नवाबों के शहर की बदल रही सूरत, यहां पढ़ें- पिछले पांच साल का लेखा-जोखा
लखनऊ के लाल कुआं इलाके में रहने वाले पंकज अवस्थी कहते हैं कि मेट्रो ने ना सिर्फ शहर को एक नई पहचान दी बल्कि काफी हद तक जाम की समस्या को भी खत्म कर दिया है।

लखनऊ: चुनावी माहौल है तो जाहिर है एक बार फिर बीते 5 सालों में सरकार के द्वारा किए गए कामकाज के लेखा-जोखा जनता के सामने रखा जाएगा। जनता को अब तय करना है कि उनके शहर की तस्वीर कितनी बदली है। क्या सरकार की तरफ से जो वादे किए गए थे वो पूरे हो चुके हैं या फिर अभी बहुत कुछ करना बाकी है। विकास की रफ्तार में लखनऊ को क्या मिला, लखनऊ कहां पहुंचा, आइये एक नजर डालते है नवाबों के शहर में हुए बदलावों की।
मेट्रो ने बदली तस्वीर
नवाबों का शहर लखनऊ सूबे की राजधानी होने के चलते सियासत का बड़ा केंद्र है। लखनऊ की तरक्की से इस बात का अंदाजा लगाया जा सका है कि सूबे में विकास कार्यों की क्या गति रही है। बीते 5 सालों में राजधानी लखनऊ में आए बदलावों की बात करें तो अब इस शहर में मेट्रो दौड़ रही है। बीते 5 सालों में मेट्रो की ना सिर्फ शुरुआत हुई है बल्कि इसका विस्तार भी हुआ है। आज मेट्रो ट्रेन एयरपोर्ट से लेकर ट्रांस गोमती के दूसरे छोर इंदिरा नगर तक लोगों के आने जाने का बड़ा साधन बन गई है।
खत्म हुई जाम की समस्या
लखनऊ के लाल कुआं इलाके में रहने वाले पंकज अवस्थी कहते हैं कि मेट्रो ने ना सिर्फ शहर को एक नई पहचान दी बल्कि काफी हद तक जाम की समस्या को भी खत्म कर दिया है। वहीं लखनऊ आगरा एक्सप्रेस-वे ने दिल्ली जाने का रास्ता भी आसान कर दिया है। अब लखनऊ वालों को दिल्ली जाने के लिए लखनऊ आगरा एक्सप्रेस-वे और फिर आगे यमुना एक्सप्रेस वे का रास्ता खूब भाता है। कहना गलत नहीं होगा कि लखनऊ के लिए मेट्रो और आगरा एक्सप्रेस- वे किसी बदलाव की शुरुआत से कम नहीं है।
यहां भी बदली तस्वीर
यातायात के बाद बीते 5 सालों में लखनऊ ने अपनी खूबसूरती और सुविधाओं को भी बढ़ाया है। बात अगर गोमती किनारे बने रिवर फ्रंट की करें तो गोमती किनारे बने इस रिवर फ्रंट ने ना सिर्फ लखनऊ वालों का बल्कि फिल्मी दुनिया के लोगों का भी दिल मोहा है और कई फिल्मों की शूटिंग तक रिवर फ्रंट पर की गई है। वहीं दूसरी ओर लखनऊ को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम भी मिला है। खिलाड़ियों के लिए क्रिकेट स्टेडियम एक नई ऊर्जा और प्रेरणा का केंद्र बन गया है।
बदलाव हो रहा है
बीते 5 सालों में व्यापारिक दृष्टि से भी लखनऊ ने अपनी अलग पहचान बनाने की कोशिश की है। एक तरफ लखनऊ के हर छोर में मॉल कल्चर ने अपनी दस्तक देकर शॉपिंग मॉल खड़े किए हैं, तो वहीं ट्रांस गोमती इलाके में होटल इंडस्ट्री ने भी पैर फैला लिए हैं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के तमाम होटल आज लखनऊ में खुल चुके है। निजी कंपनी में काम करने वाली रामांशी कहती हैं कि अब लखनऊ में काम करने के दौरान लगता ही नहीं कि वह दिल्ली और बेंगलुरु में काम नहीं कर रही हैं। यहां पर काम करने के माहौल में प्रोफेशनलिज्म आने लगा है। शहर बदल रहा है जो युवाओं के लिए अच्छा संकेत है। लखनऊ में एचसीएल जैसी आईटी कंपनी ने अच्छी शुरुआत की है। शहर में मिडलैंड,फॉर्टिस, अपोलो जैसे बड़े निजी अस्पताल खुल रहे हैं तो वहीं दूसरी तरफ कैंसर इंस्टीट्यूट ने लोगों के लिए उम्मीद की किरण जगाई है।
फिलहाल बीते 5 सालों में लखनऊ में तरक्की के रास्ते पर तेजी से कदम बढ़ाए हैं, और अब जरूरत है इन तेजी से बढ़ते कदमों को स्पीड देने की, जो चुनावी माहौल के बाद नई सरकार की जिम्मेदारी होगी।
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Source: IOCL

























