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पश्चिमी यूपी का केंद्र मानी जाती है मेरठ लोकसभा सीट, 2014 में बीजेपी ने यहीं से फूंका था बिगुल

पश्चिमी यूपी की मेरठ लोकसभा सीट सियासी दलों के लिए बेहद अहम है। 2014 में बीजेपी ने यहीं से चुनावी बिगुल फूंका था। 2019 के लोकसभा चुनाव में सपा-बसपा के बीच हुए गठबंधन ने मुकाबला कड़ा कर दिया है।

मेरठ: मेरठ लोकसभा सीट पश्चिमी उत्तर प्रदेश का केंद्र मानी जाती है। सियासी लिहाज से यह सीट अहम है। फिलहाल ये सीट भारतीय जनता पार्टी का गढ़ मानी जाती है। 2014 के चुनाव में नरेंद्र मोदी ने उत्तर प्रदेश के अपने चुनाव प्रचार की शुरुआत यहां से ही की थी। मेरठ की रैली में जुटी लाखों की भीड़ से प्रदेश में बड़ा संदेश गया था। बीजेपी के राजेंद्र अग्रवाल यहां से लगातार दो बार सांसद चुने जा चुके हैं।

कौन है मैदान में

सपा-बसपा गठबंधन ने हाजी याकूब कुरैशी को मेरठ लोकसभा सीट से उम्मीदवार बनाया है। भाजपा ने राजेंद्र अग्रवाल पर एक बार फिर भरोसा दिखाया है तो वहीं, कांग्रेस ने हरेंद्र अग्रवाल को अपना प्रत्याशी बनाया है। यहां एक बात गौर करने वाली है कि मेरठ लोकसभा सीट बसपा के खाते में जाने से सपाइयों में खलबली मच गई है। इनमें वे नेता भी शामिल हैं, जो अपनी उम्मीदवारी पक्की मानकर चल रहे थे।

मेरठ लोकसभा सीट का इतिहास

देश में हुए पहले लोकसभा चुनाव में यहां कांग्रेस का परचम लहराया था। 1967 में सोशलिस्ट पार्टी ने कांग्रेस को मात दी थी। 1971 में एक बार फिर कांग्रेस ने बाजी मारी, लेकिन उसके अगले चुनाव में इमरजेंसी के खिलाफ चली लहर जनता पार्टी के हक में गई। हालांकि, 1980, 1984 में कांग्रेस की ओर से मोहसिना किदवई और 1989 में जनता पार्टी ने ये सीट जीती। 1990 के दौर में देश में चले राम मंदिर आंदोलन का मेरठ में सीधा असर दिखा और इसी के बाद ये सीट भारतीय जनता पार्टी का गढ़ बन गई।

1991, 1996 और फिर 1998 में यहां से लगातार भारतीय जनता पार्टी के दबंग नेता अमरपाल सिंह ने जीत दर्ज की। 1999, 2004 में क्रमश कांग्रेस और बसपा ने यहां से बाजी मारी। 2009 और 2014 में फिर यहां भारतीय जनता पार्टी का परचम लहराया।

दिलचस्प है समीकरण

2011 के आंकड़ों के अनुसार मेरठ की आबादी करीब 35 लाख है, इनमें 65 फीसदी हिंदू, 36 फीसदी मुस्लिम आबादी है। मेरठ में कुल वोटरों की संख्या 1964388, इसमें 55.09 फीसदी पुरुष और 44.91 फीसदी महिला वोटर हैं। 2014 में यहां मतदान का प्रतिशत 63.12 फीसदी रहा था।

मेरठ लोकसभा के साथ हापुड़ का कुछ क्षेत्र भी जुड़ता है, कुल मिलाकर यहां 5 विधानसभा क्षेत्र हैं। इनमें किठौर, मेरठ कैंट, मेरठ शहर, मेरठ दक्षिण और हापुड़ की सीट है। 2017 के लोकसभा चुनाव में इनमें मेरठ शहर समाजवादी पार्टी तथा अन्य विधानसभा सीटें भारतीय जनता पार्टी के खाते में गई थीं।

2014 में विरोधियों पर भारी पड़ी मोदी लहर

2014 के लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की लहर चली थी। इस लहर की शुरुआत मेरठ से ही हुई थी। मेरठ में भारतीय जनता पार्टी को करीब 48 फीसदी वोट मिले थे। मेरठ में राजेंद्र अग्रवाल ने स्थानीय नेता मोहम्मद शाहिद अखलाक को दो लाख से अधिक वोटों से मात दी थी। इस सीट पर बॉलीवुड अभिनेत्री नगमा कांग्रेस की ओर से चुनाव लड़ी थीं, हालांकि उन्हें हार का सामना करना पड़ा था।

2014 के आंकड़े

राजेंद्र अग्रवाल- भारतीय जनता पार्टी- कुल वोट मिले- 5,32,981- 47.86%

मोहम्मद शाहिद अखलाक- बहुजन समाज पार्टी- कुल वोट मिले- 3,00,655- 27.00%

शाहिद मंजूर- समाजवादी पार्टी- कुल वोट मिले 2,11,759- 19.01%

नगमा, कांग्रेस, कुल वोट मिले- 42,911- 3.85%

कौन हैं राजेंद्र अग्रवाल

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के बैकग्राउंड से आने वाले राजेंद्र अग्रवाल मेरठ लोकसभा सीट से दो बार सांसद चुनकर आए हैं। अग्रवाल ने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत प्रचारक के रूप में की थी। इमरजेंसी और अयोध्या आंदोलन के दौरान उनपर कई मामले भी दर्ज हुए।

प्रमुख मुद्दे

- हाईकोर्ट बेंच का गठन

- कूड़ा निस्तारण हो और नाले ढके जाए

- कानून व्यवस्था में सुधार

- ढांचागत विकास पर जोर

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