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कलाकार और किस्से: ऐसा खलनायक, जिसे सिनेमा आज भी याद करता है

पेशावर के एक पठान परिवार में पैदा हुए अमजद खान थिएटर की दुनिया से बड़े पर्दे पर आए। 1973 में चेतन आनंद की 'हिंदुस्तान की कसम' से उनके फ़िल्मी करियर की शुरुआत हुई।

नई दिल्ली, एबीपी गंगा| आज हम ऐसे खलनायक की जिंदगी से रुबरू होंगें, जिसे हिंदी सिनेमा आज भी याद करता है। एक मां अपने बच्चे को सुलाने के लिए अक्सर ये बोलती दिखाई देती है। सो जा नहीं तो गब्बर आ जाएगां। जी हां, हिंदी सिनेमा देखने वालों की जुबां पर आज भी जितना जय, वीरू, बसंती , ठाकुर और धन्नो का नाम है, उतना ही गब्बर का भी। और ये गब्बर कोई और नहीं हिंदी फिल्मों के सफल खलनायक अमजद खान हैं।.....सबसे पहले हम बात करते हैं अमजद खान की जिंदगी से जुड़े कुछ दिलचस्प किस्से के बारे में.....

दिलचस्प किस्सें

अमजद खान शेहला खान को बचपन से ही जानते थे

अमजद खान ने साल 1972 में अपने बचपन की दोस्त शेहला से शादी कर ली। उनकी धर्म पत्नी उसी बिल्डिंग में ही रहती थी जिसमें उनका फ्लैट था। शेहला खान जब स्कूल जाती थी, तो अमजद खान कॉलेज में पढ़ते थे। ये दोनों एक दूसरे को शादी से पहले से जानते थे। जब अमजद खान और शेहला खान की शादी हुई तो अमजद खान एक्टर नहीं थे, वो सिर्फ थिएटर करते थे। बता दें कि एक सफल खलनायक के साथ ही अमजद खान जर्नलिस्ट भी रहे। फिल्मों में आने का उनका कोई विचार नहीं था। उनको फिल्मों में काम करने में कोई दिलचस्पी नहीं थी। लेकिन उनकी जिंदगी तब बदल गई, जब उन्होंने एक दिन दिन फिल्मफेयर के कॉन्टेस्ट में हिस्सा लिया। अमजद ने ये कॉन्टेस्ट जीता। अमजद... शबाना हाशमी और कई बड़े कलाकारों के साथ थिएटर करते थे, लेकिन जब वो फिल्मफेयर के विजेता बने तो सलीम खान ने उनको देखा तभी उन्होंने तय कर लिया था कि उनकी फिल्म शोले के लिए गब्बर के किरदार में वो एकदम फिट बैठेंगे।

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शादी के एक हफ्ते बाद मिलनी शुरू हुईं फिल्मे

बता दें कि अमजद खान की शादी के एक हफ्ते के बाद ही उन्हें काफी सारे फिल्मों के ऑफर मिलने शुरू हो गए थे। एक खास बात और.. अमजद खान के बेटे शाबाद का जिस दिन जन्म हुआ, उसी दिन अमजद खान को फिल्म शोले में काम करने का ऑफर मिला था और उन्होंने उसी दिन इस फिल्म को साइन भी कर दिया था। अमजद खान ने पहले फिल्म को साइन किया फिर उसके बाद वो अपनी धर्म पत्नी और जन्में अपने बेटे शाबाद खान से मिलने हॉस्पिटल पहुंचे। एक और खासबात हम आपको बता दें कि अमजद खान अपनी पत्नी और बेटे को हॉस्पिटल से घर 11 बजे ले कर जाने वाले थे, लेकिन फिल्म को साइन करने के चक्कर में वो शाम के 4 बजे लेकर गए।

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अमजद खान बहुत शांति प्रिय इंसान थे

बड़े पर्दे पर खलनायकी के तेवर दिखाने वाले अमजद निजी जीवन में बेहद दरियादिल और शांति प्रिय इंसान थे। अमजद बहुत दयालु इंसान थे। हमेशा दूसरों की मदद को तैयार रहते थे। यदि फिल्म निर्माता के पास पैसे की कमी देखते, तो उसकी मदद कर देते या फिर अपना वेतन नहीं लेते थे। उन्हें नए-नए चुटकुले बनाकर सुनाने का बेहद शौक था। वो चाय और सिगरेट के बहुत शौकीन थे। मीठा उनको काफी पसंद था। अमजद खान कभी शराब नहीं पीते थे। साथ ही अपने करियर के दौरान, उन्होंने कभी भी गुस्से में अपना संतुलन नहीं खोया।

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पहले डैनी को मिला था शोले में गब्बर का रोल

शोले में गब्बर का रोल अमजद खान को नहीं बल्कि डैनी को मिलने वाला था। डैनी ने साइन किया हुआ चेक आज भी संभाल कर रखा है। गब्बर का रोल पहले डैनी को ऑफर हुआ था, लेकिन डैनी को उसी दौरान फिरोज खान की फिल्म 'धर्मात्मा' शूट करनी थी और उन्हें 'शोले' छोड़नी पड़ी।

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अमजद खान के पिता अपने भाई से हुए खफा

पेशावर के एक पठान परिवार में पैदा हुए अमजद खान थिएटर की दुनिया से बड़े पर्दे पर आए थे। हालांकि पिता के साथ उन्होंने बतौर बाल कलाकार कुछ फिल्मों में काम किया था, लेकिन 1973 में चेतन आनंद की 'हिंदुस्तान की कसम' से उनके फ़िल्मी करियर की शुरुआत हुई। अमजद खान के पिता जी के एक और भाई थे, जो खेबर में रहते थे। वो पठान थे और वो बेहद ही खुद्दार किस्म के आदमी थे। उनके पास ज्यादा पैसे नहीं हुआ करते थे और जब अमजद खान के पिता ने फिल्मी दुनिया में नाम कमा लिया था, और वो मशहूर एक्टर बन गए थे। तो उन्होंने अपने भाई को मुंबई बुलाया, तो उनके भाई ने साफ मना कर दिया था कि उनके पास उतने पैसे नहीं है कि वो मुबंई आ सके। उन्होंने अमजद खान के पिता जकारिया खान को अपने घर बुलाया और उनकी और उनकी पत्नी की खूब खातिरदारी की। जिसके बाद अमजद खान के पिता को लगा उनका भाई काफी पैसे वाला हो गया। साथ ही वो ये देखकर काफी खुश भी हुए थे। लेकिन जब वो मुंबई वापस जाने लगें तो अमजद खान के पिता को पता चला कि उनके भाई ने दावत देने के लिए अपने घर की आधी भेड़ बकरियों को बेच दिया था। सिर्फ अपने भाई को शान से रखने के लिए क्योंकि वो फिल्मी दुनिया के जानी- मानी हस्ती बन गए थे...उन्होंने उनकी शान से खातिरदारी की। और जब इस बात का उनके पिता को पता चला तो उनको बहुत बुरा लगा। उनको ऐसा लगने लग गया था कि ये सब सिर्फ मेरी वजह से हुआ है। उसके बाद वो कभी अपने भाई के घर नहीं गए।

अमजद खान ने ड्रामा और थियटर करके कमाया खूब नाम

अमजद खान के बेटे शादाब खान ने एक पुराना किस्सा सुनाया, उन्होंने बताया कि जब अमजद खान 8वीं क्लास में पढ़ते थे तो उन्होंने अपनी टीचर को पीट दिया था। फिर उसके बाद अमजद खान को स्कूल से निकाल दिया था। अमजद खान ने दो साल के लिए टाउन के स्कूल में पढ़ाई की थी। जब पढ़ाई खत्म हुई, तो उन्होंने आर.डी नेशनल महाविद्यालय में दाखिला लिया था। कॉलेज में उन्होंने ड्रामा और थियटर किया, जिसमें उनका खूब नाम हुआ था।

कलाकार और किस्से: ऐसा खलनायक, जिसे सिनेमा आज भी याद करता है

लेकिन आदत से मजबूर अमजद खान ने उस कॉलेज में भी किसी से लड़ाई कर ली। कॉलेज से भी उनको निकाला गया। फिर वो भनंत कॉलेज चले गए.... कुछ टाइम के लिए। इस कॉलेज में भी अमजद खान ने अपनी एक्टिंग और ड्रामा का सिलसिला शुरू किया और ये सब देखने के बाद आर.डी नेशनल महाविद्यालय ने फिर से अमजद खान को दाखिला दिया।

27 जुलाई 1992 में फिल्मी दुनिया को कहा अलविदा

साल 1976 में, फिल्म द ग्रेट गैंबलर की शूटिंग के दौरान, अमजद के साथ मुंबई-गोवा राजमार्ग पर एक गंभीर सड़क दुर्घटना हो गई थी, जिसमें उनके फेफड़े और पसलियों में चोटें आई थीं। उन गंभीर चोटों के कारण वह कोमा में चले गए। सौभाग्य से वो जल्द ठीक भी हो गए थे। लेकिन, ऑपरेशन के दौरान उनको दी जाने वाली दवाईयों ने उन्हें बहुत मोटा कर दिया था। अमजद का बढ़ते वजन के कारण 51 साल की आयु में दिल का दौरा पड़ने से 27 जुलाई 1992 को निधन हो गया था।

...और सफल खलनायक तक

27 जुलाई 1992 को सिर्फ 51 साल की उम्र में हिंदी सिनेमा के मारुफ कलाकार हमें छोड़ कर चले गए थे। उनकी कमी कभी भी कोई भी पूरी नहीं कर पाया। वो दुनिया को छोड़ कर तो चले गए, और पीछे छोड़ गए सिर्फ अपनी यादें और साथ ही बेहतरीन अदाकारी की मिसाले।

अमजद खान का जन्म 1943 में विभाजन से पहले लाहौर में हुआ था| वह हिंदी सिनेमा में जाने-माने अभिनेता जयंत के पुत्र थे| अमजद अपनी सफलता और अभिनेता के करियर को इतनी ऊँचाई देने का श्रेय पिता जयंत को देते थे। पिता को गुरू का दर्जा देते हुए उन्होंने कहा था कि रॉयल अकादमी ऑफ ड्रामेटिक आर्ट अपने छात्रों को जितना सिखाती है, उससे ज्यादा उन्होंने अपने पिता से सीखा है। नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा में यदि उन्होंने प्रवेश लिया होता, तो भी इतनी शिक्षा नहीं मिल पाती। उनके पिता उन्हें आखिरी समय तक अभिनय के मंत्र बताते रहे। अमजद खान दो भाई थे। अमजद खान बचपन में ही मुबंई आ गए थे। उन्होंने अपनी पढ़ाई सेंट एंड्रयूज हाई स्कूल बांद्रा में की थी। दोनों भाइयों ने अपनी पढ़ाई इसी स्कूल में की थी। एक्टर अमजद खान के तीन बच्चे हैं, दो बेटे एक बेटी... शादाब खान, सीमाब खान और अहलम खान। शादाब खान अपने पिता को डेडी बुलाते थे। इनकी पूरी फैमली पेशावर की रहनी वाली थी। विभाजन के समय अमजद खान के पिता जकारिया खान मुंबई आ गए थे, उन्हें मुबंई में फिल्म इंडस्ट्री में काम करना था। फिल्मों में काम करने के लिए उनके पिता जकारिया खान मुंबई आए तो शुरुआत में उन्हें 7 या 8 साल तक कोई काम नहीं मिला था। जब उनके पास काम नहीं होता था तो वो अपने बच्चो के लिए खिलौने बनाया करते थे।

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