रयास है कि यह स्कीम हर तहसील स्तर पर जाए. इसका मॉडल अटल आवासीय विद्यालय की तर्ज पर ये डे स्कूल के रूप में होगा जहां पहली से लेकर 12वीं तक के बच्चे एक इंटीग्रेटेड कैंपस में पढ़ पाएंगे. यह शिक्षा की गुणवत्ता का एक अद्भुत मॉडल होगा.
उन्होंने कहा कि यूपी के स्कूलों में आज स्मार्ट क्लास है, डिजिटल लाइब्रेरी है, बालक-बालिकाओं के लिए सेपरेट टॉयलेट हैं, पेयजल की व्यवस्था है, भरपूर बिजली है. मुख्यमंत्री ने कहा कि 32000 से अधिक विद्यालयों में स्मार्ट क्लास, 15000 से अधिक विद्यालयों में आईसीटी लैब, 1129 विद्यालयों में डिजिटल लाइब्रेरी और 261000 से अधिक शिक्षकों को टैबलेट उपलब्ध करवाए गए हैं.सीएम ने कहा कि उत्तर प्रदेश का मॉडल आज पूरा देश देख रहा है. उत्तर प्रदेश का परिवर्तन पूरा देश महसूस कर रहा है.
इसीलिए, हम लोगों ने तय किया है, शिक्षा का यह मॉडल मजबूती के साथ आगे बढ़ेगा. सीएम ने बताया कि क्लीन एंड ग्रीन स्कूल बनाने की दिशा में हुए प्रयास से वर्ष 2025-26 में उत्तर प्रदेश के 12 विद्यालयों को राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त हुआ है. उन्होंने बाल वाटिका के स्तर से ही शिक्षा को मजबूत बनाने के प्रयास का उल्लेख करते हुए कहा कि जिस देश का बचपन स्वस्थ है, उस देश का भविष्य अपने आप सशक्त और समर्थ बनता है.
भेदभाव समाप्त करने का सरल माध्यम है टेक्नोलॉजी
मुख्यमंत्री ने कहा कि छात्रों में 21वीं सदी के स्किल्स डिजिटल लिट्रेसी और इनोवेशन के एप्रोच विकसित करने की दिशा में रोबोटिक्स, थ्री डी प्रिंटिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे एडवांस टेक्नोलॉजी की ट्रेनिंग के लिए हमारे विद्यालय तैयार हो रहे हैं. उन्होंने कहा कि जहां स्मार्ट क्लास पहुंची है, वहां शहर और गांव का भेद समाप्त हुआ है. जहां डिजिटल लाइब्रेरी पहुंची है, वहां गरीब और अमीर का भेद समाप्त हुआ है. भेदभाव समाप्त करने के लिए टेक्नोलॉजी सबसे सरल माध्यम है.
सीएम ने माध्यमिक शिक्षा में हुए परिवर्तन की चर्चा भी की. कहा कि 56 लाख बच्चे माध्यमिक शिक्षा में दसवीं और बारहवीं की बोर्ड परीक्षा में बैठते हैं. 2017 के पहले 3 महीने परीक्षा चलती थी और 3 महीना लगता था परिणाम आने में भी. इस देरी से यूपी के बच्चे यूपी के बाहर कहीं प्रवेश नहीं ले पाते थे. आज समय पर परीक्षा होती है और समय पर ही परिणाम भी आता है.
शिक्षक का स्थान नहीं ले सकती कोई मशीन
सीएम ने कहा कि टेक्नोलॉजी के बढ़ते प्रयोग के बाद भी शिक्षक का स्थान कोई नहीं ले सकता है. याद रखना होगा कि मशीन उत्तर दे सकती है, लेकिन मशीन प्रश्न करना नहीं सिखाती है. प्रश्न पूछना तो केवल एक शिक्षक सिखाता है. उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस संस्कार नहीं दे सकता, संस्कार तो शिक्षक देगा.
शिक्षकों को याद रखना होगा कि उनके हाथ में यूपी का भी भविष्य है और देश का भविष्य भी है. आप जिस बच्चे को आज पढ़ा रहे हैं, यही कल शिक्षक भी बनेगा, यही कल चिकित्सक भी बनेगा, यही कल अधिवक्ता भी बनेगा, यही प्रशासनिक अधिकारी भी बनेगा, यही वैज्ञानिक भी बनेगा, यही इंजीनियर भी बनेगा और यही देश का नेतृत्वकर्ता भी बनेगा. उन्होंने कहा कि बच्चे को आप जैसा संस्कार और अनुशासन देंगे, उसी रूप में वह आपको स्मरण करेगा. इसलिए हर शिक्षक का संकल्प होना चाहिए कि कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहने पाए.
शिक्षा और संस्कार से ही समर्थ और सशक्त बनेगा राष्ट्र
सीएम योगी ने कहा कि भारत, दुनिया का वह देश है जो सृष्टि के आदिकाल से ही ज्ञान का उपासक रहा है. अलग अलग कालखंड में ज्ञान की जितनी विशिष्ट परंपराएं भारत में आगे बढ़ीं वह दुनिया के अंदर अन्यत्र कहीं भी देखने को नहीं मिलतीं. ज्ञान की अधिष्ठात्री देवी मां सरस्वती की पूजा बसंत पंचमी के अवसर पर भारत में ही होती है.
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्राचीन काल से ही भारत ने शिक्षा के महत्व को बहुत अच्छे ढंग से उसे रेखांकित किया. भारत का यह मानना रहा है कि कोई भी राष्ट्र तभी सशक्त और समर्थ हो सकता है, जब उस राष्ट्र की भावनाओं के अनुरूप शिक्षा और उसके अनुरूप संस्कार वहां के बचपन और युवा पीढ़ी को प्राप्त हो रहा हो. उन्होंने कहा कि यह कार्य एक शिक्षक ही कर सकता है. हमारी युवा पीढ़ी को संस्कारी, अनुशासित बनाना, राष्ट्र के प्रति जवाबदेह बनाने में परिवर्तन का वाहक शिक्षक ही बनेगा.
डॉ. राधाकृष्णन को यादकर दी शिक्षक दिवस की बधाई
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने देश के दूसरे राष्ट्रपति सर्वपल्ली डॉ. राधाकृष्णन को यादकर प्रदेशवासियों को शिक्षक दिवस की बधाई दी. भारत रत्न से सम्मानित डॉ. राधाकृष्णन को उच्चकोटि का विद्वान और महान दार्शनिक बताते हुए कहा कि उनके सम्मान में उनकी जयंती शिक्षक दिवस के रूप में मनाई जाती है. मुख्यमंत्री ने शिक्षक/गुरु की भूमिका के उल्लेख में वेदव्यास, चाणक्य, सुश्रुत, चरक, आर्यभट्ट आदि के योगदान को भी याद किया.
शिक्षा एवं शिक्षक सीएम योगी की विशेष प्राथमिकता : गुलाब देवी
अध्यापक सम्मान समारोह में माध्यमिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गुलाब देवी ने कहा कि शिक्षा एवं शिक्षक मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की विशेष प्राथमिकता में शामिल हैं. वह शिक्षक साथियों के कल्याण व भलाई के लिए तत्पर रहते हैं. इसी के तहत शिक्षकों, शिक्षामित्रों, अनुदेशकों, और रसोइयों को कैशलेस इलाज सहित अनेक सुविधाएं दी हैं. उन्होंने कहा कि सीएम योगी के मार्गदर्शन में यूपी बोर्ड ने परीक्षाओं में शुचिता व पारदर्शिता का श्रेष्ठतम उदाहरण प्रस्तुत किया है. विगत वर्षों में बोर्ड परीक्षा में पेपर लीक जैसी कोई घटना नहीं हुई एवं परीक्षा नकलविहीन संपन्न होकर रिकार्ड समय में परिणाम घोषित हुआ. माध्यमिक शिक्षा मंत्री ने कहा कि विद्यालयों में पठन-पाठन का वातावरण हो, इसके लिए प्रोजेक्ट अलंकार के माध्यम से माध्यमिक विद्यालयों में अवस्थापना सुविधाएं ठीक की जा रही हैं.
आईसीटी एवं स्मार्ट क्लास की स्थापना करायी जा रही है. विद्यालयों में व्यावसायिक शिक्षा प्रारंभ की गयी है. उन्होंने कहा कि प्रदेश में संस्कृत शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए माध्यमिक संस्कृत शिक्षा परिषद के अधीन समस्त विद्यालयों के विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति व्यवस्था भी मुख्यमंत्री जी द्वारा की गयी है. इन विद्यालयों में अवस्थापना सुविधाओं का विकास भी प्रोजेक्ट अलंकार के अंतर्गत कराया जा रहा है.
सीएम योगी के मार्गदर्शन में बेसिक शिक्षा में उल्लेखनीय प्रगति: संदीप सिंह
शिक्षक दिवस पर आयोजित इस विशेष समारोह में सीएम योगी का स्वागत करते हुए बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह ने कहा कि विगत नौ वर्षों से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में सरकार शिक्षकों के सम्मान व कल्याण के लिए निरंतर कार्य कर रही है. मुख्यमंत्री जी के नेतृत्व में बेसिक शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हुई है. शिक्षा को डिजिटल टेक्नोलॉजी से जोड़कर उसे वर्तमान और भविष्य के अनुकूल बनाया गया है.
उन्होंने कहा कि 2017 के पहले की सरकारों के लिए शिक्षा राजनीति और वोट बैंक का माध्यम थी. पर, हमारी सरकार के लिए शिक्षा राजनीति नहीं बल्कि समाज और राष्ट्र निर्माण का माध्यम है. उन्होंने कहा कि नए बदलाव के क्रम में प्री-प्राइमरी से कक्षा-12 तक गुणवत्तापरक शिक्षा व्यवस्था के लिए प्रदेश में 150 (प्रति जनपद 2) मुख्यमंत्री मॉडल विद्यालयों का निर्माण 4500 करोड़ रुपये की लागत से कराया जा रहा है. बेसिक शिक्षा मंत्री ने कहा कि योगी सरकार शिक्षकों, शिक्षामित्रों एवं अनुदेशकों की समस्याओं के प्रति सदैव संवेदनशील रही है.
मुख्यमंत्री जी के नेतृत्त्व में शिक्षकों के लिए मुख्यमंत्री कैशलेस चिकित्सा योजना, सामाजिक-आर्थिक सुरक्षा, शिक्षामित्रों एवं अनुदेशकों के मानदेय में वृद्धि के ऐतिहासिक निर्णय लिए गए और व्यापक स्तर पर समारोह आयोजित करते हुए उन्हें सम्मानित किया गया. इसके अतिरिक्त हाल ही में पीएम पोषण योजना के अंतर्गत कार्यरत रसोइयों के मानदेय एवं ड्रेस धनराशि में वृद्धि की गयी, कैशलेस चिकित्सा योजना कार्ड का वितरण कराया गया. आर्थिक एवं सामाजिक सुरक्षा के रूप में दुर्घटना बीमा का लाभ दिलाने हेतु बैंक से एमओयू किया गया.
इस अवसर पर प्रदेश सरकार के मत्स्य विभाग के मंत्री संजय निषाद, महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव, एमएलसी एवं बीजेपी के प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. धर्मेंद्र सिंह, एमएलसी ध्रुव त्रिपाठी, विधायक श्रीराम चौहान, फतेह बहादुर सिंह, राजेश त्रिपाठी, विपिन सिंह, महेंद्रपाल सिंह, डॉ. विमलेश पासवान, प्रदीप शुक्ल, सरवन निषाद, राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष चारू चौधरी, अपर मुख्य सचिव बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा पार्थसारथी सेन शर्मा, बीजेपी के जिलाध्यक्ष जनार्दन तिवारी, महानगर अध्यक्ष रमेश प्रताप गुप्ता आदि प्रमुख रूप से उपस्थित रहे.
शिक्षा विभाग के स्टालों का अवलोकन किया सीएम ने
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कार्यक्रम स्थल पर बेसिक शिक्षा एवं माध्यमिक शिक्षा विभाग और बाल विकास एवं पुष्टाहार की तरफ से लगाए गए स्टालों का अवलोकन किया. उन्होंने बेसिक शिक्षा के स्टाल पर, लर्न बाई डूइंग, समावेशी शिक्षा, कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय और माध्यमिक शिक्षा विभाग के स्टाल पर अटल टिकरिंग लैब के बारे में विस्तार से जानकारी ली. मुख्यमंत्री ने स्टालों पर उपस्थित शिक्षकों और विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन भी किया.





















