OTT से 'सतलुज' हटाने पर पंजाब में सियासी तूफान, अकाल तख्त और AAP ने केंद्र को घेरा
Satluj Movie Controversy: जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन पर बनी फिल्म 'सतलुज' को OTT से हटाने पर अकाल तख्त ने कड़ा विरोध जताया, जबकि बीजेपी ने रिव्यू कमेटी बनने की बात कही.

मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन पर आधारित फिल्म "सतलुज" को OTT प्लेटफॉर्म से हटाए जाने के बाद पंजाब में राजनीतिक माहौल गरमा गया है. इस मुद्दे पर विपक्षी दलों के साथ-साथ धार्मिक संस्थाओं ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है. एक तरफ श्री अकाल तख्त साहिब ने फिल्म हटाने पर कड़ा ऐतराज जताया है, वहीं पंजाब बीजेपी इस मामले में बचाव करते हुए नजर आ रही है.
पंजाब बीजेपी अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने कहा कि उनकी इस मुद्दे पर सूचना और प्रसारण मंत्री अश्वनी वैष्णव से बातचीत हुई है. उन्होंने बताया कि मंत्री ने इस मामले की समीक्षा के लिए 3 सदस्यीय रिव्यू कमेटी बनाई है, जो अपनी रिपोर्ट सौंपेगी. अपने बयान में केवल सिंह ढिल्लों ने ये भी कहा कि बीजेपी पंजाब के लोगों की भावनाओं के साथ खड़ी है.
अकाल तख्त ने जताया कड़ा विरोध
श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज ने फिल्म को हटाने के फैसले पर कड़ा ऐतराज जताया. उन्होंने मांग की कि केंद्र सरकार बड़ा दिल दिखाए और फिल्म को भारत में प्रदर्शित होने की अनुमति दे, ताकि लोगों को यह पता चल सके कि आतंकवाद के दौर में बेगुनाह नौजवानों के साथ किस तरह के अत्याचार हुए थे.
उन्होंने कहा, "पूरी दुनिया अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और मानवाधिकारों की रक्षा को बड़ा महत्व देती है मगर इस फिल्म को हटाकर अभिव्यक्तिंकी स्वतंत्रता को कुचला जा रहा है."
उन्होंने आगे कहा, "जसवंत सिंह खालड़ा ने 90 के दशक में पंजाब में युवाओं के हुए फर्जी एनकाउंटरों को पूरी दुनिया के सामने रखा जो मानवाधिकारों के हनन का सबसे गंभीर मसला था."
AAP ने केंद्र सरकार पर लगाया भेदभाव का आरोप
आम आदमी पार्टी के सांसद मलविंदर सिंह कंग ने भी केंद्र सरकार के फैसले पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार फिल्म को हटाने का निर्णय पंजाब के साथ भेदभावपूर्ण है, क्योंकि एक तरफ केंद्र सरकार कश्मीर फाइल्स और केरला फाइल्स जैसी फिल्मों को चलाने की इजाजत देती है. मगर सतलुज जैसी फिल्मों पर रोक लगा देती है जबकि फिल्म में पंजाब की सच्चाई दिखाई गई है.
फिल्म को लेकर अब पंजाब में राजनीतिक बहस तेज हो गई है. सभी की नजरें अब 3 सदस्यीय रिव्यू कमेटी की रिपोर्ट और केंद्र सरकार के अगले फैसले पर टिकी हैं.
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